सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत

नई दिल्ली। थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शनिवार को देश की सुरक्षा के संबंध में अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब को अशांत करने के लिए साजिशें रची जा रही हैं। बाहरी ताकतों के जरिए पंजाब में उग्रवाद को उठाने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई न की गई तो काफी देर हो जाएगी।

जनरल रावत ‘भारत में आंतरिक सुरक्षा की बदलती रूपरेखा: रुझान और प्रतिक्रियाएं’ विषय पर एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इसमें सेना और पुलिस के कई सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ और अतिथि मौजूद थे। इस मौके पर जनरल रावत ने देश की सुरक्षा और उसके खतरों को लेकर कई बातें कही हैं। उन्होंने बताया कि असम में भी बाहरी संबंध और उकसावे की गतिविधियों से उग्रवाद को परवान चढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं।

जनरल रावत ने पंजाब में अशांति फैलाने की साजिशों पर कहा कि यह शांतिपूर्ण राज्य रहा है, लेकिन बाहरी लिंक की वजह से यहां दोबारा उग्रवाद को स्थापित करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमें सतर्क रहना है। जनरल रावत ने बताया कि हम अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते और यदि जल्द कोई कार्रवाई नहीं करते हैं तो काफी देर हो जाएगी। गौरतलब है कि अस्सी के दशक में पंजाब में खालिस्तान समर्थक आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया था, जिसके बाद यहां हालात बिगड़े और देश में कई अप्रिय घटनाएं हुईं।

पैनल चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने भी इस मुद्दे को उठाया कि पंजाब में उग्रवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने अपने बयान में ब्रिटेन में 12 अगस्त को हुई खालिस्तान समर्थक रैली का भी उल्लेख किया जो ‘जनमत संग्रह 2020’ के मकसद से आयोजित की गई थी।

जनरल रावत ने कहा कि आतंरिक सुरक्षा देश की बड़ी समस्याओं में से है, फिर भी हम समाधान नहीं तलाश पाए, क्योंकि इसमें बाहरी संबंध हैं। बता दें कि यह आयोजन सेंटर फॉर लैंड एंड वारफेयर स्टडीज की ओर से किया गया था। जनरल रावत इसके संरक्षक हैं। सेमिनार में देश की सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

जनरल रावत ने उग्रवाद के मुद्दे पर कहा कि इसे सैन्य बल से समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए हमें ऐसा दृष्टिकोण अपनाना होगा जिसमें सभी एजेंसियां, सरकार, नागरिक प्रशासन, सेना और पुलिस एकीकृत तरीके से काम करें। उन्होंने असम की स्थिति पर कहा कि यहां बाहरी संबंधों के जरिए उग्रवाद को दोबारा जिंदा करने की कोशिशें हो रही हैं।

बता दें ​कि पाकिस्तान की आईएसआई कश्मीर के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में अशांति भड़काने वाले तत्वों को प्रोत्साहन देती है। वर्ष 1971 की लड़ाई में भारत से मात खाने के बाद पाकिस्तान की फौज और आईएसआई भारत में अशांति भड़काने की साजिशों में जुटी हैं। कई खुफिया रिपोर्टों में इनका भंडाफोड़ हो चुका है। ऐसे में सभी देशवासियों को भारत की अखंडता की रक्षा के लिए एकता बनाकर रखनी चाहिए।

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