सांकेतिक चित्र
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नई दिल्ली/भाषा। दिल्ली में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म के बाद सड़क पर फेंके जाने वाली ‘निर्भया’ की मौत को सात साल बीत गए लेकिन उसके माता-पिता को अब भी अपनी बेटी के लिए न्याय का इंतजार है। निर्भया कांड के बाद दिल्ली को ‘रेप कैपिटल’ तक कहा जाने लगा लेकिन उसके माता-पिता का कहना है कि यह समस्या देशभर में है। इस घटना की वजह से दिल्ली को लेकर उनके दिल में कोई नफरत नहीं है जहां उन्होंने अपनी बेटी को खोया।

निर्भया की मां ने कहा, दिल्ली ने सबकुछ छीन लिया लेकिन हम दिल्ली से नफरत नहीं कर सकते क्योंकि हमारे राज्य उत्तर प्रदेश में भी ऐसी घटनाएं देखी जा रही हैं। दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं जहां हम जा सकें और जहां ऐसी घटनाएं न होती हों। आप पूरी दुनिया से नफरत नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा कि वे उम्मीद और प्रार्थना करती हैं कि स्थिति में सुधार हो। बीते कुछ दिनों में उन्हें उम्मीद की किरण नजर आई है, खासतौर पर ऐसी खबरें आने से कि मामले के चारों दोषियों को जल्द ही फांसी दी जा सकती है। निर्भया की मां ने कहा, हमें उम्मीद है। हम इसका इंतजार कर रहे हैं। जब तक हमें उनका (दोषियों) मृत्यु वारंट और तारीख नहीं मिल जाती तब तक यह आसान नहीं है। तमाम मुश्किलें झेलने के बावजूद 23 वर्षीया पैरामेडिकल छात्रा के माता-पिता ने भगवान पर भरोसा नहीं छोड़ा है।

पीड़िता के पिता ने कहा, मैं बीते सात साल से कर्म में विश्वास रखता हूं। मेरे साथ भगवान है। मैंने उस पर भरोसा नहीं छोड़ा है। स्वाभाविक है कि ये सवाल भी पूछते हैं कि ‘हमें इन सबका सामना क्यों करना पड़ रहा है?’ निर्भया के पिता ने कहा कि उन्हें अच्छे कर्मों पर भरोसा है। अपनी बेटी के लिए इंसाफ की उनकी जंग अब दोषियों की फांसी की दहलीज पर पहुंच चुकी है लेकिन उनका कहना है कि दूसरी ‘निर्भयाओं’ के लिए भी उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

बीते सात साल में उन्हें काफी अनुभव हो चुका है और उन्हें अब आपराधिक न्याय प्रणाली की कमियों और उससे निपटने के तरीके भी समझ आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि आगे की उनकी लड़ाई समयबद्ध न्याय पर केंद्रित होगी। निर्भया के पिता ने कहा, दया या पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए कोई समयबद्ध प्रक्रिया नहीं है। मामलों के लिए तय समयसीमा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह समझा जा सकता है कि निचली अदालत समय ले क्योंकि उसे दोनों पक्षों को सुनना होता है और साक्ष्यों की जांच करनी होती है, लेकिन उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय को समय नहीं लेना चाहिए क्योंकि उन्हें सिर्फ निचली अदालत के फैसले को परखना होता है।

निर्भया के पिता ने कहा, इसे लंबे समय तक नहीं खींचा जाना चाहिए और इसे ऑनलाइन किया जाना चाहिए। उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में मामलों को एक पखवाड़े से ज्यादा नहीं रहना चाहिए। त्वरित न्याय की बात चलने पर हैदराबाद में पशु चिकित्सक से सामूहिक दुष्कर्म के चार आरोपियों के कथित रूप से मुठभेड़ में मारे जाने का भी जिक्र होता है। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर वहां बहुत से लोग जश्न मनाते भी दिखे, क्या वो इस बात से सहमत हैं?

निर्भया की मां ने कहा, उन्हें जो भी सजा मिली, वह उस बेटी को जलाने के लिए नहीं थी, इसलिए न्याय नहीं हुआ। उन्होंने कहा, लोग इसलिए खुश थे क्योंकि न्याय में देरी होती है और उन्हें लगता है कि कम से कम कहीं यह समय से दिया गया। मुझे भी उस समय खुशी हुई थी।

निर्भया की मां ने कहा कि पशु चिकित्सक के माता-पिता को सात साल तक उस कटु अनुभव से नहीं गुजरना होगा जिससे हम गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर आप कानूनी पहलू से देखें तो उसे न्याय नहीं मिला लेकिन कम से कम उसके परिवार को यह मानसिक शांति होगी कि वे अब जिंदा नहीं हैं।