सोनिया गांधी
सोनिया गांधी

नई दिल्ली/भाषा। राहुल गांधी द्वारा इस्तीफा वापस लेने से इनकार करने के बाद कांग्रेस कार्य समिति ने शनिवार को सोनिया गांधी को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया। कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष होंगी। राहुल गांधी का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया गया है। इससे पहले शनिवार को दो बार सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई जिसमें नेताओं ने राहुल से इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। राहुल के नहीं मानने के बाद सीडब्ल्यूसी ने सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि बैठक में तीन प्रस्ताव पारित किए गए। पहला प्रस्ताव राहुल गांधी के नेतृत्व पर आधारित था। उनके नेतृत्व की प्रशंसा की गई और आभार जताया गया। दूसरा प्रस्ताव सोनिया गांधी से अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष बनने की मांग पर आधारित था, इसे स्वीकार कर लिया गया। पार्टी का नया अध्यक्ष चुने जाने तक सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष रहेंगी। इसके अलावा तीसरा प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर पारित किया गया। इसमें वहां की परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की गई। सुरजेवाला से पहले राहुल ने भी मीडिया को बताया था कि बैठक में कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा हुई।

दिनभर ऐसे चला घटनाक्रम
बता दें कि इससे पहले पार्टी नेताओं की परामर्श बैठकों में यह आम राय बनी थी कि राहुल गांधी को कांग्रेस का नेतृत्व करते रहना चाहिए। हालांकि राहुल ने सीडब्ल्यूसी बैठक में पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार नहीं करेंगे। नए अध्यक्ष को लेकर सुबह हुई सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद नेताओं ने पांच अलग-अलग समूहों में मंथन किया। इन समूहों के परामर्श की रिपोर्ट के आधार पर सीडब्ल्यूसी की रात आठ बजे होने वाली बैठक में फैसला होना तय किया गया था।

इस बीच, पार्टी संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके राहुल गांधी ने नया अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया था। सीडब्ल्यूसी के नेताओं ने पांच अलग अलग समूहों- पूर्वोत्तर क्षेत्र, पूर्वी क्षेत्र, उत्तर क्षेत्र, पश्चिमी क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र- में बांटकर प्रदेश अध्यक्षों, राष्ट्रीय सचिवों तथा कई अन्य पदाधिकारियों के साथ परामर्श बैठकें कीं तथा उनकी राय ली।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के समूह में अहमद पटेल, अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद और कई अन्य वरिष्ठ नेता, पूर्वी क्षेत्र के समूह में केसी वेणुगोपाल, कुमारी शैलजा, तरुण गोगोई और कई अन्य वरिष्ठ नेता, उत्तरी क्षेत्र वाले समूह में प्रियंका वाड्रा, पी चिदंबरम, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कई अन्य वरिष्ठ नेता, पश्चिमी क्षेत्र के समूह में एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खरगे और कई अन्य वरिष्ठ नेता तथा दक्षिणी क्षेत्र के समूह में मनमोहन सिंह, अधीर रंजन चौधरी, आनंद शर्मा तथा कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे।

सूत्रों के मुताबिक, इन सभी पांच परामर्श बैठकों में नेताओं के बीच सर्वसम्मति से यह राय बनी थी कि राहुल गांधी ही कांग्रेस का नेतृत्व कर सकते हैं और उन्हें अध्यक्ष पद पर बने रहना चाहिए।

सीडब्ल्यूसी की पहले दौर की बैठक के बाद पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा था, सीडब्ल्यूसी के सभी सदस्यों ने राहुल गांधी से अध्यक्ष बने रहने और नेतृत्व करने का सहमति से आग्रह किया। उन्होंने यह अनुरोध भी किया कि आज जब मौजूदा सरकार संवैधानिक प्रावधानों, नागरिकों के अधिकारों और संस्थाओं पर आक्रमण कर रही है तो ऐसे समय मजबूत विपक्ष के लिए और कांग्रेस को नेतृत्व देने के लिए राहुल गांधी उपयुक्त व्यक्ति हैं।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, राहुल गांधी ने अपना इस्तीफा वापस लेने से इनकार किया और कहा कि सीडब्ल्यूसी के सदस्यों और दूसरे नेताओं से नए अध्यक्ष को लेकर व्यापक विचार विमर्श किया जाए। सुरजेवाला ने कहा कि सीडब्ल्यूसी पांच अलग-अलग समूहों में परामर्श बैठक करेगी। रात आठ बजे सीडब्ल्यूसी की फिर बैठक होगी जिसमें इन समूहों की बातचीत में निकले निष्कर्ष के आधार पर कोई निर्णय लिया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में सुरजेवाला ने यह कहा था कि सीडब्ल्यूसी की बैठक में शामिल ज्यादातर नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी को अध्यक्ष बने रहना चाहिए। हालांकि राहुल ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने से साफ इनकार किया।

बैठक से बाहर आने के बाद पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने कहा, मुझसे विकल्प के बारे में पूछा गया और मैंने कहा कि राहुल गांधी का कोई विकल्प नहीं है। राहुल गांधी के नेतृत्व में ही पार्टी मजबूत हो सकती है। उधर, बैठक से बाहर निकलने के बाद सोनिया ने संवाददाताओं से कहा, नया अध्यक्ष तय करने के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई है। मैं और राहुल इसका हिस्सा नहीं हो सकते। मेरा नाम बैठक के लिए गलती से शामिल हो गया था।

दरअसल, इस्तीफा देते समय राहुल गांधी ने कहा था कि गांधी परिवार का कोई व्यक्ति अध्यक्ष नहीं बनेगा और वह इसके चयन की प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चयन की प्रक्रिया से अलग होने के बारे में पूछे जाने पर सुरजेवाला ने कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं ने यह फैसला किया ताकि किसी की राय पर उनका प्रभाव नहीं पड़े।

सीडब्ल्यूसी की बैठक में पार्टी संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खरगे, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कई अन्य नेता शामिल हुए।

कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर दिनभर मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खरगे, अशोक गहलोत, सुशील कुमार शिंदे, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट सहित कई वरिष्ठ एवं युवा नेताओं के नामों की चर्चा होती रही। वैसे, अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के कई नेता प्रियंका के नाम की पहले पैरवी कर चुके हैं।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद 25 मई को हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त उनके इस्तीफे को अस्वीकार करते हुए सीडब्ल्यूसी ने उन्हें पार्टी में आमूलचूल बदलाव के लिए अधिकृत किया था। हालांकि राहुल गांधी अपने रुख पर अड़े रहे और कहा कि न तो वह और न ही गांधी परिवार का कोई दूसरा सदस्य इस जिम्मेदारी को संभालेगा।