चिर निद्रा में लीन सुषमा स्वराज
चिर निद्रा में लीन सुषमा स्वराज

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। बुधवार सुबह जब पूरे देश तक यह खबर पहुंची कि पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का रात को निधन हो गया है, तो हर कोई स्तब्ध रह गया। सोशल मीडिया पर उन्हें नमन करने के लिए श्रद्धा का सैलाब उमड़ आया।

एम्स में आखिरी सांस लेने के बाद सुषमा की पार्थिव देह उनके घर लाई गई जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित विभिन्न दलों के नेताओं और चर्चित हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी की आंखें नम हो गईं और वे भावुक हो गए। आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी सुषमा स्वराज की पुत्री बांसुरी से गले लगकर रोईं।

शानदार भाषण कला के साथ ही माथे पर बड़ी गोल बिंदी सुषमा स्वराज की पहचान रही है। अपने आखिरी सफर पर निकलने से पहले सुषमा के माथे पर उसी तरह की बिंदी सुशोभित थी। लाल जोड़ा पहने हुए एवं चिर निद्रा में लीन सुषमा स्वराज की ये तस्वीरें जब सोशल मीडिया के जरिए देश-दुनिया में पहुंचीं तो हर किसी के जेहन में उनसे जुड़ीं यादें ताजा हो गईं।

इसके बाद सुषमा स्वराज की पार्थिव देह भाजपा मुख्यालय लाई गई जहां भारी तादाद में नेता और कार्यकर्ता उनके अंतिम दर्शन के लिए खड़े थे। सुषमा स्वराज के स्वर्गवास की सूचना मिलने के बाद देश के कोने-कोने से भाजपा कार्यकर्ता दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में एकत्रित होने लगे।

इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुषमा स्वराज को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मशहूर मसाला उद्योगपति धर्मपाल गुलाटी ने भी सुषमा को श्रद्धांजलि दी और वे काफी भावुक थे।

सुषमा स्वराज की पार्थिव देह पर कार्यकर्ताओं ने पुष्प अर्पित किए और नमन किया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के झंडे से सुषमा की पार्थिव देह को ढका। देशभर में सुषमा स्वराज के साहसी फैसलों की चर्चा होती रही जब उन्होंने विश्व मंचों से पाकिस्तान को घेरा और मुसीबत में फंसे नागरि​कों को सोशल मीडिया के जरिए मदद पहुंचाई।

मैंने अपनी बहन को खो दिया: आजाद
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा सदस्य गुलाम नबी आजाद ने सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने बीते लम्हों को याद किया और कहा, राजनीति अपनी-अपनी जगह है.. असल जिंदगी में मैंने आज अपनी बहन को खो दिया। वे एक अच्छी इंसान और अच्छी लीडर थीं। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम एक-दूसरे को करीब 40-45 साल से जानते थे, लेकिन सदन के अंदर हों या बाहर, कभी नाम से नहीं पुकारा। आजाद बोले, मैं हमेशा पूछता था- बहन तुम कैसी हो? वे कहती थीं- भाई आप कैसे हो? उन्होंने कहा, बहुत धक्का लगा.. कभी यह कल्पना नहीं कर सकते थे कि सुषमाजी ऐसे चली जाएंगी।

LEAVE A REPLY

13 + fifteen =