आक्रामक दिख रहा है स्वाइन फ्लू

सतर्कता जरूरी

स्वाइन फ्लू कोई नई बीमारी नहीं है। पिछले कुछ दिनों से कई मरीज इस बीमारी से ग्रस्त हो चुके हैं और कुछ लोगों की मौत भी हो गई है। डॉक्टरों की मानें तो इस वक्त स्वाइन फ्लू बेमौसम है लेकिन इससे बचाव भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अमूमन सितंबर-अक्टूबर में सक्रिय होकर जनवरी-फरवरी में बेहद हमलावर होने वाला स्वाइन फ्लू इस बार जुलाई से ही आक्रामक दिख रहा है। जुलाई-अगस्त में इसकी यह स्थिति विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि इसके पीछे स्वाइन फ्लू वायरस में म्यूटेशन भी एक वजह हो सकती है। हालांकि, अध्ययन के बाद ही इस संबंध में कोई खुलासा हो पाएगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक स्वाइन फ्लू के प्रभावित पेशंट एक से ज्यादा बीमारियों से ग्रस्त पाए गए हैं। स्वाइन फ्लू के ऐसे संदिग्ध या मरीजों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत रहती है। डायबिटीज, हार्ट, कैंसर, किडनी, एचआईवी/एड्स सहित कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। इसके अलावा बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाओं का भी अधिक ध्यान रखें।डप्य्ंद्म ृय्स्द्य फ्य्द्बय़्द्भ  ध्रू द्बष्ठ्र ृैंत्रद्य सामान्य फ्लू में सर्दी-खांसी की समस्या होती है लेकिन स्वाइन फ्लू में बुखार, हाथ-पैर और कमर में दर्द, सिर दर्द, थकावट आदि लक्षण उभरते हैं। स्वाइन फ्लू और साधारण फ्लू के लक्षणों में काफी समानता है। सामान्य फ्लू में आमतौर पर सर्दी-खांसी होती है, जो शीघ्र ठीक होती है जबकि स्वाइन फ्लू से पीि़डत मरीज ज्यादा तकलीफ होने के साथ ठीक तरह से सांस नहीं ले पाता है।रत स्वाइन फ्लू खांसने, छींकने और संक्रमित वस्तुओं को हाथ लगाने से फैलता है। सामान्यत फ्लू जहां बहुत अधिक खतरनाक नहीं होता। वहीं स्वाइन फ्लू बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है। स्वाइन फ्लू वाले मरीज को देर से उपचार मिलने की सूरत में उसकी हालत बिग़ड सकती है लेकिन आमतौर पर सामान्य फ्लू में ऐसा नहीं होता है।।·र्स्ैंफ्ष्ठ झ्त्रय् घ्ध्ष्ठ?विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के लक्षण भी वैसे ही होते हैं जैसे कि सामान्य फ्लू के। जैसे बुखार, खांसी, गला खराब, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना, थकान आदि। कुछ लोगों को तेज बुखार और उल्टी की शिकायत भी रहती है। इसके लिए ऐंटी-वायरल दवाएं जैसे ओसेल्टामिविर और जानामिविर प्रयोग की जा सकती हैं। यदि बुखार ब़ढता है, तो पैरासीटामोल के साथ इन दवाओं के सेवन से ताप कम किया जा सकता है लेकिन ये दवाएं डॉक्टर की निगरानी में ही लेनी चाहिए। इस रोग के लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि कुछ मामलों में यह मर्ज जानलेवा भी बन चुका है।ॅष्ठफ्ष्ठ द्नर्‍ द्यब् फ्·र्ैंत्रष्ठ ब्स्र ृध्ट्टश्चखांसते व छींकते वक्त अपने मुंह पर टिश्यू पेपर रखें और इस्तेमाल के बाद उसे कू़डेदान में फेंक दें। समय-समय पर साबुन व पानी से अपने हाथ धोते रहें। विशेषकर खांसने व छींकने के बाद। ऐल्कॉहॉल आधारित हैंड क्लीनर भी कारगर होते हैं। अपनी आंख, नाक, मुंह को छुएं नहीं। ऐसा करने से कीटाणु फैलते हैं। बीमार लोगों के ज्यादा नजदीक न जाएं। रोग के लक्षण उभरने के बाद ७ दिनों तक अपने घर में ही रहें या फिर रोग मुक्ति के २४ घंटों बाद ही घर से निकलें। इस तरह आप दूसरे लोगों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं।€द्भय् ब्स् डप्य्ंद्म ध्रू स्वाइन फ्लू का वायरस चार प्रकार (एचएन१, एच१एन२, एच३एन२, एच३एन१) का होता है। इनमें से एच१एन१ बेहद खतरनाक होता है।है आमतौर पर सुअरों के आसपास रहने वाले लोगों को इससे संक्रमित होने का अधिक जोखिम रहता है।्र  ज्यादातर मामलों में यह ७ दिनों के अंदर अपने आप ही ठीक हो जाता है।ट्टश्च बीमार शख्स के जरिये यह दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकता है। ह स्वाइन फ्लू में संक्रमित व्यक्ति एक सप्ताह तक स्वस्थ व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है।।

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