शेयर बाजार
शेयर बाजार

मुंबई/भाषा। अमेरिका-चीन व्यापार करार को लेकर उम्मीद और ब्रिटेन के आम चुनाव में बोरिस जॉनसन की जीत के बीच शुक्रवार को बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 428 अंक की छलांग के साथ 41,000 अंक के पार पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में जोरदार बढ़त से यहां भी धारणा को बल मिला।

बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 41,055.80 अंक के उच्च स्तर को छूने के बाद अंत में 428 अंक या 1.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 41,009.71 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 114.90 अंक या 0.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 12,086.70 अंक पर बंद हुआ।

साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 564.56 अंक या 1.39 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं निफ्टी भी साप्ताहिक आधार पर 165.20 अंक या 1.38 प्रतिशत के लाभ में रहा। सेंसेक्स की कंपनियों में एक्सिस बैंक का शेयर सबसे अधिक 4.21 प्रतिशत चढ़ गया। वेदांता में 3.75 प्रतिशत, एसबीआई में 3.39 प्रतिशत, मारुति में 3.20 प्रतिशत, इंडसइंड बैंक में 3.07 प्रतिशत और येस बैंक में 2.87 प्रतिशत का लाभ रहा।

वहीं दूसरी ओर भारती एयरटेल का शेयर 1.98 प्रतिशत टूट गया। कोटक बैंक में 1.38 प्रतिशत, बजाज आटो में 0.88 प्रतिशत, एशियन पेंट्स में 0.31 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक में 0.05 प्रतिशत और हिंदुस्तान यूनिलीवर में 0.03 प्रतिशत का नुकसान रहा।

कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका-चीन व्यापार करार के पहले चरण के पूरा होने की खबरों तथा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जॉनसन की आम चुनाव में जीत से निवेशक उत्साहित हैं। ट्रंप प्रशासन और चीन एक छोटे व्यापार करार को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं जिससे रविवार से लगने वाले शुल्क स्थगित हो जाएंगे। इससे दोनों देशों के बीच 17 माह से जारी व्यापार युद्ध कुछ ठंडा पड़ेगा। समझा जाता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस करार को अंतिम मंजूरी दे दी है।

आनंद राठी एंड स्टॉक ब्रोकर्स के प्रमुख बुनियादी अनुसंधान (निवेश सेवाएं)-एवीपी इक्विटी शोध नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि अमेरिका-चीन व्यापार करार की खबरों के बाद भारतीय शेयर बाजारों ने बृहस्पतिवार को आए ऊंची मुद्रा स्फीति तथा औद्योगिक उत्पादन में गिरावट के आंकड़ों को नजरअंदाज किया और सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए।

इस बीच, अंतर बैंक विदेशी विनिमय बाजार में रुपया स्थिर रुख के साथ 70.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। ब्रेंट कच्चा तेल वायदा 1.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64.89 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था।