wallet in back pocket
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बेंगलूरु। अगर आप भी पिछली जेब में पर्स रखते हैं तो यह आदत बदल लें, क्योंकि सेहत के लिहाज से ऐसा ठीक नहीं है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे दीर्घकाल में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। प्राय: लोग अपनी पेंट की पिछली जेब में पर्स रखते हैं। यह रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों के लिए ठीक नहीं होता। ऐसा लंबे समय तक करते रहने से न्यूरो संबंधी तकलीफ हो सकती है।

न्यूरो सर्जरी की एक कार्यशाला में देश-विदेश के विभिन्न विशेषज्ञों ने कहा है कि पिछली जेब में पर्स रखने से मांसपेशियों पर धीरे-धीरे दबाव पड़ता है। शुरुआत में हम इसकी परवाह नहीं करते लेकिन लंबे समय तक ऐसा करते रहने से गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। खासतौर पर रीढ़ की हड्डी से जुड़े रोग बहुत तकलीफ दे सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो सकती है।

अगर रीढ़ की हड्डी में थोड़ा भी परिवर्तन हुआ तो व्यक्ति के लिए उठना-बैठना और चलना मुश्किल हो सकता है। ऐसा करते हुए उसे भयंकर दर्द का अहसास होता है। इसलिए अगर आप सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं तो पिछली जेब में पर्स रखने से बचें। ऐसा करना आपको लंबे समय में बीमार बना सकता है। इससे आपको दैनिक कार्य करने में भी काफी परेशानी हो सकती है।

इससे पहले कई शोध यह बता चुके हैं कि पिछली जेब में पर्स रखना सेहत के लिए क्यों ठीक नहीं है। पर्स का आकार जितना ज्यादा मोटा होगा, आपको तकलीफ होने की आशंका उतनी ही ज्यादा होगी। इसलिए पर्स में उतनी ही चीजें रखें जो बहुत आवश्यक हों। पर्स को अलमारी न बनाएं और पिछली जेब में तो बिल्कुल न रखें।

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