बेंगलूरु। यहां यशवंतपुर स्थानक में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वीश्री डॉ.पूजाज्योतिजी ने सोमवार को अपने प्रवचन में कहा कि संस्कार हमारे जीवन की प्रथम सी़ढी है। उन्होंने कहा कि जीवन में संस्कारों का होना जरुरी है, संस्कार के बिना जीवन अधूरा है। साध्वीश्री ने कहा कि संस्कार के बिना मनुष्य का जीवन पशुतुल्य होता है। संस्कार संस्कृति को जन्म देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कारहीन होने से समाज में असभ्यता व अभद्रता फैलती है। संस्कार सभ्यता और शालीनता का भी प्रतीक है। संस्कारों से ही साधारण मनुष्य उच्च कोटि का बनता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ धर्म से ही सन्यास धर्म की यात्रा प्रारंभ होती है। गृहस्थ धर्म को साधु धर्म की नींव बताते हुए डॉ.पूजाज्योतिजी ने कहा कि साधु के लिए श्रावक-श्राविकाएं माता-पिता हैं क्योंकि श्रावक और श्राविकाएं साधु और साध्वियों के संयम पालने में सहयोगी है। नवयुवक मंडल द्वारा सेवा कार्य किया गया। पुखराज आंचलिया परिवार के सौजन्य से दीनदयाल स्कूल के बच्चों को कम्प्यूटर प्रदान किया गया। संघ के अध्यक्ष सुमेरसिंह मुणोत, मंत्री रमेश बोहरा व पुखराज आंचलिया सहित ब़डी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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