गृह मंत्री अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को हटाए जाने की प्रक्रिया और इस दौरान संसद में विपक्ष के आरोपों का भरपूर जवाब देने से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सियासी कद यकीनन बड़ा हुआ है। मोदी सरकार 2.0 के सत्ता में आते ही सबसे ज्यादा गृह मंत्रालय के चर्चे हैं। जानकारों की मानें तो शाह अपनी अलग कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वे अपने मंत्रालय के कामकाज पर गहरी नजर रखते हैं। खुद सुबह से लेकर देर रात तक काम में जुटे रहते हैं। इससे मंत्रालय से जुड़े मंत्रियों और अधिकारियों को भी खूब मशक्कत करनी पड़ती है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, शाह ने आते ही अपने मंत्रालय के कामकाज का तरीका बदल दिया। वे सुबह 10 बजे से पहले दफ्तर आ जाते हैं और देर शाम या रात तक मंत्रालय के काम को गंभीरता से अंजाम देते हैं। यही नहीं, रिपोर्ट में बताया गया है कि शाह लंच के लिए भी घर नहीं जाते। इसका असर यह हुआ कि गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी, नित्यानंद राय और अधिकारियों व कर्मचारियों को भी फुर्सत नहीं मिल पाती।

देश मना रहा छुट्टी, शाह आए दफ्तर
ईद पर जहां देशभर में छुट्टी थी, शाह उस रोज भी दफ्तर आ गए। इसके बाद मंत्रियों और अफसरों को भी दफ्तर का रुख करना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में जब गृह मंत्रालय की कमान राजनाथ सिंह के पास थी, तब यहां कामकाज का तरीका थोड़ा अलग था। रिपोर्ट के अनुसार, सिंह दोपहर का भोजन घर पर ही करते थे और उसके बाद कामकाज, बैठकें आदि वहां ही संपन्न होती थीं।

मोदी के बाद सबसे ज्यादा व्यस्त
वहीं, अमित शाह दफ्तर में ही बैठकें वगैरह कर लेते हैं। इस रिपोर्ट में शाह को मोदी के बाद ‘सबसे ज्यादा व्यस्त’ मंत्री करार दिया है। कुर्सी संभालते ही शाह ने अपने मंत्रालय के 19 विभागों को आदेश दिया कि वे प्रेजेंटेशन तैयार करें। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आठ संसदीय समितियों में भी शामिल किया। इसके अलावा उन पर भाजपा अध्यक्ष पद का दायित्व है।

नोट करवाते हैं जिम्मेदारी
शाह को करीब से जानने वाले भाजपा नेताओं का कहना है कि जब वे गुजरात की राजनीति में सक्रिय थे, तब भी उनकी कार्यशैली इससे अलग नहीं थी। बतौर भाजपा अध्यक्ष पार्टी की कमान संभालने के बाद शाह देशभर में संगठन कार्यकर्ताओं से रूबरू होते थे और उन्हें जिम्मेदारी देकर तय समय में पूरी करने पर जोर देते थे। शाह से अक्सर संपर्क में रहने वाले नेता दिन के अलावा रात को भी अपने पास कागज-कलम रखते हैं, क्योंकि पार्टी अध्यक्ष किसी भी समय फोन कर जिम्मेदारियां नोट करवा सकते हैं।

संगठन कौशल से जीते कई चुनाव
साल 2013 में जब भाजपा ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पार्टी के चुनाव अभियान की जिम्मेदारी सौंपी, तब शाह के भी केंद्र में आने के कयास लगाए जा रहे थे। साल 2014 में मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा की कमान अमित शाह को सौंपी गई। शाह के संगठन कौशल के बूते भाजपा ने कई राज्यों के विधानसभा चुनाव जीते।

लाखों किमी की यात्रा!
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, अमित शाह ने 2014-19 के बीच दस लाख किलोमीटर से ज्‍यादा दूरी की यात्राएं की हैं। इसमें छह लाख किमी की यात्रा चुनाव संबंधी कार्यों के लिए की, जबकि 4.13 लाख किमी की यात्रा पार्टी से जुड़े कार्यों के लिए की। भाजपा नेताओं के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद शाह भाजपा दफ्तर में भी देर तक व्यस्त रहते और नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रणनीति पर मंथन करने में जुटे रहते। इसका असर चुनाव परिणामों में दिखाई दिया।

बूथ मजबूत मतलब जीत पक्की!
चुनाव अभियान में अमित शाह के निर्देश पर भाजपा ने बूथ को मजबूत करने पर बहुत जोर दिया। बता दें कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात में संगठन मंत्री थे, तब अमित शाह बूथ मजबूत करने की जिम्मेदारी लेते थे। उन्होंने वह फॉर्मूला लोकसभा चुनाव में लागू किया तो उसका असर नतीजों में साफ दिखाई दिया, मोदी सरकार प्रचंड बहुमत के साथ एक बार फिर सत्ता में आ गई।