बेंगलूरु के सुसवाणी माता भक्त मंडल के सदस्यों ने रविवार को बंगारपेट में विराजित तेरापंथ आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।
बेंगलूरु के सुसवाणी माता भक्त मंडल के सदस्यों ने रविवार को बंगारपेट में विराजित तेरापंथ आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।

बंगारपेट/दक्षिण भारत। तेरापंथ के ग्यारहवें आचार्यश्री महाश्रमणजी रविवार को विहार करते हुए बंगारपेट में स्थित दि जैन इंटरनेशनल स्कूल पहुंचे जहां स्कूल से प्रबन्धन से जु़डे लोगों ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया। स्कूल परिसर में बने हॉल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने संबोधित करते हुए कहा कि आदमी के जीवन में शिक्षा का बहुत महत्त्व होता है। शिक्षा प्राप्ति के लिए ग्राह्य(ग्रहण करने वाली) बुद्धि का होना बहुत आवश्यक होता है। इसके साथ परिश्रम और अभ्यास भी हो तो ज्ञानार्जन के क्षेत्र में अच्छा विकास किया जा सकता है।

आदमी के पास ग्राह्य बुद्धि हो और वह परिश्रमी न हो, पढ़ लेने के बाद उसका अभ्यास न करे तो वह भला ज्ञान के क्षेत्र में कितना विकास कर सकता है। कोई व्यक्ति परिश्रमी भले हो, अभ्यास कर ले पर उसके पास ग्राहक बुद्धि न हो तो वह भी ज्ञान के क्षेत्र में उतना विकास नहीं कर सकता, इसलिए ज्ञानार्जन के क्षेत्र में ग्राह्य बुद्धि जो ज्ञान ग्रहण करने के लिए हमेशा तत्पर रहे और अभ्यास जिसके माध्यम से ज्ञान और पुष्ट बनाया जा सकता है। बुद्धि का विकास ज्ञानावरणीय कर्म क्षयोपशम से होता है। इसलिए किसी में ज्यादा ग्राह्य बुद्धि होती है तो किसी में कम बुद्धि होती है।

बुद्धि कभी अशुद्ध भी हो सकती है। गलत विचार से बुद्धि खराब भी हो सकती है। बुद्धि द्वारा ज्ञानार्जन किया जा सकता है, किसी समस्या का समाधान किया जा सकता है तो खराब बुद्धि द्वारा किसी का अहित भी किया जा सकता है। कोई समस्या पैदा भी की जा सकती है। आचार्यश्री ने कहा कि शुद्ध बुद्धि संपदा प्रदान करने वाली होती है, विपत्तियों को रोक सकती है और बुद्धि के भविष्य का ज्ञान हो जाए तो भविष्य की घटना आदि से भी बचा जा सकता है। संस्कारों से युक्त शुद्ध बुद्धि कल्याणकारी हो सकती है। अहंकार, प्रमाद, बीमारी व आलस्य ज्ञान के बाधक हैं। आदमी को इससे बचते हुए ज्ञानार्जन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री ने जैन स्कूल में पदार्पण के संदर्भ में स्कूल और बच्चों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। बालिका जिया शर्मा ने आचार्यश्री का अंग्रेजी में जीवन परिचय प्रस्तुत किया। स्कूल के ट्रस्टी स्थानथकवासी संप्रदाय के महेन्द्र मुणोत ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। नवनीत कुकुल व बालिका तन्वी कुकुल ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। बंगारपेट महिला मंडल व बांठिया परिजनों ने गीत के माध्यम से आचार्यश्री के समक्ष अभ्यर्थना की।

LEAVE A REPLY

three + two =