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                <title>राजनीति - Dakshin Bharat Rashtramat</title>
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                <title>शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हुए</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: @ShivsenaUBTComm X account
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76694/6-shiv-sena-ubt-mps-did-not-attend-the-party"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/shiv-sena-ubt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत।</strong> शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इससे संकेत मिलता है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में उनका औपचारिक रूप से शामिल होना तय है। </p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ने बैठक में हिस्सा लिया। साथ ही, पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद संजय राउत भी मौजूद थे। बाकी छह सांसदों की गैर-मौजूदगी ने पार्टी के संसदीय खेमे में फूट की बात लगभग पक्की कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों में नागेश अष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिम्बलकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। <br /> <br />सूत्रों के मुताबिक, सभी छह बागी सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मांग करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, क्योंकि माना जा रहा है कि बिरला का कार्यालय वेरिफिकेशन के लिए कुछ सांसदों की व्यक्तिगत उपस्थिति चाहता है और आने वाले दिनों में ऐसा होने की उम्मीद है।<br /> <br />सूत्रों ने बताया कि अभी हस्ताक्षरों की जांच चल रही है। बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया, जिसमें उन्हें गुरुवार सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया गया। इस कदम का मकसद बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की संभावित कार्रवाई का रास्ता साफ करना था।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद हैं और दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा।<br /> <br />बैठक से पहले सावंत ने पत्रकारों से कहा, 'पार्टी प्रमुख (उद्धव ठाकरे) से सलाह-मशविरे के बाद व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:14:14 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी की इजराइल के प्रति अंधभक्ति हमारे देश को बहुत महंगी पड़ रही है: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: IndianNationalCongress FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76693/modis-blind-devotion-towards-israel-is-costing-our-country-dearly"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2022-12/congress2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद गुरुवार को कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि 'इस्लामाबाद एमओयू' कहे जा रहे इस समझौते से पाकिस्तान की नई क्षेत्रीय हैसियत और वैश्विक प्रभाव का पता चलता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति के तौर-तरीकों और मूल भावना, दोनों के लिए एक 'बड़ा झटका' है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्री इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। सच यह है कि इसे इस्लामाबाद एमओयू कहा जा रहा है, जो पाकिस्तान की नई क्षेत्रीय हैसियत और वैश्विक प्रभाव को दिखाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह वही पाकिस्तान है, जिसे नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर दिया था। यह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की विषयवस्तु और शैली, दोनों के लिए गंभीर झटका है। पाकिस्तान अब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक और सुरक्षा संरचना में और अधिक गहराई से शामिल हो गया है, जिसके भारत के लिए गंभीर और बड़े निहितार्थ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा कि यदि एमओयू शब्दों और भावना, दोनों में कायम रहता है, तो यह एक बड़ी प्रगति है। लेकिन इसमें दोनों पक्षों के लिए 'गलतफहमी का ज्ञापन' बनने की भी आशंका है। फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि अगले 60 दिन बेहद महत्त्वपूर्ण होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा कि एमओयू में ईरान के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण और कुछ अप्रत्याशित लाभ भी हैं। ईरान ने अपना प्रतिरोध और जुझारूपन दिखाया है। जीसीसी देशों ने, जिन्होंने ईरान के जवाबी हमलों का पूरा भार झेला है, सावधानी के साथ एमओयू का स्वागत किया है, लेकिन वे निस्संदेह दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों पर फिर से विचार करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा कि यह एमओयू इजराइल के प्रधानमंत्री के लिए निश्चित हार है, हालांकि वे अभी भी इसे अलग-अलग तरीकों से पटरी से उतार सकते हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं, यहां तक कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी उनके प्रति अपने गुस्से और निराशा को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया है। केवल प्रधानमंत्री मोदी इस क्षेत्र में नेतन्याहू की कार्रवाइयों - जिनमें लेबनान, गाजा और कब्जे वाला वेस्ट बैंक शामिल हैं - के समर्थन में दृढ़ बने हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल के प्रति यह अंधभक्ति हमारे देश को बहुत महंगी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा कि यह एमओयू अमेरिका के लिए गंभीर झटका है, जिसने इजराइल के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़े लक्ष्यों के साथ युद्ध शुरू किया था, जो बिल्कुल भी पूरे नहीं हुए। सैन्य शक्ति की सीमाएं एक बार फिर उजागर हो गई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का लगातार तुष्टीकरण - जिसका ताजा प्रमाण कल रात हुई ट्रंप-मोदी द्विपक्षीय बैठक पर विदेश मंत्रालय का बयान - शर्मनाक और वास्तव में राष्ट्र-विरोधी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:45:28 +0530</pubDate>
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                <title>शिवसेना (यूबीटी) के कितने सांसद बागी? आज साफ होगी तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: UddhavBalasahebThackeray FB page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76692/how-many-mps-of-shiv-sena-ubt-have-rebelled-the"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2024-06/uddhav-thackeray.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दक्षिण भारत। </strong>नई दिल्ली में गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की एक अहम बैठक होगी। इस बैठक में यह तय होगा कि बागी सांसदों की अलग गुट बनाने की कोशिश कामयाब होगी या नहीं। यह बैठक सांसदों को इसमें शामिल होने का व्हिप जारी किए जाने के ठीक एक दिन बाद हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह कदम तब उठाया गया जब ऐसी अटकलें तेज़ हो गईं कि बागी शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद लोकसभा में एक अलग गुट बनाने और बाद में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने बुधवार को अपने सांसदों के लिए एक व्हिप जारी किया। इसमें उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया गया है, ताकि बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई का रास्ता साफ करने के लिए अहम मुद्दों पर चर्चा की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक गुरुवार को सुबह 11 बजे संसद परिसर में पार्टी के कार्यालय में होगी। लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद हैं और एक अलग गुट बनाने के लिए उनमें से कम से कम दो-तिहाई सांसदों की ज़रूरत होगी। अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत के अलावा, जिन्होंने उद्धव गुट को समर्थन देने का वादा किया है, बाकी छह सांसद संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टिकर और संजय जाधव हैं। अगर बागी गुट का एक भी सांसद बैठक में शामिल होता है, तो इसे अलग गुट के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती।<br /> <br />सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया है कि वे पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी 'अलग हुए' गुट को मान्यता न दें।<br /> <br />सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते संकट के बीच खबर है कि शिवसेना (यूबीटी) के बागी नेताओं के एक समूह ने बुधवार को बिरला से अनौपचारिक रूप से मुलाकात की और निचले सदन में पार्टी के नौ में से छह सांसदों का समर्थन होने का दावा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार को दिल्ली में होने वाली अहम बैठक से कानूनी और व्यावहारिक रूप से यह तय होगा कि उद्धव ठाकरे की संसदीय ताकत बनी रहेगी या उन्हें पार्टी में एक और ज़बरदस्त बंटवारे का सामना करना पड़ेगा। यह बंटवारा साल 2006 में राज ठाकरे के शिवसेना से अलग होने के बाद तीसरा बंटवारा होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) के सूत्रों ने बताया कि विरोधी खेमे के पास अभी भी छह सांसदों का समर्थन नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 10:38:43 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान ने युद्ध समाप्त करने के प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: WhiteHouse FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76691/us-iran-sign-preliminary-agreement-to-end-war"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/donald-trump1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन/एपी। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बुधवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत तेहरान अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को कम करेगा और इसके बदले उसे अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी, जिससे ईरान बिना किसी रोक के अपना तेल बेच सकेगा। अमेरिका और ईरान ने यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों देशों के नेताओं द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद युद्ध समाप्त करने संबंधी यह प्रारंभिक समझौता ‘तत्काल प्रभाव’ से लागू हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते में स्थायी रूप से संघर्ष समाप्त करने की बात कही गई है। इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिन की वार्ता अवधि शुरू हो गई है। हालांकि, ट्रंप ने दोबारा हमला शुरू करने का विकल्प खुला रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा प्रतीत होता है कि समझौते के तहत ईरान को शुरुआत में ही कई बड़े लाभ दिए गए हैं, जबकि बदले में उससे बहुत कम हासिल किया गया है। यह समझौता कई दिनों से गोपनीयता और भ्रम की स्थिति में घिरा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी अधिकारियों ने सप्ताहांत में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा इस समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी देने के बाद भी इसकी शर्तों का खुलासा करने से इनकार कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय महल में रात्रिभोज के दौरान समझौते की कागजी प्रति पर हस्ताक्षर किए। वर्साय में पहले भी युद्ध या क्षेत्रीय विवाद समाप्त करने वाले कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर समारोह आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान की ओर से परस्पर विरोधी जानकारी सामने आने के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है कि समारोह होगा या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने फ्रांस में जी7 के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद वर्साय में आयोजित रात्रिभोज से निकलते समय कहा, ‘इस पर हस्ताक्षर हो गए हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘व्हाइट हाउस’ के एक सहयोगी द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए वीडियो में मैक्रों के बगल में बैठे हुए ट्रंप समझौते की कागजी प्रति पर हस्ताक्षर करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को दस्तावेज और कलम सौंप दिए तथा कमरे में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैक्रों की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के अनुसार, ट्रंप ने हस्ताक्षर करने से ठीक पहले कहा, ‘यह आसान नहीं था।’</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने तेहरान में समझौते पर हस्ताक्षर किए। एजेंसी ने ट्रंप और पेजेश्कियन के हस्ताक्षर वाला समझौता दिखाते हुए ईरानी राष्ट्रपति की तस्वीरें भी जारी कीं जिसमें वह ‘गंभीर मुद्रा में’ नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते का आधिकारिक पाठ अब तक जारी नहीं किया गया है। कई दिनों तक इसे गोपनीय रखे जाने के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर पत्रकारों को इसके मसौदे के बारे में जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद ईरान के सरकारी टेलीविजन ने भी समझौते का एक पाठ जारी किया जो काफी हद तक अमेरिका की ओर से जारी जानकारी के अनुरूप था।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते के अधिकतर प्रावधानों के तहत युद्ध से पहले की स्थिति बहाल होगी। इनमें युद्ध समाप्त करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फिर शुरू करना तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना शामिल है। दुनिया में तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग के बंद होने से बड़ा ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के मसौदों के अनुसार, समझौते के तहत जलडमरूमध्य को दो महीने के लिए खोला जाएगा और इस दौरान कोई शुल्क नहीं लगेगा लेकिन भविष्य में शुल्क लगाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बदले अमेरिका ईरान के खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों में से कुछ से छूट देने की दिशा में कदम उठाएगा लेकिन उन्हें समाप्त नहीं करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते में चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला के खिलाफ इजराइल के हमले के बीच लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 10:07:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संजय राउत ने शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को 50 करोड़ रु. का प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: sanjay___raut Instagram account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76689/sanjay-raut-alleges-shiv-sena-ubt-mps-being-lured-with"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/sanjay-raut1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/भाषा। </strong>उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में फूट पड़ने की अटकलें तेज होने के बीच पार्टी नेता संजय राउत ने बुधवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए ‘50 करोड़ रुपए’ की पेशकश की जा रही है और उन्होंने बागी सांसदों को पार्टी छोड़ने से पहले इस्तीफा देने की चुनौती भी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने, साल 2022 में हुई नेताओं की बगावत का नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान जिक्र करते हुए कहा कि अगर पार्टी में फिर उसी तरह फूट डाली गई तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (उबाठा) के सांसद चुप नहीं बैठेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संवाददाता सम्मेलन में शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन- अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि एक ‘महत्त्वपूर्ण व्यक्ति’ ने मंगलवार देर रात उन्हें बताया कि महाराष्ट्र के सांसदों को ‘खरीदने’ की कोशिश की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘मुझे बताया गया कि कीमत 50 करोड़ रुपए है और रात तक प्रत्येक सांसद को 15-15 करोड़ रुपए पहुंचाए जाने थे। वे धन मिले बिना विमान में सवार होने को कथित रूप से तैयार नहीं थे।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने हालांकि कहा कि पार्टी के पास किसी तरह की फूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और कुछ सांसदों के अलग होने की खबरें मीडिया के जरिये मिल रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘अगर दलों को इस तरह तोड़ा जाता है तो चुनाव लड़ने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि संबंधित सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना (उबाठा) के ‘मशाल’ चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए हैं और ‘किसी को भी उस जनादेश से विश्वासघात करने का अधिकार नहीं है।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर साल 2022 में अविभाजित शिवसेना में हुई फूट जैसी घटना दोहराई गई तो महाराष्ट्र और शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘अगर कोई पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए। वे हमारी पार्टी के टिकट पर और मतदाताओं द्वारा चुने जाने के कारण संसद पहुंचे हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पार्टी ने कानूनी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और बृहस्पतिवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक के लिए ‘व्हिप’ जारी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उनसे संविधान के प्रावधानों के अनुरूप सख्ती से कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सावंत ने कहा कि किसी भी सांसद ने पार्टी छोड़ने के फैसले के बारे में आधिकारिक रूप से सूचित नहीं किया है और सभी खबरें मीडिया एवं सोशल मीडिया के जरिये सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देसाई ने कहा कि पार्टी को अपने सांसदों पर अब भी पूरा भरोसा है लेकिन एहतियात के तौर पर कानूनी उपाय किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (उबाठा) नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को ‘खरीदने और दलों को तोड़ने’ की प्रवृत्ति लोकतंत्र तथा संविधान के लिए खतरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">तीनों नेताओं ने कहा, ‘हमारे पास किसी तरह की फूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। हमें ये खबरें मीडिया से मिल रही हैं और हम उन्हीं पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने उद्धव ठाकरे के साथ रविवार को हुई शिवसेना (उबाठा) सांसदों की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि एक सांसद ने चार बार साईं बाबा की कसम खाई, दूसरे ने देवी भवानी के नाम पर शपथ ली तथा बाकियों ने अपने बच्चों और माताओं की कसम खाकर कहा कि वे हमारे साथ बने रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘हमने इन सांसदों के लिए खून-पसीना बहाया है। हमने उन्हें टिकट दिया और अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक मदद भी की।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि ये सांसद उद्धव बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के कारण निर्वाचित हुए हैं न कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कारण।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘हमने ‘व्हिप’ जारी कर संसदीय दल की बैठक बुलाई है। हमने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखा है। निर्वाचित प्रतिनिधियों को खरीदना और दलों को तोड़ना लोकतंत्र तथा संविधान के विरुद्ध है।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि इसके बाद कानूनी लड़ाई होगी और यह इतना आसान नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अगर कोई सोचता है कि कुछ लोग एकत्र होकर धन के जरिए मामला निपटा सकते हैं तो वह गलतफहमी में है।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने धाराशिव के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर पर दबाव डाले जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सांसद के पिता की हत्या के 20 साल पुराने मामले में बुधवार को फैसला सुनाया जाना था।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘उनसे कथित तौर पर कहा गया कि अगर वह अपने पिता की हत्या के मामले में अपने पक्ष में फैसला चाहते हैं तो उन्हें उनके गुट में शामिल हो जाना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब इस मामले में शनिवार को फैसला सुनाए जाने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘अगर ऐसा हो रहा है तो संविधान, अदालतों और लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है? बृहस्पतिवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। सभी को आमंत्रित किया गया है और सभी को बैठक में शामिल होना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा, ‘पार्टी ने हमें जो कुछ दिया है, उसे हम भूल नहीं सकते। बालासाहेब ठाकरे ने हमें बेटों की तरह माना और उद्धव ठाकरे ने हमेशा भाइयों जैसा व्यवहार किया।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शिवसेना (यूबीटी) में बगावत की चर्चा पर राउत बोले- 'अगर वफ़ादारी बदलनी है तो इस्तीफ़ा दें'</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: sanjayraut.official FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76688/on-the-discussion-of-rebellion-in-shiv-sena-ubt-raut"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/sanjay-raut.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दक्षिण भारत।</strong> शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बुधवार को बागी सांसदों को चुनौती दी कि अगर वे पाला बदलना चाहते हैं तो पार्टी छोड़ दें। यह बयान उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी में जल्द ही फूट पड़ने की बढ़ती अटकलों के बीच आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राउत ने कहा कि अगर पार्टी में फिर से फूट पड़ती है, तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह बात साल 2022 में हुई बगावत के संदर्भ में कही।</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन - अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे - ही राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने बागी नेताओं से कहा, 'उद्धव ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने सांसदों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। अगर आप पाला बदलना चाहते हैं तो इस्तीफा दे दें।'</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, राज्यसभा सदस्य ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के पास अभी भी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।<br /> <br />उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को 15 करोड़ रुपए में खरीदा जा रहा है। राउत ने कहा कि अगर तृणकां और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियां बंट जाती हैं तो चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>'इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं'</strong></p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में दलबदल कराने की किसी भी कथित कोशिश से उनकी पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बावनकुले ने नागपुर में कहा, 'मुझे 'ऑपरेशन टाइगर' के बारे में कोई जानकारी नहीं है।' उन्होंने कहा, 'चूंकि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं होगा।'</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा की मिलीभगत के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, 'इससे भाजपा का क्या लेना-देना है? हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमें नहीं पता कि 'ऑपरेशन टाइगर' क्या है, इसे कौन लाया और क्यों लाया गया; हमें यह भी नहीं पता। भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है: अरविंद केजरीवाल</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: @ArvindKejriwal X account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76687/center-has-no-intention-of-stopping-paper-leak-arvind-kejriwal"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-02/arvind-kejriwal1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को 'बेतुका' बताया और दावा किया कि सरकार का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि सरकार ने मंगलवार को 21 जून को होने वाले नीट-यूजी 2026 रीटेस्ट से पहले टेलीग्राम के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि यह कदम नकल कराने वाले रैकेट और गलत जानकारी से निपटने के लिए उठाया गया है।<br /> <br />एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने कहा कि 22 जून तक टेलीग्राम पर लगाई गई रोक, इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिशों का हिस्सा है कि दोबारा परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के हो।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फ़ैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में सरकार की रणनीति की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए।</p>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल ने कहा, 'मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है। इसीलिए ऐसे अजीबोगरीब कदम उठाए जा रहे हैं - जैसे सेना के विमान से पेपर ले जाना और टेलीग्राम को बंद करना। क्या इन कदमों से पेपर लीक रुकेंगे? बिल्कुल नहीं।'</p>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के नेता ने आगे आरोप लगाया कि पेपर लीक एक संगठित वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक का धंधा कई अरब रुपयों का रैकेट है। इसका पैसा ऊपर तक जाता है। अगर पेपर लीक रुक जाएं, तो विधायकों/सांसदों को खरीदने के लिए पैसा कहां से आएगा?'<br /> <br />परीक्षा रद्द होने के बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा के लिए सुरक्षा उपायों की कड़ी जांच-पड़ताल हो रही है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जहां एनटीए का कहना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए संचार माध्यमों को रोकना और सैन्य परिवहन का इस्तेमाल करना ज़रूरी है, वहीं विपक्षी नेताओं का तर्क है कि इन कदमों से पेपर लीक के पीछे के मुख्य नेटवर्क का पता नहीं चल पाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:52:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों को बैठक में शामिल होने के लिए व्हिप जारी किया</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: UddhavBalasahebThackeray FB page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76686/shiv-sena-ubt-issues-whip-to-its-mps-to-attend"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-02/uddhav-thackeray.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दक्षिण भारत।</strong> उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी में जल्द ही बगावत होने की अटकलों के बीच, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों को 'महत्त्वपूर्ण मुद्दों' पर चर्चा के लिए नई दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल होने का व्हिप जारी किया है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पार्टी बैठक में शामिल न होने वालों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पार्टी ने सन् 2022 में भी ऐसा ही व्हिप जारी किया था, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई में 39 विधायकों ने शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। उसके बाद उन्हें अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को सूत्रों ने बताया कि विपक्षी पार्टी शिवसेना (यूबीटी) संकट का सामना कर रही है, क्योंकि उसके नौ लोकसभा सांसदों में से 'छह से सात' सांसद शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने का मन बना चुके हैं और राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाले हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>'अलग हुए' गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया </strong></p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपील की है कि वे पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी 'अलग हुए' गुट को मान्यता न दें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कार्यकर्ता परेशान </strong></p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में परभणी, हिंगोली और धाराशिव लोकसभा क्षेत्रों में शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता पार्टी के भीतर वफादारी बदलने की अटकलों के बीच घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संभावित दलबदल की चर्चाओं के ज़ोर पकड़ने के साथ ही माहौल में उत्सुकता और बेचैनी देखी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, हिंगोली में पार्टी कार्यकर्ताओं ने इन अटकलों को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि उनके सांसद नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के साथ ही बने रहेंगे और पाला बदलने का कोई फैसला नहीं करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:34:57 +0530</pubDate>
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                <title>तृणकां के दोनों गुटों के बारे में फ़ैसला लेने से पहले यह कदम उठाएंगे लोकसभा अध्यक्ष?</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: AITCofficial FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76681/lok-sabha-speaker-will-take-these-steps-before-taking-decision"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2022-12/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, अलग हुए गुट को मान्यता देने का फ़ैसला करने से पहले, पाला बदलने वाले तृणकां सांसदों और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, दोनों की बात सुनेंगे। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट — जो अब बहुत छोटा रह गया है — को भी एक ईमेल भेजकर उनकी राय मांगी है।<br /> <br />इससे पहले, सूत्रों ने बताया कि 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' (एनसीपीआई) - जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं - के साथ प्रस्तावित विलय के बाद, अलग गुट के तौर पर मान्यता पाने की नेताओं की मांग पर बिरला कानूनी राय ले सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि गुट की मांग पर कोई भी फ़ैसला संसद के मॉनसून सत्र से पहले लिया जाएगा, जो आम तौर पर जुलाई के तीसरे हफ़्ते में शुरू होता है। सूत्रों ने बताया कि कानूनी राय ली जाएगी ताकि अगर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए, तो वह न्यायिक जांच में टिक सके।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा के पूर्व महासचिव एवं संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 4 का हवाला देते हुए यह बात रेखांकित की कि केवल एक राजनीतिक पार्टी ही किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय कर सकती है, न कि सांसद या विधायक।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि अगर कोई राजनीतिक पार्टी किसी दूसरी पार्टी में विलय करने का फ़ैसला करती है, तो उसके विधायकों और सांसदों को इस विलय पर सहमत होना होगा, लेकिन सिर्फ़ सांसद या विधायक किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते... यही संवैधानिक प्रावधान है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग के एक पूर्व अधिकारी, जिन्होंने चुनाव प्राधिकरण में राजनीतिक दलों के मामलों को संभाला था, ने तृणकां के बागी नेताओं की एनसीपीआई में विलय की मौजूदा योजना को एक नया प्रयोग बताया है, जिसका ज़िक्र न तो दलबदल विरोधी कानून में है और न ही 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' में है।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को तृणकां में संकट और गहरा गया, जब पार्टी छोड़कर आए सांसदों ने एनसीपीआई में विलय की घोषणा की और निचले सदन में बैठने के लिए अलग व्यवस्था की मांग को लेकर बिरला से मुलाकात की।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के बाद, पार्टी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन पर पार्टी के 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'तृणकां के दो-तिहाई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए पत्र सौंपा है। हम नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय करेंगे और राजग का समर्थन करेंगे।'</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीपीआई ने जनवरी 2023 में खुद को एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर रजिस्टर कराया था। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में इसका पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले के संकराइल में एक इमारत है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी मौजूदगी बहुत कम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:56:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुझ पर हुए हमले के पीछे आरएसएस के कुछ लोग थे: अभिजित दीपके</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: cockroachjantaparty Instagram account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76680/abhijit-deepke-some-people-from-rss-were-behind-the-attack"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/cjp1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर/दक्षिण भारत। </strong>कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजित दीपके ने मंगलवार को आरोप लगाया कि एक दिन पहले उन पर हुए हमले के पीछे 'आरएसएस के कुछ लोग' थे। उन्होंने दावा किया कि यह असली मुद्दे से ध्यान भटकाने और छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले महीने हुए नीट (यूजी) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग के लिए सीजेपी का विरोध प्रदर्शन आज संविधान चौक पर होना है। इससे पहले मंगलवार सुबह दीपके नागपुर एयरपोर्ट पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को जयपुर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, जब सीजेपी के संस्थापक को उनके समर्थक कंधों पर उठाए हुए थे, तो कथित तौर पर दो लोगों ने उन्हें कई बार थप्पड़ मारे। इस घटना के सिलसिले में दो युवकों को हिरासत में लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब उनसे पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि उन पर हुए हमले के पीछे कौन था, तो दीपके ने आरोप लगाया, 'इसमें आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़े कुछ लोग शामिल थे और इसमें कोई नई बात नहीं है।'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि जब भी कोई सरकार या उसकी विचारधारा के ख़िलाफ़ बोलता है, तो वे ऐसा ही करते हैं। इसमें कुछ भी नया नहीं है।<br /> <br />आरएसएस से संबंध होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करने के दावों पर दीपके ने कहा, 'क्या इसीलिए उन्होंने कल मुझ पर हमला किया?'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि उन पर हुआ हमला असल मुद्दे से ध्यान भटकाने और छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'हम अपने मुद्दों से पीछे नहीं हटेंगे; आप चाहें तो हम पर जितने चाहें उतने हमले करें। हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे और अपने मुख्य मुद्दे से नहीं भटकेंगे — जो एक करोड़ से ज़्यादा छात्रों के साथ हो रहे अन्याय से जुड़ा है — और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इसकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी।'</p>
<blockquote class="instagram-media"><strong><a href="https://www.instagram.com/p/DZnBSjOE73E/?hl=en&amp;img_index=1">https://www.instagram.com/p/DZnBSjOE73E/?hl=en&amp;img_index=1</a></strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'इस तरह के हमले होते रहेंगे, लेकिन मैं डरता नहीं हूं। हम गांधीजी और अंबेडकर के रास्ते पर चलते हैं और यह हमारा सत्याग्रह है। हम शांतिपूर्ण ढंग से इसे जारी रखेंगे।'</p>
<p style="text-align:justify;">दीपके ने नागपुर के निवासियों, जिनमें छात्र और युवा भी शामिल हैं, से अपील की है कि वे मंगलवार को शाम 4 बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए संविधान चौक पर इकट्ठे हों।<br /> <br />सीजेपी नीट (यूजी) पेपर लीक मामले को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:19:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्लोवाकिया ने संरा सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76679/slovakia-supported-indias-permanent-membership-in-the-un-security-council"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2023-01/flag.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्रातिस्लावा/दक्षिण भारत। </strong>स्लोवाकिया ने 'सुधारित' संरा सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य यूरोपीय देश की अहम यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी और स्लोवाकिया के उनके समकक्ष रॉबर्ट फिको के बीच हुई बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त बयान में, दोनों पक्षों ने संरा और यूएनएससी जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में व्यापक सुधारों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें 'अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाने वाला' बनाया जा सके।<br /> <br />दोनों नेताओं ने सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त बयान में कहा गया, 'इस संदर्भ में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्लोवाकिया के लगातार समर्थन की सराहना की।'<br /> <br />मोदी और फिको ने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षवाद के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संरा सहित वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत लंबे समय से सुधारित और विस्तारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। उसका तर्क है कि 15 सदस्यों वाली इस संस्था का मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और आज की वैश्विक वास्तविकताओं को ठीक से नहीं दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली की उम्मीदवारी को कई यूरोपीय देशों के साथ-साथ जी4 समूह के अन्य सदस्यों — ब्राज़ील, जर्मनी और जापान — सहित कई देशों का समर्थन मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संरा सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य - चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका - और दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्लोवाकिया ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) - जो 48 देशों का एक मल्टीलेटरल एक्सपोर्ट कंट्रोल सिस्टम है - में भारत की सदस्यता के प्रति अपने सकारात्मक रुख को फिर से दोहराया।<br /> <br />सन् 1993 में स्लोवाकिया की आज़ादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया, जिसका मकसद रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुले और नियमों पर आधारित इंडो-पैसिफिक, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और नेविगेशन की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:45:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा - सिर्फ़ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है: राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: rahulgandhi FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76677/every-paper-leaked-every-canceled-exam-not-just-a"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>कोटा में अपने छात्र सम्मेलन से पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि हर पेपर लीक और रद्द हुई परीक्षा सिर्फ़ सिस्टम की नाकामी नहीं है, बल्कि देश के लाखों युवाओं के सपनों पर भी एक चोट है।</p>
<p style="text-align:justify;">हिंदी में एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों को जो मिलता है, वह कड़ी मेहनत का फल नहीं, बल्कि सपने देखने की हिम्मत करने की सज़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'देश के हर युवा से मेरी एक बात - आज इस देश में मेहनत का फल नहीं, सपने देखने की सज़ा मिलती है। हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा, हर अधूरी भर्ती - सिर्फ़ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है।'</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा, 'मैं जानता हूं कि आप थक चुके हैं। ग़ुस्से में हैं। पर याद रखिए - जब सरकार सुनने को तैयार न हो, तब आवाज़ ऊंची करनी पड़ती है। इसलिए मैं आप सबको बुला रहा हूं - 17 जून, कोटा। छात्रों की गूंज।'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'आइए, मिलकर एक ऐसी हुंकार बनें जिसे अनसुना करना नामुमकिन हो। कोटा से शुरुआत - फिर देश के हर कोने तक। यह आपके भविष्य की लड़ाई है। और मैं आपके साथ हूं।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:16:35 +0530</pubDate>
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