हरियाणा के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर
हरियाणा के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर

कांग्रेस नेताओं को हो रहा अहसास, अशोक तंवर की नाराजगी पहुंचा सकती है नुकसान

चंडीगढ़/दक्षिण भारत। हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के पार्टी छोड़ने के बाद अब आरोप-प्रत्यारोप की बौछार शुरू हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने इस मामले पर टिप्पणी की और अशोक तंवर के इस्तीफे को पार्टी के लिए नुकसानदेह बताया।

सुरजेवाला ने कहा कि यदि एक भी साथी छोड़कर जाता है तो इससे नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि तंवर लंबे समय तक प्रदेशाध्यक्ष रहे। इस दौरान वैचारिक मतभेद, मनभेद में तब्दील हो गया। उन्होंने नए सिरे से बात कर पार्टी में दोबारा समायोजन की जरूरत पर जोर दिया। एक साक्षात्कार में उन्होंने कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा की यह जिम्मेदारी बताई।

खुलकर सामने आए मतभेद
गौरतलब है कि हरियाणा कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं के मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ पूरी ताकत लगाएंगे। इसके बाद से पार्टी नेतृत्व उलझन में है।

तंवर ने आरोप लगाया था कि पार्टी को खत्म करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राहुल गांधी के करीबियों की ‘राजनीतिक हत्या’ की जा रही है। तंवर के मुताबिक, मौजूदा समय में कांग्रेस अपने राजनीतिक विरोधियों के कारण नहीं, बल्कि आपसी अंतर्विरोधों के चलते अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जमीन से उठे और किसी बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक नहीं रखने वाले मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।

कभी थे ‘अपने’, अब रच रहे चक्रव्यूह
वहीं, कांग्रेस को अ​लविदा कहने के बाद तंवर ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि कांग्रेस हरियाणा की 90 सीटों में से पांच से ज्यादा पर जीत हासिल न कर पाए। एक रिपोर्ट के अनुसार, तंवर की योजना है कि हरियाणा के हर निर्वाचन क्षेत्र में किसी भी पार्टी के प्रत्याशी या निर्दलीय को समर्थन दिया जाए। इसके पीछे यह रणनीति है​ कि कांग्रेस के मतों का बिखराव हो और उसके प्रत्याशी ‘चक्रव्यूह’ में इस कदर घिर जाएं कि जीत किसी और के खाते में चली जाए।