औषधीय गुण है अश्वगंधा

यह एक प्राकृतिक बूटी है किंतु अब, जब से प्राकृतिक तथा आयुर्वेद में लोग रुचि लेने लगे हैं, इसको यत्न के साथ उगाते भी हैं। इस पौधे में तीन विभिन्न क्षार भी रहते हैं। पौधे को समूचे तौर पर काम में लाते हैं। यहां तक कि ज़डका भी काफी उपयोग होता है। इस पौधे में उपलब्ध औषधीय गुण देख कर जो संभव व सरल उपचार हैं, उन्हें जानिए :-* यदि कोई शोध और गला ग्रन्थि से पीि़डत हो तो गाय के पेशाब में इसे घोल लें। फिर हल्का सा गर्म करें। इसका लेप किया करें। आराम आने लगेगा।* यदि कोई व्यक्ति धातु रोगों से घिर जाए तो वह अश्वगंधा से आराम पा सकता है।* आदतें बिग़ड जाने या विचार भ्रष्ट हो जाने से स्वप्न दोष होते रहना आम बात है। अश्वगंधा, जायफल, छोटी इलायची, विधारा लें। साथ ही आप इकट्ठी करें त्रिफला, वंश लोचन, लाजवन्ती। फिर लें गौरव शताबरी तथा कौच के बीज। सभी की मात्रा १०-१० ग्राम। एक-एक करके या इकट्ठी कूटें तथा छानें। जितना चूर्ण बने, उतनी मिश्री लें। मिश्री भी बारीक कूट कर सब को मिलाएं। गाय के दूध के साथ दिन में दो बार रोगी खाया करें। मात्रा एक समय ५ ग्राम। चूर्ण खत्म होते-होते रोगी को आराम मिलेगा।* प्रदर रोग हो जाने पर अश्वगंधा चूर्ण १ चम्मच चीनी के साथ मिलाकर गाय के दूध के साथ दिन में दो बार लें।* कुछ उपचारों में अश्वगंधा की ज़ड भी इस्तेमाल कर रोग मुक्ति पाई जाती है।* यदि कोई व्यक्ति पूर्ण स्वस्थ रहना चाहे तथा रोगों को अपने से दूर रखना चाहे तो उसे रोग प्रतिरोधक शक्ति की आवश्यकता होती है। इसके लिए प्रतिदिन गाय के दूध के साथ एक बार अथवा दो बार (सुबह-शाम) अश्वगंधा लें। मात्रा ५ ग्राम। अच्छा टॉनिक साबित होगा।

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