सर्दियों में गले की खराश हो जाना एक आम बात है। गले की खराश होने पर काफी तकलीफ भी होती है, इसमें ना तो कुछ खाने का मन करता है और ना ही कुछ पीने का। गले की खराश बुखार होने का भी लक्षण होता है। जब भी आप बाहर निकलें तो हमेशा गले में मफलर बांध कर रखें और कानों को ढंक कर चलें। गले में होने वाली खराश अन्य बीमारियों की तरह लंबे समय तक नहीं रहती, लेकिन कुछ ही दिनों में यह आपको पूरी तरह से प्रभावित कर बीमार कर देती हैं। ंद्म घ्र्‍ज्ह्र ·र्ैंह् द्म क्वय्ॅैंगले में खराश मूल रूप से तब होती है जब गले की नाजुक अंदरूनी परत वायरस/बैक्टीरिया से संक्रमित होती है, जिसके परिणामस्वरूप सूजन, स्राव खांसी और शरीर के सामान्य संक्रमण के प्रभाव के लक्षण होते हैं। इस दौरान रुखा भोजन, सुपारी, खटाई, मछली, उ़डद इन चीजों से परहेज करें। च्चय्द्यष्ठध्रू द्मरुडक्वष्ठ१. हर २ घंटे गर्म पानी में नमक डालकार गरारा करें क्योंकि गर्म पानी और नमक एंटीसेप्टिक होने के नाते संक्रमण को कम करने में मदद करता है।२. भोजन के बाद चुटकी भर काली मिर्च को एक चम्मच घी में मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला और रुकी हुई आवाज साफ हो जाती है।३. एक कप पानी में ४-५ कालीमिर्च एवं तुलसी की ५ पत्तियों को उबालकर का़ढा बना लें और इसे धीरे-धीरे चुसकी लेकर पीएं।४. प्यास लगने पर केवल गुनगुना पानी ही पीएं।५. कालीमिर्च को २ बादाम के साथ पीसकर सेवन करने से गले के रोग दूर हो सकते हैं।६. अदरक की चाय भी गले की खराश में बहुत लाभदायक है।७. दूध में थो़डी सी हल्दी डालकर इसे उबाल लें और बिस्तर पर जाने से पहले इसे पीएं।

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