राहुल गांधी, सोनिया गांधी एवं प्रियंका वाड्रा
राहुल गांधी, सोनिया गांधी एवं प्रियंका वाड्रा

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। केंद्र सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका वाड्रा की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला किया है, जिसके बाद उनकी पार्टी की ओर से आपत्ति जता जा रही है। दरअसल केंद्र सरकार ने इनसे एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया है। इस कदम के बाद तीनों को जेड प्लस सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी और सीआरपीएफ के कमांडो तैनात होंगे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में गांधी परिवार की सुरक्षा को लेकर उक्त फैसला हुआ। वहीं, कांग्रेस ने इस कदम का विरोध किया। इस संबंध में टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। वहीं, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि एसपीजी सुरक्षा वापस ले कर सरकार सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को मिली एसपीजी सुरक्षा भी पिछले दिनों हटा दी गई। परिणामस्वरूप अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास एसपीजी सुरक्षा है।

ऐसे अस्तित्व में आया एसपीजी कानून
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों के मद्देनजर साल 1985 में एसपीजी का गठन किया गया था। इसके करीब तीन साल बाद यानी 1988 में संबंधित कानून संसद से पारित हुआ। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्रियों को एसपीजी सुरक्षा नहीं दी जाती थी। साल 1989 में तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली।

साल 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद एक बार फिर इस पर बहस शुरू हो गई और एसपीजी कानून में संशोधन हुआ। इसमें यह प्रावधान किया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री (और उनके परिजन) को इस पद से हटने के 10 साल तक एसपीजी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय 2003 में इसमें फिर संशोधन किया गया। इसके तहत पूर्व प्रधानमंत्री को पद से हटने के एक साल तक ही एसपीजी सुरक्षा मिलेगी। तत्कालीन सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्रियों नरसिम्हा राव, एचडी देवेगौड़ा और इंद्रकुमार गुजराल को दी गई एसपीजी सुरक्षा भी वापस ले ली थी। एसपीजी सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं।