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                <title>भारत - Dakshin Bharat Rashtramat</title>
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                <title>प. बंगाल: तृणकां को एक और झटका, पूर्व मंत्री ने दिया पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: AITCofficial FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76700/another-blow-to-west-bengal-trc-former-minister-resigns-from"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-05/tmc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता/दक्षिण भारत। </strong>पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक ने शुक्रवार को घोषणा की कि खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने तृणकां के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">तृणकां प्रमुख ममता बनर्जी के लंबे समय से सहयोगी रहे मल्लिक ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपना फ़ैसला पहले ही बता दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'अपनी बेहद खराब सेहत के कारण मैंने तृणकां के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है।'</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:55:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध: उच्च न्यायालय ने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: PixaBay]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76699/temporary-ban-on-telegram-high-court-rejects-petition-challenging-the"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2024-11/court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/भाषा।</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 जून को होने वाली नीट-यूजी पुन: परीक्षा से पहले सोशल मीडिया मंच ‘टेलीग्राम’ तक पहुंच को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित करने के केंद्र सरकार के कदम को शुक्रवार को बरकरार रखा और कहा कि यह आदेश ‘अनुचित नहीं’ है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति तेजस कारिया की अवकाशकालीन पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार का आदेश ‘अपनाया गया सबसे कम प्रतिबंधात्मक उपाय’ है और सरकार के पास टेलीग्राम तक पहुंच को अवरुद्ध करने का निर्देश देने का अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">विस्तृत आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। टेलीग्राम के वकील ने मंच तक पहुंच को अवरुद्ध करने के सरकारी आदेश की वैधता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की इस कार्रवाई से 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बीच मेडिकल प्रवेश के लिए तीन मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (स्नातक) को 12 मई को रद्द कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) इस मामले की जांच कर रहा है और पुन: परीक्षा 21 जून को होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने एनटीए की सिफारिशों पर कार्रवाई करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत 16 जून को एक निर्देश जारी किया था, जिसमें भारत में 22 जून तक टेलीग्राम तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:46:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली को मिला पहला महिला पुलिस स्टेशन</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: Delhi Police]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76698/delhi-gets-its-first-womens-police-station"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2023-10/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>उत्तरी दिल्ली के सब्जी मंडी इलाके में शुक्रवार को राजधानी के पहले महिला पुलिस स्टेशन का उद्घाटन किया गया। इस कदम का मकसद महिलाओं की सुरक्षा को मज़बूत करना और उनके ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों से निपटने के तरीक़े को बेहतर बनाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा की मौजूदगी में सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन परिसर में पुलिस स्टेशन का उद्घाटन किया।<br /> <br />अधिकारियों ने बताया कि यह नया पुलिस स्टेशन दिल्ली का पहला ऐसा स्टेशन है जहां पूरी तरह से महिला स्टाफ तैनात है। यह शहर में जेंडर-सेंसिटिव पुलिसिंग सिस्टम बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पुलिस स्टेशन महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों, जैसे– घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, पीछा करना और मारपीट आदि की रोकथाम, जांच और उनके समाधान पर खास ध्यान देने के मकसद से बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस स्टेशन में जांच करने वाले अधिकारियों से लेकर सपोर्ट स्टाफ़ तक, सभी कर्मचारी महिलाएं हैं।<br /> <br />पुलिस ने यह भी कहा कि स्टेशन जागरूकता कार्यक्रम चलाएगा, काउंसलिंग देगा और लोगों तक पहुंचने के प्रयास करेगा, ताकि समुदाय की भागीदारी बढ़ाई जा सके और महिलाओं के अधिकारों व कानूनी उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:34:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'पूरी तरह साक्षर' राज्य बना उत्तराखंड!</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: pushkarsinghdhami.uk FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76697/uttarakhand-becomes-a-completely-literate-state"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-01/pushkar-singh-dhami.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देहरादून/दक्षिण भारत। </strong>उत्तराखंड कैबिनेट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साक्षरता मानकों के आधार पर राज्य को 'पूरी तरह साक्षर' घोषित करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फ़ैसला यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य ने केंद्र सरकार के 'समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ' (उल्लास) कार्यक्रम के तहत तय किए गए मानदंडों को पूरा कर लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले खबर आई थी कि प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि अधिकारियों को 'पूर्ण साक्षर' राज्य से संबंधित प्रस्ताव तैयार करके उसे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में उल्लास कार्यक्रम के तहत निर्धारित साक्षरता मानकों को पूरा कर लिया गया है और वर्तमान में राज्य की साक्षरता दर 98 फीसदी से अधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने बताया कि कार्यक्रम के तहत प्रदेश में वयस्कों के लिए बुनियादी साक्षरता, महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल, बुनियादी शिक्षा और सतत शिक्षा पर विशेष फोकस किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इसके लिए सामाजिक संस्थाओं, कॉर्पोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लिया गया और निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाया गया, जिसमें मुख्य रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित समूहों को शामिल गया गया।<br />योजना में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी।<br />     <br />रावत ने कहा कि इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को अब तक पांच राज्य- मिज़ोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम हासिल कर चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लास कार्यक्रम में 15 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की शिक्षा पर फोकस किया जाता है और जब किसी राज्य के वयस्कों में शिक्षा की दर करीब 95 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो जाती है और गैर-साक्षर लोगों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा हो जाता है, तब उसे ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:02:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राउत का दावा- 'बागी शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को अतिरिक्त 10 करोड़ रु. दिए गए'</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: sanjay___raut Instagram account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76695/rauts-claim-additional-rs-10-crore-given-to-rebel-shiv"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/sanjay-raut2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दक्षिण भारत। </strong>शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने गुरुवार को दावा किया कि उनकी पार्टी के बागी सांसदों को अतिरिक्त 10 करोड़ रुपए दिए गए हैं और उन्हें राजस्थान में एक सुरक्षित जगह पर ले जाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने कहा कि 'गद्दारों' - यानी बागी शिवसेना (यूबीटी) सांसदों - को पुलिस सुरक्षा दी गई है। उन्होंने मांग की कि इन सांसदों और उनकी संपत्तियों को दी गई सुरक्षा वापस ली जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पार्टी बागी सांसदों के खिलाफ 'ऑपरेशन तुड़वा' शुरू करेगी। उन्होंने कहा, 'बागी शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को 10-10 करोड़ रुपए अतिरिक्त दिए गए हैं। इससे पहले उन्हें 15-15 करोड़ रुपए दिए गए थे। वे दिल्ली से राजस्थान में किसी सुरक्षित जगह पर चले गए हैं।'</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा सांसद, जिन्होंने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर से अभद्र का इस्तेमाल किया, ने पहले आरोप लगाया था कि सांसदों को पाला बदलने के लिए 50 करोड़ रुपए की पेशकश की जा रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने मांग की कि बागी सांसद इस्तीफा दें और दोबारा चुनाव लड़ें। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, 'अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।'</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले दिन में, शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने यहां हुई पार्टी की संसदीय बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इससे संकेत मिलता है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में उनका औपचारिक रूप से शामिल होना तय है। </p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ने बैठक में हिस्सा लिया, साथ ही पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद संजय राउत भी मौजूद थे। बाकी छह सांसदों की गैर-मौजूदगी ने पार्टी के संसदीय खेमे में फूट की बात लगभग पक्की कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों में नागेश अष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिम्बलकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।<br /> <br />सावंत ने कहा कि छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे, वहीं राउत ने दावा किया कि उनके न आने को पार्टी व्हिप का उल्लंघन माना जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:01:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हुए</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: @ShivsenaUBTComm X account
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76694/6-shiv-sena-ubt-mps-did-not-attend-the-party"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/shiv-sena-ubt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत।</strong> शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इससे संकेत मिलता है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में उनका औपचारिक रूप से शामिल होना तय है। </p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ने बैठक में हिस्सा लिया। साथ ही, पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद संजय राउत भी मौजूद थे। बाकी छह सांसदों की गैर-मौजूदगी ने पार्टी के संसदीय खेमे में फूट की बात लगभग पक्की कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों में नागेश अष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिम्बलकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। <br /> <br />सूत्रों के मुताबिक, सभी छह बागी सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मांग करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, क्योंकि माना जा रहा है कि बिरला का कार्यालय वेरिफिकेशन के लिए कुछ सांसदों की व्यक्तिगत उपस्थिति चाहता है और आने वाले दिनों में ऐसा होने की उम्मीद है।<br /> <br />सूत्रों ने बताया कि अभी हस्ताक्षरों की जांच चल रही है। बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया, जिसमें उन्हें गुरुवार सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया गया। इस कदम का मकसद बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की संभावित कार्रवाई का रास्ता साफ करना था।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद हैं और दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा।<br /> <br />बैठक से पहले सावंत ने पत्रकारों से कहा, 'पार्टी प्रमुख (उद्धव ठाकरे) से सलाह-मशविरे के बाद व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:14:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मोदी की इजराइल के प्रति अंधभक्ति हमारे देश को बहुत महंगी पड़ रही है: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: IndianNationalCongress FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76693/modis-blind-devotion-towards-israel-is-costing-our-country-dearly"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2022-12/congress2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद गुरुवार को कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि 'इस्लामाबाद एमओयू' कहे जा रहे इस समझौते से पाकिस्तान की नई क्षेत्रीय हैसियत और वैश्विक प्रभाव का पता चलता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति के तौर-तरीकों और मूल भावना, दोनों के लिए एक 'बड़ा झटका' है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्री इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। सच यह है कि इसे इस्लामाबाद एमओयू कहा जा रहा है, जो पाकिस्तान की नई क्षेत्रीय हैसियत और वैश्विक प्रभाव को दिखाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह वही पाकिस्तान है, जिसे नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर दिया था। यह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की विषयवस्तु और शैली, दोनों के लिए गंभीर झटका है। पाकिस्तान अब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक और सुरक्षा संरचना में और अधिक गहराई से शामिल हो गया है, जिसके भारत के लिए गंभीर और बड़े निहितार्थ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा कि यदि एमओयू शब्दों और भावना, दोनों में कायम रहता है, तो यह एक बड़ी प्रगति है। लेकिन इसमें दोनों पक्षों के लिए 'गलतफहमी का ज्ञापन' बनने की भी आशंका है। फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि अगले 60 दिन बेहद महत्त्वपूर्ण होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा कि एमओयू में ईरान के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण और कुछ अप्रत्याशित लाभ भी हैं। ईरान ने अपना प्रतिरोध और जुझारूपन दिखाया है। जीसीसी देशों ने, जिन्होंने ईरान के जवाबी हमलों का पूरा भार झेला है, सावधानी के साथ एमओयू का स्वागत किया है, लेकिन वे निस्संदेह दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों पर फिर से विचार करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा कि यह एमओयू इजराइल के प्रधानमंत्री के लिए निश्चित हार है, हालांकि वे अभी भी इसे अलग-अलग तरीकों से पटरी से उतार सकते हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं, यहां तक कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी उनके प्रति अपने गुस्से और निराशा को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया है। केवल प्रधानमंत्री मोदी इस क्षेत्र में नेतन्याहू की कार्रवाइयों - जिनमें लेबनान, गाजा और कब्जे वाला वेस्ट बैंक शामिल हैं - के समर्थन में दृढ़ बने हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल के प्रति यह अंधभक्ति हमारे देश को बहुत महंगी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा कि यह एमओयू अमेरिका के लिए गंभीर झटका है, जिसने इजराइल के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़े लक्ष्यों के साथ युद्ध शुरू किया था, जो बिल्कुल भी पूरे नहीं हुए। सैन्य शक्ति की सीमाएं एक बार फिर उजागर हो गई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का लगातार तुष्टीकरण - जिसका ताजा प्रमाण कल रात हुई ट्रंप-मोदी द्विपक्षीय बैठक पर विदेश मंत्रालय का बयान - शर्मनाक और वास्तव में राष्ट्र-विरोधी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:45:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिवसेना (यूबीटी) के कितने सांसद बागी? आज साफ होगी तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: UddhavBalasahebThackeray FB page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76692/how-many-mps-of-shiv-sena-ubt-have-rebelled-the"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2024-06/uddhav-thackeray.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दक्षिण भारत। </strong>नई दिल्ली में गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की एक अहम बैठक होगी। इस बैठक में यह तय होगा कि बागी सांसदों की अलग गुट बनाने की कोशिश कामयाब होगी या नहीं। यह बैठक सांसदों को इसमें शामिल होने का व्हिप जारी किए जाने के ठीक एक दिन बाद हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह कदम तब उठाया गया जब ऐसी अटकलें तेज़ हो गईं कि बागी शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद लोकसभा में एक अलग गुट बनाने और बाद में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने बुधवार को अपने सांसदों के लिए एक व्हिप जारी किया। इसमें उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया गया है, ताकि बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई का रास्ता साफ करने के लिए अहम मुद्दों पर चर्चा की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक गुरुवार को सुबह 11 बजे संसद परिसर में पार्टी के कार्यालय में होगी। लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद हैं और एक अलग गुट बनाने के लिए उनमें से कम से कम दो-तिहाई सांसदों की ज़रूरत होगी। अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत के अलावा, जिन्होंने उद्धव गुट को समर्थन देने का वादा किया है, बाकी छह सांसद संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टिकर और संजय जाधव हैं। अगर बागी गुट का एक भी सांसद बैठक में शामिल होता है, तो इसे अलग गुट के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती।<br /> <br />सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया है कि वे पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी 'अलग हुए' गुट को मान्यता न दें।<br /> <br />सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते संकट के बीच खबर है कि शिवसेना (यूबीटी) के बागी नेताओं के एक समूह ने बुधवार को बिरला से अनौपचारिक रूप से मुलाकात की और निचले सदन में पार्टी के नौ में से छह सांसदों का समर्थन होने का दावा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार को दिल्ली में होने वाली अहम बैठक से कानूनी और व्यावहारिक रूप से यह तय होगा कि उद्धव ठाकरे की संसदीय ताकत बनी रहेगी या उन्हें पार्टी में एक और ज़बरदस्त बंटवारे का सामना करना पड़ेगा। यह बंटवारा साल 2006 में राज ठाकरे के शिवसेना से अलग होने के बाद तीसरा बंटवारा होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) के सूत्रों ने बताया कि विरोधी खेमे के पास अभी भी छह सांसदों का समर्थन नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 10:38:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान ने युद्ध समाप्त करने के प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: WhiteHouse FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76691/us-iran-sign-preliminary-agreement-to-end-war"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/donald-trump1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन/एपी। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बुधवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत तेहरान अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को कम करेगा और इसके बदले उसे अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी, जिससे ईरान बिना किसी रोक के अपना तेल बेच सकेगा। अमेरिका और ईरान ने यह जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों देशों के नेताओं द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद युद्ध समाप्त करने संबंधी यह प्रारंभिक समझौता ‘तत्काल प्रभाव’ से लागू हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते में स्थायी रूप से संघर्ष समाप्त करने की बात कही गई है। इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिन की वार्ता अवधि शुरू हो गई है। हालांकि, ट्रंप ने दोबारा हमला शुरू करने का विकल्प खुला रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा प्रतीत होता है कि समझौते के तहत ईरान को शुरुआत में ही कई बड़े लाभ दिए गए हैं, जबकि बदले में उससे बहुत कम हासिल किया गया है। यह समझौता कई दिनों से गोपनीयता और भ्रम की स्थिति में घिरा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी अधिकारियों ने सप्ताहांत में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा इस समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी देने के बाद भी इसकी शर्तों का खुलासा करने से इनकार कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय महल में रात्रिभोज के दौरान समझौते की कागजी प्रति पर हस्ताक्षर किए। वर्साय में पहले भी युद्ध या क्षेत्रीय विवाद समाप्त करने वाले कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर समारोह आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान की ओर से परस्पर विरोधी जानकारी सामने आने के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है कि समारोह होगा या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने फ्रांस में जी7 के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद वर्साय में आयोजित रात्रिभोज से निकलते समय कहा, ‘इस पर हस्ताक्षर हो गए हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘व्हाइट हाउस’ के एक सहयोगी द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए वीडियो में मैक्रों के बगल में बैठे हुए ट्रंप समझौते की कागजी प्रति पर हस्ताक्षर करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को दस्तावेज और कलम सौंप दिए तथा कमरे में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैक्रों की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के अनुसार, ट्रंप ने हस्ताक्षर करने से ठीक पहले कहा, ‘यह आसान नहीं था।’</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने तेहरान में समझौते पर हस्ताक्षर किए। एजेंसी ने ट्रंप और पेजेश्कियन के हस्ताक्षर वाला समझौता दिखाते हुए ईरानी राष्ट्रपति की तस्वीरें भी जारी कीं जिसमें वह ‘गंभीर मुद्रा में’ नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते का आधिकारिक पाठ अब तक जारी नहीं किया गया है। कई दिनों तक इसे गोपनीय रखे जाने के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर पत्रकारों को इसके मसौदे के बारे में जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद ईरान के सरकारी टेलीविजन ने भी समझौते का एक पाठ जारी किया जो काफी हद तक अमेरिका की ओर से जारी जानकारी के अनुरूप था।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते के अधिकतर प्रावधानों के तहत युद्ध से पहले की स्थिति बहाल होगी। इनमें युद्ध समाप्त करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फिर शुरू करना तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना शामिल है। दुनिया में तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग के बंद होने से बड़ा ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के मसौदों के अनुसार, समझौते के तहत जलडमरूमध्य को दो महीने के लिए खोला जाएगा और इस दौरान कोई शुल्क नहीं लगेगा लेकिन भविष्य में शुल्क लगाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बदले अमेरिका ईरान के खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों में से कुछ से छूट देने की दिशा में कदम उठाएगा लेकिन उन्हें समाप्त नहीं करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते में चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला के खिलाफ इजराइल के हमले के बीच लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 10:07:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संजय राउत ने शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को 50 करोड़ रु. का प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: sanjay___raut Instagram account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76689/sanjay-raut-alleges-shiv-sena-ubt-mps-being-lured-with"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/sanjay-raut1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/भाषा। </strong>उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में फूट पड़ने की अटकलें तेज होने के बीच पार्टी नेता संजय राउत ने बुधवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए ‘50 करोड़ रुपए’ की पेशकश की जा रही है और उन्होंने बागी सांसदों को पार्टी छोड़ने से पहले इस्तीफा देने की चुनौती भी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने, साल 2022 में हुई नेताओं की बगावत का नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान जिक्र करते हुए कहा कि अगर पार्टी में फिर उसी तरह फूट डाली गई तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (उबाठा) के सांसद चुप नहीं बैठेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संवाददाता सम्मेलन में शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन- अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि एक ‘महत्त्वपूर्ण व्यक्ति’ ने मंगलवार देर रात उन्हें बताया कि महाराष्ट्र के सांसदों को ‘खरीदने’ की कोशिश की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘मुझे बताया गया कि कीमत 50 करोड़ रुपए है और रात तक प्रत्येक सांसद को 15-15 करोड़ रुपए पहुंचाए जाने थे। वे धन मिले बिना विमान में सवार होने को कथित रूप से तैयार नहीं थे।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने हालांकि कहा कि पार्टी के पास किसी तरह की फूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और कुछ सांसदों के अलग होने की खबरें मीडिया के जरिये मिल रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘अगर दलों को इस तरह तोड़ा जाता है तो चुनाव लड़ने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि संबंधित सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना (उबाठा) के ‘मशाल’ चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए हैं और ‘किसी को भी उस जनादेश से विश्वासघात करने का अधिकार नहीं है।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर साल 2022 में अविभाजित शिवसेना में हुई फूट जैसी घटना दोहराई गई तो महाराष्ट्र और शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘अगर कोई पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए। वे हमारी पार्टी के टिकट पर और मतदाताओं द्वारा चुने जाने के कारण संसद पहुंचे हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पार्टी ने कानूनी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और बृहस्पतिवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक के लिए ‘व्हिप’ जारी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उनसे संविधान के प्रावधानों के अनुरूप सख्ती से कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सावंत ने कहा कि किसी भी सांसद ने पार्टी छोड़ने के फैसले के बारे में आधिकारिक रूप से सूचित नहीं किया है और सभी खबरें मीडिया एवं सोशल मीडिया के जरिये सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देसाई ने कहा कि पार्टी को अपने सांसदों पर अब भी पूरा भरोसा है लेकिन एहतियात के तौर पर कानूनी उपाय किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (उबाठा) नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को ‘खरीदने और दलों को तोड़ने’ की प्रवृत्ति लोकतंत्र तथा संविधान के लिए खतरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">तीनों नेताओं ने कहा, ‘हमारे पास किसी तरह की फूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। हमें ये खबरें मीडिया से मिल रही हैं और हम उन्हीं पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने उद्धव ठाकरे के साथ रविवार को हुई शिवसेना (उबाठा) सांसदों की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि एक सांसद ने चार बार साईं बाबा की कसम खाई, दूसरे ने देवी भवानी के नाम पर शपथ ली तथा बाकियों ने अपने बच्चों और माताओं की कसम खाकर कहा कि वे हमारे साथ बने रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘हमने इन सांसदों के लिए खून-पसीना बहाया है। हमने उन्हें टिकट दिया और अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक मदद भी की।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि ये सांसद उद्धव बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के कारण निर्वाचित हुए हैं न कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कारण।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘हमने ‘व्हिप’ जारी कर संसदीय दल की बैठक बुलाई है। हमने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखा है। निर्वाचित प्रतिनिधियों को खरीदना और दलों को तोड़ना लोकतंत्र तथा संविधान के विरुद्ध है।’</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा कि इसके बाद कानूनी लड़ाई होगी और यह इतना आसान नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अगर कोई सोचता है कि कुछ लोग एकत्र होकर धन के जरिए मामला निपटा सकते हैं तो वह गलतफहमी में है।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने धाराशिव के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर पर दबाव डाले जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सांसद के पिता की हत्या के 20 साल पुराने मामले में बुधवार को फैसला सुनाया जाना था।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘उनसे कथित तौर पर कहा गया कि अगर वह अपने पिता की हत्या के मामले में अपने पक्ष में फैसला चाहते हैं तो उन्हें उनके गुट में शामिल हो जाना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब इस मामले में शनिवार को फैसला सुनाए जाने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने कहा, ‘अगर ऐसा हो रहा है तो संविधान, अदालतों और लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है? बृहस्पतिवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। सभी को आमंत्रित किया गया है और सभी को बैठक में शामिल होना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा, ‘पार्टी ने हमें जो कुछ दिया है, उसे हम भूल नहीं सकते। बालासाहेब ठाकरे ने हमें बेटों की तरह माना और उद्धव ठाकरे ने हमेशा भाइयों जैसा व्यवहार किया।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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                <title>शिवसेना (यूबीटी) में बगावत की चर्चा पर राउत बोले- 'अगर वफ़ादारी बदलनी है तो इस्तीफ़ा दें'</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: sanjayraut.official FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76688/on-the-discussion-of-rebellion-in-shiv-sena-ubt-raut"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/sanjay-raut.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई/दक्षिण भारत।</strong> शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बुधवार को बागी सांसदों को चुनौती दी कि अगर वे पाला बदलना चाहते हैं तो पार्टी छोड़ दें। यह बयान उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी में जल्द ही फूट पड़ने की बढ़ती अटकलों के बीच आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राउत ने कहा कि अगर पार्टी में फिर से फूट पड़ती है, तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह बात साल 2022 में हुई बगावत के संदर्भ में कही।</p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन - अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे - ही राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">राउत ने बागी नेताओं से कहा, 'उद्धव ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने सांसदों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। अगर आप पाला बदलना चाहते हैं तो इस्तीफा दे दें।'</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, राज्यसभा सदस्य ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के पास अभी भी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।<br /> <br />उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को 15 करोड़ रुपए में खरीदा जा रहा है। राउत ने कहा कि अगर तृणकां और शिवसेना (यूबीटी) जैसी पार्टियां बंट जाती हैं तो चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>'इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं'</strong></p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में दलबदल कराने की किसी भी कथित कोशिश से उनकी पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बावनकुले ने नागपुर में कहा, 'मुझे 'ऑपरेशन टाइगर' के बारे में कोई जानकारी नहीं है।' उन्होंने कहा, 'चूंकि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं होगा।'</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा की मिलीभगत के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, 'इससे भाजपा का क्या लेना-देना है? हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमें नहीं पता कि 'ऑपरेशन टाइगर' क्या है, इसे कौन लाया और क्यों लाया गया; हमें यह भी नहीं पता। भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:03:07 +0530</pubDate>
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                <title>केंद्र का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है: अरविंद केजरीवाल</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: @ArvindKejriwal X account]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76687/center-has-no-intention-of-stopping-paper-leak-arvind-kejriwal"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-02/arvind-kejriwal1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को 'बेतुका' बताया और दावा किया कि सरकार का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि सरकार ने मंगलवार को 21 जून को होने वाले नीट-यूजी 2026 रीटेस्ट से पहले टेलीग्राम के इस्तेमाल पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि यह कदम नकल कराने वाले रैकेट और गलत जानकारी से निपटने के लिए उठाया गया है।<br /> <br />एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने कहा कि 22 जून तक टेलीग्राम पर लगाई गई रोक, इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिशों का हिस्सा है कि दोबारा परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के हो।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फ़ैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में सरकार की रणनीति की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए।</p>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल ने कहा, 'मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का कोई इरादा नहीं है। इसीलिए ऐसे अजीबोगरीब कदम उठाए जा रहे हैं - जैसे सेना के विमान से पेपर ले जाना और टेलीग्राम को बंद करना। क्या इन कदमों से पेपर लीक रुकेंगे? बिल्कुल नहीं।'</p>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के नेता ने आगे आरोप लगाया कि पेपर लीक एक संगठित वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक का धंधा कई अरब रुपयों का रैकेट है। इसका पैसा ऊपर तक जाता है। अगर पेपर लीक रुक जाएं, तो विधायकों/सांसदों को खरीदने के लिए पैसा कहां से आएगा?'<br /> <br />परीक्षा रद्द होने के बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा के लिए सुरक्षा उपायों की कड़ी जांच-पड़ताल हो रही है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जहां एनटीए का कहना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए संचार माध्यमों को रोकना और सैन्य परिवहन का इस्तेमाल करना ज़रूरी है, वहीं विपक्षी नेताओं का तर्क है कि इन कदमों से पेपर लीक के पीछे के मुख्य नेटवर्क का पता नहीं चल पाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:52:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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