पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। अनुच्छेद-370 के संबंध में भारत सरकार की कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने विरोध जताने के लिए बुधवार को भारत से कारोबारी रिश्ते निलंबित करने का फैसला किया। हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो इससे पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को ही ज्यादा चोट पहुंचेगी।

चूंकि अपनी जरूरतों के लिए भारत की पाकिस्तान पर निर्भरता बहुत कम है, वहीं पाकिस्तान अपने रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाला काफी सामान भारत से मंगाता है। इस तरह अपनी फौज के इशारे पर आनन-फानन में फैसला लेकर इमरान ने पाकिस्तान का ही नुकसान कर लिया।

पड़ोसी मुल्क प्याज, टमाटर और खाद्य वस्तुएं भारत से मंगाता है। इसके साथ ही कई रसायनों का भी भारत से आयात करता है जिनका इस्तेमाल वहां विभिन्न उद्योगों में किया जाता है। अगर पाकिस्तान अधिक अवधि तक भारत से कारोबारी रिश्ते निलंबित रखता है तो उसकी अर्थव्यवस्था को झटका लगना तय है।

इस संबंध में एक विशेषज्ञ कहते हैं, द्विपक्षीय कारोबार निलंबन पाकिस्तान को ज्यादा प्रभावित करेगा। उसकी भारत पर निर्भरता ज्यादा है। पाकिस्तान टमाटर, सब्जियों और विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए भी भारत पर निर्भर है। पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा पाक का ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा खत्म करने और आयात-निर्यात पर कड़े फैसले लेने से वहां टमाटर की ​कीमतें 300 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं और पूरे पाक में सब्जियों की किल्लत हो गई थी।

भारत-पाक कारोबारी रिश्तों के एक विशेषज्ञ कहते हैं कि पाकिस्तान ऐसे फैसले लघु अवधि के लिए ले या दीर्घ अवधि के लिए, इससे उसे ही ज्यादा नुकसान होगा। इससे उसके व्यापारियों को हानि होगी।

बता दें कि फरवरी में पुलवामा हमले के बाद से भारत-पाक में कारोबार पहले ही काफी घट चुका था। भारत ने जब पाकिस्तानी सामान पर 200 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाई तो पाकिस्तानी ट्रकों के पहिए थमने लगे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, उस समय पाक से होने वाला आयात 92 प्रतिशत तक कम हो गया था। मार्च में तो यह सिर्फ 2.84 मिलियन डॉलर तक सीमित रह गया था, जो साल 2018 में इसी माह में 34.61 मिलियन डॉलर था। ऐसे में भारत को कपास, फल और सीमेंट जैसी वस्तुएं निर्यात करने वाले पाक के लिए यह फैसला घाटे का सौदा ही कहा जाएगा।

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