अयोग्य घोषित किए गए विधायक रमेश जारकीहोली, रमेश कुम्टाल्ली एवं आर. शंकर।
अयोग्य घोषित किए गए विधायक रमेश जारकीहोली, रमेश कुम्टाल्ली एवं आर. शंकर।

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक में राजनीतिक उठापटक का खेल अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे पर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। रमेश कुमार ने बताया कि निर्दलीय विधायक आर शंकर, कांग्रेस के विधायक रमेश जरकीहोली और महेश कुम्टाल्ली की सदस्यता समाप्त कर दी गई है।

गौरतलब है कि राणीबेन्नूर से विधायक आर शंकर कुमारस्वामी सरकार में निगम प्रशासन मंत्री थे। बाद में उन्होंने सरकार से इस्तीफा दे दिया था और बागी विधायकों के साथ मुंबई चले गए थे। जानकारी के मुताबिक, आर शंकर ने अपनी पार्टी केपीजेपी का कांग्रेस में विलय कर लिया था। हालांकि, बाद में वह सरकार से अलग हो गए।

रमेशकुमार ने बताया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले दलबदल कानून के तहत इन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करेंगे और सुप्रीम कोर्ट ने जो भरोसा उनमें दिखाया है, उसे वह बरकरार रखेंगे।

बता दें कि रमेश कुमार को बागी विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता संबंधी याचिका पर फैसला करना है। उन्होंने कहा कि बागी विधायकों को उनके समक्ष उपस्थित होने का अब और मौका नहीं मिलेगा और अब यह अध्याय बंद हो चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई के आदेश में कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार बागियों के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन बागियों ने विधानसभा में मतदान में भाग नहीं लिया। 3 जजों की पीठ ने यह भी कहा था कि बागियों को सदन में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब उनके इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष ११ जुलाई से लंबित हैं।

विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफों पर फैसला लेने में ज्यादा समय लेने पर बागी विधायकों के शीर्ष अदालत से इसमें दखल के लिए संपर्क किए जाने की संभावना है। बागी विधायकों की अदालत के समक्ष 10 जुलाई की याचिका में विधानसभा अध्यक्ष को तत्काल इस्तीफा स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

भाजपा प्रवक्ता जी मधुसूदन ने कहा, अगर विधानसभा अध्यक्ष व शीर्ष अदालत को फैसले में समय लगता है तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं और विधानसभा को निलंबित रख सकते हैं, तब हम दावा करने की स्थिति में हो सकते हैं और अपने बहुमत पर सरकार बना सकते हैं। अगर बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया जाता है या वे अयोग्य करार दिए जाते हैं तो 15 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 6 महीने के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।

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