अदालत.. प्रतीकात्मक चित्र
अदालत.. प्रतीकात्मक चित्र

पटना/दक्षिण भारत। पटना उच्च न्यायालय में बुधवार को पूर्व आईएएस अधिकारी केपी रमैय्या के मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश राकेश कुमार ने भ्रष्ट अधिकारियों के साथ ही न्यायापालिका पर भी सख्त टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा कि भ्रष्टाचारी न्यायपालिका से भी संरक्षण प्राप्त करते हैं।

जानकारी के अनुसार, पटना उच्च न्यायालय में ऐसा पहली बार हुआ है जब न्यायिक आदेश में न्यायपालिका की भूमिका पर ही सवालिया निशान लगा दिया गया। केपी रमैय्या की खारिज अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के इस मामले के आदेश की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, कानून मंत्रालय, कॉलेजियम, सीबीआई निदेशक कार्यालय को भी भेजी गई।

उल्लेखनीय है कि पूर्व आईएएस रमैय्या को निचली अदालत द्वारा जमानत दी गई थी। इस पर न्यायालय ने कहा कि एडीजे के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला साबित हुआ लेकिन उसे साधारण सजा मिली। रमैय्या पर बिहार महादलित विकास मिशन योजना में 5.55 करोड़ रु. के घोटाले का आरोप है।

क्या है मामला?
रमैय्या को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने आदेश दिया था कि वह निचली अदालत में आत्मसमर्पण करे। चूंकि विजिलेंस से संबधित होने के कारण जमानत की सुनवाई विजिलेंस जज की अदालत में होनी थी। उनके अवकाश पर होने की वजह से न्यायिक पदाधिकारी विपुल कुमार सिन्हा को प्रभार मिला था। जानकारी के अनुसार, रमैय्या ने उस दिन बेल-कम-सरेंडर याचिका दायर की और उसे जमानत मिल गई।

भ्रष्टाचारियों को संरक्षण के रास्ते
मामले पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अपने भ्रष्टाचार को छिपाने की मंशा से उच्च न्यायालय के वरिष्ठ जज भी मुख्य न्यायाधीश के आगे-पीछे लगे रहते हैं। न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने जब से इस पद की शपथ ग्रहण की है, तब से वे ऐसा देख रहे हैं कि वरिष्ठ जज भी मुख्य न्यायाधीश की खुशामद में लगे रहते हैं, जिससे कि उनसे तरफदारी हासिल की जा सके और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण प्राप्त होता रहे।

गरीब जनता की कमाई, बंगलों पर उड़ाई!
एकलपीठ ने यह भी कहा कि पटना उच्च न्यायालय के जजों के लिए बंगले आवंटित होते हैं, जिनकी सजावट और रख—रखाव में ही लाखों का खर्चा आता है। एक जज ने बंगले के सौंदर्यीकरण पर एक करोड़ से भी ज्यादा रुपए खर्च करवा दिए। यह रकम गरीब जनता की मेहनत की कमाई की है।

तीन हफ्ते में जांच का आदेश
न्यायाधीश राकेश कुमार ने सवाल किया, उच्चतम न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद भी केपी रमैय्या को किस परिस्थिति में नियमित जमानत दी गई? उन्होंने जिला जज को पूरे मामले की जांच कर तीन हफ्ते में रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए कहा है।