सद्गुरु के समागम से सन्मार्ग की प्राप्ति : विजयरत्नसेन

मैसूरु। यहां महावीर भवन में सुमतिनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में विराजित आचार्यश्री चन्द्रभूषणसूरीश्वरजी ने सोमवार को अपने प्रवचन में कहा कि जैसे ब्रेक बगैर गा़डी मार्ग से भटक जाती है वैसे ही व्रत-नियम से अनियंत्रित जीवन मोक्ष मार्ग से भटक जाता है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास व्रत-नियम से युक्त होने का अवसर है जिससे विविध पापों से बचा जा सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि लोग योगा कैंप में जाते हैं, वह केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है और मात्र इस भव तक सीमित रहता है किंतु चातुर्मास में आराधना का कैंप तन, मन व वचन को स्वस्थ करता है। साथ ही भवो भव तक पुण्योपार्जन में निमित्त बनता है। चातुर्मास को धर्मार्जन का पर्व बताते हुए चन्द्रभूषणजी ने कहा कि उन्मार्ग से लिप्त लोगों को सन्मार्ग में भी पहुंचाता है। व्रतनियम का पालन देवता समान आयुष्य की भेंट प्रदान करता है। आचार्यश्री ने कहा कि जिनवाणी का श्रवण जीवन मंे परिवर्तन लाता है।

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