अरविंद पनगढ़िया
अरविंद पनगढ़िया

न्यूयॉर्क/भाषा। भारत में आर्थिक सुस्ती अब समाप्ति की ओर है और देश को 10 प्रतिशत वृद्धि के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतियों को और अधिक खुला बनाने की आवश्यकता है। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने यह कहा है।

केन्द्रीय बजट 2020 पर परिचर्चा के दौरान अपने मुख्य संबोधन में पनगढ़िया ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बाद यह 7 से 8 प्रतिशत की दर पर पहुंच जाएगी, जैसा कि पिछले 15 से 16 साल की अवधि में यह रही है।

भारत के महावाणिज्य दूत द्वारा मंगलवार को भारत-अमेरिका रणनीतिक भागीदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के साथ भागीदारी में आयोजित इस कार्यक्रम में पनगढ़िया ने कहा, आर्थिक सुस्ती के मामले में मेरा अपना आकलन है कि अब यह जितनी नीचे आनी थी आ चुकी है।

पनगढ़िया कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा, चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जो कि 31 मार्च को समाप्त हो रही है, हमें कुछ सुधार दिखाई देगा। बहुत ज्यादा नहीं होगा लेकिन यह निश्चित है कि पहली छमाही के मुकाबले दूसरी छमाही बेहतर होगी।

पनगढ़िया ने कहा कि 2003 के बाद से भारत ने औसतन करीब सात प्रतिशत आर्थिक वृद्धि हासिल की है। मोदी सरकार के पहले पांच साल के कार्यकाल में यह औसतन 7.5 प्रतिशत के दायरे में रही है।

उन्होंने कहा, इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय अर्थव्यवस्था काफी अच्छा कर सकती है। उनके आकलन के मुताबिक अर्थव्यवस्था में सुस्ती की प्रमुख वजह वित्तीय बाजार रहे हैं। वित्तीय बाजारों में समस्या की वजह से बैंकों के अपने खाते बिगड़ने के साथ ही कंपनियों के लेखाजोखा का भी संतुलन बिगड़ा है।

पनगढ़िया ने कहा, इस मामले में बैंकों की फंसे कर्ज की समस्या से निपटने की धीमी प्रक्रिया को लेकर आप सरकार की आलोचना कर सकते हैं। समस्या के बारे में वास्तव में 2013 में ही पता चल गया था … लेकिन फंसे कर्ज यानी एनपीए की इस समस्या को कभी भी तेजी से नहीं सुलझाया गया।

हालांकि, अब जबकि इस समस्या का समाधान हो रहा है, उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा, ‘हम देखेंगे कि आर्थिक वृद्धि लौटने लगी है।’