बेंगलूरु/दक्षिण भारत
स्थानीय गुरु दिवाकर केवल कमला वर्षावास समिति के तत्वावधान में वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में मंगलवार से साध्वी डॉ.कुमुदलताजी की निश्रा में पर्वाधिराज पर्व पर्युषण का शुभारंभ हुआ। अपने प्रवचन में ‘पर्युषण वेलकम-हिंसा करें कम’ विषय पर साध्वीश्री ने कहा कि प्रभु महावीर द्वारा दिए गए संदेश के तहत पर्युषण में भोगों से मुक्त होकर योगों में डुबकी लगानी है। पर्युषण पर्व जैन धर्म के लोगों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व बुरे कर्मों का नाश करके हमें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान महावीर के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर हमें निरंतर और खासकर पर्युषण के दिनों में आत्मसाधना में लीन होकर धर्म के बताए गए रास्ते पर चलना चाहिए्। उन्होंने कहा कि अष्ट दिवसीय इस पर्व के दिनों में तपस्या करने, प्रवचन-मांगलिक सुनने, पौषध करने तथा दान-धर्म करने से अनंत पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि आत्मा की सफाई के लिए सामायिक, उपवास, तेला व आठ दिनों तक प्रतिक्रमण इत्यादि तपक्रियाएं करनी चाहिए्।


साध्वीश्री ने जिंदगी में हिंसा को कम करके अहिंसा के दीपक को प्रज्ज्वलित करने की अनूठी प्रेरणा दी। उन्होंने कहा अहिंसा का यह दीपक आठ दिनों तक तो जलना ही चाहिए्। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति कायम हो इसके लिए अनेक हिंसात्मक उत्पादों के प्रयोग नहीं करने, बुराइयों-दुर्व्यसनों को त्यागने की प्रतिज्ञा व संकल्प भी दिलाया। कुमुदलताजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से प्रत्येक जीव के प्रति दयाभाव के साथ हृदय से क्षमा मांगने व क्षमा करने की सीख देते हुए जीवन को सुंदर, पवित्र एवं पावन बनाने की भी सीख दी। साध्वीश्री महाप्रज्ञाजी ने गीतिकाओं के माध्यम से पर्व पर्युषण में मैत्री की पावन गंगा में पापों को धोने की बात कही। साध्वी डॉ.पद्मकीर्तिजी ने अंतकृतदशांगसूत्र व कल्पसूत्र का विस्तारपूर्वक वाचन करते हुए अनेक प्रसंग बतलाए। साध्वीश्री राजकीर्तिजी ने स्तवन प्रस्तुत किया। डॉ.कुमुदलताजी ने दिव्य मांगलिक प्रदान की।
समिति के महामंत्री चेतन दरड़ा ने बताया कि साध्वीवृंद की प्रेरणा से अष्ट दिवसीय अखण्ड नवकार मंत्र जाप भी गुरु दिवाकर दरबार में प्रारंभ हुआ। धर्मसभा का संचालन अशोककुमार गादिया ने किया। सभी का आभार समिति के सहकोषाध्यक्ष रमेश सिसोदिया ने जताया।