उच्चतम न्यायालय
उच्चतम न्यायालय

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) मसौदे में नाम शामिल कराने के लिए दावों और आपत्तियों की आखिरी तारीख बढ़ा दी है। पहले यह तारीख 15 दिसंबर थी, जिसे उच्चतम न्यायालय ने बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2018 कर दिया है। अब असम में एनआरसी मसौदे में नाम जुड़वाने या इस संबंध में कोई आपत्ति दर्ज कराने के लिए लोगों को यह समय और मिल गया है।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को ही पिछली सुनवाई के दौरान असम सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया था कि एनआरसी की इस प्रक्रिया के लिए तारीख बढ़ाई जाए। चूंकि एनआरसी के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) को 1 नवंबर को अंतिम रूप दिया गया था। उस तारीख के बाद लोगों ने एनआरसी के दावे के लिए दस्तावेज जुटाने शुरू किए थे।

बता दें कि असम में सरकारी कर्मचारी पंचायत चुनावों में व्यस्त थे। ऐसे में कई लोगों को अपने दस्तावेज पाने में समय लगा। असम सरकार ने भी उच्चतम न्यायालय में इसका जिक्र किया था। इसे सुनने के बाद न्यायालय ने तारीख बढ़ा दी। एनआरसी मसौदे का प्रकाशन इस साल 30 जुलाई को किया गया था, जिसके बाद भारी राजनीतिक विवाद पैदा हुआ।

मसौदे में करीब 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं थे। हालांकि उस समय अधिकारियों की ओर से यह कई बार बताया गया कि जो भारत के नागरिक हैं, उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं, क्योंकि उनके दावों और आपत्तियों के लिए समय दिया जाएगा। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका काफी विरोध किया। उन्होंने कहा था कि एनआरसी से देश में हालात बिगड़ सकते हैं।

दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इसका पुरजोर समर्थन किया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कई जनसभाओं में कहा था कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह पूरी प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय की निगरानी में है। इसलिए किसी भी नागरिक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। .. अपने नागरिकों की जानकारी रखना हर देश की जिम्मेदारी है ताकि यह ज्ञात रहे कि कितने उसके नागरिक हैं और कितने विदेशी।

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