कल्पसूत्र का श्रवण भागवत की तरह महामंगलकारी : संत ललितप्रभ

  • केन्द्रीय मंत्री अनंतकुमार ने लिया संतों से आशीर्वाद

बेंगलूरु। पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर रविवार को महोपाध्याय श्री ललितप्रभसागरजी, दार्शनिक संत चन्द्रप्रभजी और मुनि शांतिप्रियसागरजी के सान्निध्य में सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ कल्पसूत्र और अंतगड़दशांग आगमों की भव्य शोभायात्रा दादावाड़ी से मराठा हॉस्टल मैदान तक निकाली गई जो मैदान पहुँचने पर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। सत्संगपे्रमियों द्वारा जयकारों के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया गया। श्रुत लाभार्थी पन्नालाल पुखराज कवाड़ परिवार ने संतों को आगम शास्त्र समर्पित करने का लाभ लिया। इस अवसर पर राष्ट्र-संत महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि कल्पसूत्र और अंतगड़दशांग आगम ये दोनों शास्त्र श्रीमद्भाग्वत की तरह महामंगलकारी है। इनका भावभक्ति पूर्वक श्रवण करने से व्यक्ति की सातों नरक टल जाती है और वह शीघ्र ही शांति, सिद्धि और मुक्ति को प्राप्त करता है। कल्पसूत्र का विवेचन करते हुए संतश्री ने कहा कि पर्युषण पर्व में हमें गरिष्ठ भोजन का त्याग, पंचव्रतों का पालन, अनावश्यक परिग्रह पर अंकुश, पापों का पायश्चित, आत्मचिंतन, विनम्रता-क्षमा को धारणकर और अंतिम तीन दिन उपवास कर संवत्सरी का प्रतिक्रमण करना चाहिए। संतश्री ने कहा कि आप संत नहीं बन सकते तो क्या हुआ, पर परिग्रह पर अंकुश तो लगा ही सकते हैं ।

दिव्य सत्संग का शुभारम्भ केन्द्रीय मंत्री अनंतकुमार, संस्था के मंत्री संघवी कुशलराज गुलेछा, पुलिस इंस्पेक्टर जोसफ ने दीप प्रज्जवलन कर किया। संघ के प्रवक्ता अरविंद कोठारी ने बताया कि सोमवार को प्रातः 9 बजे संत ललितप्रभजी “भगवान महावीर का दिव्य जीवन एवं पूर्व भव’ विषय पर प्रवचन देंगे।

LEAVE A REPLY

two × 4 =