पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने कई फैसलों के लिए याद किए जाएंगे। वे जानेमाने वकील थे। साथ ही सियासी मामलों की उन्हें काफी समझ थी। संप्रग-2 शासन के दौरान जब वे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष थे तो सदन में तर्क और प्रमाण सहित कई मुद्दों के लिए आवाज बुलंद की।

साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बनी राजग सरकार में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। बतौर वित्त मंत्री, इस अवधि में उन्होंने कई फैसले लिए जो काफी चुनौतीपूर्ण भी थे। इनमें सबसे चर्चित ‘माल और सेवा कर'(जीएसटी) रहा। इसे स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा कर सुधार भी कहा जाता है। जुलाई 2017 की पहली तारीख से लागू किए गए जीएसटी के पीछे जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समय के साथ इस प्रणाली में कई सुधार किए गए और फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान बनाया गया।

सुधारों से बदली तस्वीर
मोदी सरकार ने सार्वजनिक बैंकों को सशक्त बनाने की दिशा में उनका एकीकरण किया। वित्त मंत्री के तौर पर जेटली ने इस प्रक्रिया की अगुवाई की। इन सबके बीच राजकोषीय घाटा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती था। जेटली को वित्त मंत्री के रूप में इसका श्रेय​ दिया जाता है कि साल 2014 में जो राजकोषीय घाटा 4.5 प्रतिशत था, वह अप्रैल 2019 में 3.4 प्रतिशत हो गया। जेटली ने वित्त मंत्री रहते बजट सुधारों पर खासतौर पर ध्यान दिया। रेल बजट को आम बजट में मिलाने के साथ ही उसे पेश करने के समय में बदलाव किया गया।

योजनाओं की रकम खातों में
मोदी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में जिस जनधन योजना की देश-विदेश में काफी चर्चा रही, उसे आम लोगों तक पहुंचाने में जेटली की भूमिका रही। इससे देशभर में बड़ी तादाद में लोग बैंकों से जुड़े। नागरिकों को सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी और अन्य योजनाओं की रकम सीधे उनके बैंक खातों में जमा होने लगी। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी।

एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यूनतम राशि रखने की बाध्यता न होने के बावजूद जनधन खातों में जमा राशि एक लाख करोड़ के आंकड़े तक जा पहुंची है। वहीं, जुलाई तक 36.06 करोड़ जनधन खाते खुल चुके हैं। आम जनता के लाभ के लिए इन खातों पर दुर्घटना बीमा एक लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपए हो गया है। ओवरड्राफ्ट की सीमा भी दोगुनी यानी 10 हजार रुपए की गई है।

‘बैंकरप्सी कोड’ से कसी नकेल
बैंकिंग व्यवस्था में सुधार के लिए बनाए गए कानून ‘इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड’ के लिए भी जेटली को याद किया जाएगा। दरअसल इस कानून के जरिए ऐसे लोगों/कंपनियों पर नकेल कसी गई जो बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लेकर उन्हें चूना लगा देते हैं। इस कानून के बाद दो साल में ही 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की संपत्तियों का निस्तारण हुआ।

ब्याज दरों के लिए पारदर्शी व्यवस्था
इसके अलावा मजबूत मौद्रिक नीति​ निर्माण के लिए 2016 में मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) का गठन किया गया। इस छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व आरबीआई गवर्नर करते हैं। इसमें तीन सदस्य आरबीआई से और तीन ही सरकार की ओर से होते हैं। यह समिति ब्याज दरों का निर्धारण करती है। एमपीसी के गठन के लिए भी अरुण जेटली को याद किया जाएगा।