Parliament Of India
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नई दिल्ली/भाषा। संसद के चालू बजट सत्र के दौरान इस सप्ताह जम्मू-कश्मीर से संबंधित दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा होगी जिसमें से एक जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए अनुच्छेद 356 को जारी रखने का प्रस्ताव है जबकि दूसरा जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक 2019 है। संसद के दोनों सदनों में तीन तलाक पर रोक का प्रावधान करने वाले मुस्लिम महिला विवाद अधिकार संरक्षण विधेयक पर चर्चा होगी जो संसद से पारित होने के बाद अध्यादेश का स्थान लेगा।

१७वीं लोकसभा के गठन के बाद नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह पहला विधेयक है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में भारी हंगामे के बीच यह विधेयक पेश किया था। सरकार के पिछले कार्यकाल में भी तीन तलाक पर विधेयक लाया गया था लेकिन लोकसभा से पारित हो जाने के बाद यह राज्यसभा से पास नहीं हो पाया था। सदन में जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक 2019 भी चर्चा एवं पारित करने के लिए लाया जाएगा।

इसके तहत जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन करने की बात कही गई है। इसके जरिये अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी, वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास रहने वाले लोगों की तरह ही आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

१७वीं लोकसभा के गठन के बाद बुलाए गए संसद के पहले सत्र के दौरान 40 विधेयकों पर चर्चा एवं उन्हें पारित कराए जाने के लिए लाने की योजना है। इनमें से कुछ विधेयकों को अध्यादेश के स्थान पर लाया जाएगा जबकि कुछ विधेयक राज्यसभा में पेश किए जाने के बाद संसदीय समितियों को भेजे गए थे।इस हफ्ते राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में प्रताप चंद सारंगी पेश करेंगे और इसका सहसमर्थन डॉ. हीना गावित करेंगी।

राज्यसभा में यह प्रस्ताव जेपी नड्डा पेश करेंगे जबकि इसका सह समर्थन श्रीमति सम्पतिया करेंगी। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है जबकि जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए अनुच्छेद 356 को जारी रखने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तीन घंटे का समय रखा गया है।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भाषा से कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सभी से चर्चा के बाद कामकाज की रूपरेखा तय की गई है। सरकार चाहती है कि संसद का कामकाज सुचारू रूप से चले। इस सत्र में बजट पेश होना है, साथ ही कई महत्वपूर्ण विधाई कामकाज भी हैं।

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