मालूर-बेंगलूरु रोड पर कोडीहल्ली स्थित न्यू आक्सफोर्ड स्कूल सभागार में सोमवार को कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य लहरसिंह सिरोया, तेरापंथ ट्रस्ट के अध्यक्ष बहादुर सेठिया, तुलसी चेतना केंद्र के संगठन मंत्री ललित मांडोत व सामाजिक कार्यकर्ता नरेन्द्र मांडोत ने आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन किए।
मालूर-बेंगलूरु रोड पर कोडीहल्ली स्थित न्यू आक्सफोर्ड स्कूल सभागार में सोमवार को कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य लहरसिंह सिरोया, तेरापंथ ट्रस्ट के अध्यक्ष बहादुर सेठिया, तुलसी चेतना केंद्र के संगठन मंत्री ललित मांडोत व सामाजिक कार्यकर्ता नरेन्द्र मांडोत ने आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन किए।

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। व्यक्ति के मन में यदा-कदा संकल्प विकल्प उभरते रहते हैं। ये संकल्प या विकल्प राग-द्वेष की भावना से प्रेरित होते हैं तथा उससे युक्त होते हैं । राग-द्वेष की भावना व्यक्ति के जीवन को गर्त की ओर ले जाने वाली हो सकती है। जो व्यक्ति समता में स्थित हो जाता है, उसके ऐसे संकल्पों और विकल्पों का नाश हो सकता है।

जो मनुष्य हर स्थिति में सम रहने वाला बन जाता है, वह राग-द्वेष के संकल्पों और विकल्पों से मुक्त हो जाता है। व्यक्ति के चिन्तन में कभी रागात्मकता आ जाती है तो कभी द्वेषात्मकता भी आ सकती है। परम सुख की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति की आत्मा राग-द्वेष मुक्त अवस्था में स्थित हो जाए।

यह विचार आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बेंगलूरु की ओर विहार करते हुए सोमवार को कोडीहल्ली स्थित न्यू आक्सफोर्ड स्कूल सभागार में व्यक्त किए। आचार्यश्री ने कहा कि राग-द्वेष से मुक्ति के लिए व्यक्ति को समता की साधना करने का प्रयास करना चाहिए। व्यक्ति को कष्टों में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उससे निकलने का प्रयास करना चाहिए। जो व्यक्ति कठिनाइयों को झेल ले और सुख-दुःख दोनों परिस्थितियों में अपने आपको सम भाव में रख ले, उसके जीवन में सुख और शांति का वास हो सकता है।

समता की साधना सेवा की भावना से और अधिक पुष्ट होती है। कठिनाइयों में भी समता और मैत्री का भाव रखने वाला व्यक्ति महापुरुष होता है। अभय का भाव भी समता की साधना से पुष्ट हो सकता है। समता को मानव जीवन का सुरक्षा कवच मान लिया तो व्यक्ति को अपने जीवन में सुरक्षा कवच रूपी समता की साधना करने का प्रयास करना चाहिए।

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