दोड्डबालापुर। यहां महावीर भवन, जैन मंदिर में समणी प्रमुखा श्रीनिधिजी व समणी श्रुतनिधिजी ने सोमवार को अपने प्रवचन में कहा कि जीव वह है जो जीता है। जीव अर्थात् आत्मा कभी मारने से मरती नहीं, काटने से कटती नहीं, जलाने से जलती नहीं, हवा से सुखती नहीं, पानी में डूबती नहीं। उन्होेंने कहा कि आत्मा शाश्वत, ध्रुव और अनित्य है। परंतु पर्याय की अपेक्षा से यह आत्मा अशाश्वत है। समणीजी ने कहा कि अरुपी आत्मा दिखती नहीं मगर उसका अस्तित्व जरुर है। इस अवसर पर सेलम से नवरतनमल बोकि़डया व ईरोड से फकीर नाहर दंपति व गौतम बागमार भी उपस्थित थे। जयमल जैन श्रावक संघ द्वारा इनका स्वागत सत्कार किया गया।

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