मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद
मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद

महातिर को महंगी पड़ी इमरान की यारी, पाम तेल आयात के लिए कारोबारियों ने तलाशा दूसरा विकल्प

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को हटाने के बाद बौखलाए पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाना मलेशिया को भारी पड़ रहा है। दरअसल, मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर के मामले पर पाकिस्तान का साथ दिया और कहा कि भारत ने इस पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के पीछे भले ही कोई कारण रहा हो लेकिन यह गलत है।

सोशल मीडिया पर फैले महातिर के इस भाषण ने उनके मुल्क की तिजोरी पर जोरदार चोट कर दी है। बता दें कि भारत बड़ी मात्रा में मलेशिया से पाम तेल का आयात करता है। महातिर के रुख पर भारत के कारोबारियों ने कड़ा ऐतराज जताया और वहां से पाम तेल मंगवाना बंद कर दिया।

‘सबसे पहले देश, बाद में कारोबार’
जानकारी के अनुसार, अब तक भारत सरकार की ओर से मलेशिया के खिलाफ ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है लेकिन कारोबारी जगत महातिर के प्रति नरमी दिखाने के पक्ष में नहीं है। लिहाजा उसने दूसरे देश से तेल मंगवाने के विकल्प पर विचार शुरू कर दिया है। इससे हर साल मलेशिया के सरकारी खजाने को भारी नुकसान होगा।

इस संबंध में खाद्य तेल उद्योग संगठन के एक अधिकारी कहते हैं कि हमारे लिए देश पहले आता है और कारोबारी संबंध में बाद में। मलेशिया के प्रधानमंत्री ने कश्मीर मामले पर भारत-विरोधी बयान दिया है। ऐसे में कारोबारियों ने उनके देश से पाम तेल आयात के सौदों पर ब्रेक लगा दिया है।

इंडोनेशिया से आयात
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मलेशिया से पाम तेल का सबसे बड़ा खरीदार भारत है। उन्होंने बताया कि अगर भारतीय कारोबारी मलेशिया से तेल सौदा बंद करते हैं तो भी उनके व्यवसाय पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, चूंकि इस स्थिति में वे इंडोनेशिया से तेल मंगवा सकते हैं।

क्या कर सकती है सरकार?
अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार के सामने विकल्प है कि वह मलेशिया से होने वाले पाम तेल आयात पर शुल्क बढ़ाए या कोटा निर्धारित करे। हालांकि ऐसे कदम उठाने के लिए उसे विश्व व्यापार संगठन के नियमों को भी ध्यान में रखना होगा।

पिछले माह मलेशिया के रिफाइंड पाम तेल को मलेशिया-भारत आर्थिक सहयोग समझौते के अंतर्गत तरजीही सूची से हटाने के बाद वहां से आयात शुल्क 45 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया। अगर भारत इंडोनेशिया से पाम तेल आयात करेगा तो वहां भी 50 प्रतिशत शुल्क चुकाना होगा।

मलेशिया के सामने कड़ी चुनौती
इस प्रकार भारत को कोई नुकसान नहीं है लेकिन मलेशिया के तेल कारोबार के सामने चुनौती पैदा हो सकती है। विश्लेषक कहते हैं कि इंडोनेशिया से भारत के अच्छे संबंध हैं। ऐसे में भारतीय कारोबारी वहां से पाम तेल आयात करना पसंद करेंगे। बाजार में इस बात को लेकर चर्चा है कि सरकार भी इस दिशा में कोई ठोस कदम उठा सकती है।