राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला
राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला

अयोध्या/भाषा। अयोध्या में धारा-144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि निषेधाज्ञा 10 दिसंबर तक लागू रहेगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2014 के फैसले के खिलाफ शीर्ष न्यायालय 14 अपीलों पर सुनवाई कर रहा है।

पीठ ने इस मामले में न्यायालय की कार्यवाही पूरी करने की समय सीमा की समीक्षा की थी। इसके लिए 17 अक्टूबर की सीमा तय की है। निषेधाज्ञा का आदेश अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट करते हुए जिला मजिस्ट्रेट अनुज कुमार झा ने कहा, अयोध्या और यहां आने वालों की सुरक्षा तथा संरक्षा को ध्यान में रखते हुए आदेश जारी किया गया है।

उन्होंने आगे कहा है, मैं यह भी कहना चाहूंगा कि 31 अगस्त, 2019 से यहां एक और आदेश लागू है जो गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने और अवांछित गतिविधियों के बारे में है। 12 अक्टूबर, 2019 को जारी आदेश उन बिंदुओं के सिलसिले में है जो पूर्व के आदेश में नहीं थे।

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने भी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की मांग की है। झा ने बताया कि आदेश में ड्रोन आदि से अयोध्या के अंदर शूटिंग करने या फिल्म बनाने पर भी रोक लगाई गई है। दीपावली के अवसर पर मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पटाखों की खरीदी या बिक्री की इजाजत नहीं होगी।

धारा-144 के तहत चार या अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक होती है तथा पुलिस पर दंगा फैलाने के आरोप में मामला दर्ज करने का अधिकार होता है। दशहरा की हफ्तेभर की छुट्टी के बाद उच्चतम न्यायालय में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई सोमवार को अंतिम चरण में प्रवेश कर गई और न्यायालय की संविधान पीठ 38 वें दिन इस मामले की सुनवाई कर रही है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस जटिल मुद्दे का सौहार्दपूर्ण हल निकालने के लिये मध्यस्थता प्रक्रिया के नाकाम होने के बाद मामले में छह अगस्त से प्रतिदिन की कार्यवाही शुरू की थी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2014 के फैसले के खिलाफ शीर्ष न्यायालय 14 अपीलों पर सुनवाई कर रहा है। उच्च न्यायालय ने अयोध्या की 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षों… सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा तथा राम लला के बीच बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था।

पीठ ने इस मामले में न्यायालय की कार्यवाही पूरी करने की समय सीमा की समीक्षा की थी और इसके लिए 17 अक्टूबर की सीमा तय की है। पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायामूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एसए नजीर भी शामिल हैं।

न्यायालय ने अंतिम चरण की दलीलों के लिये कार्यक्रम निर्धारित करते हुए कहा था कि मुस्लिम पक्ष 14 अक्टूबर तक अपनी दलीलें पूरी करेंगे और इसके बाद हिंदू पक्षकारों को अपना प्रत्युत्तर पूरा करने के लिए 16 अक्टूबर तक दो दिन का समय दिया जाएगा।

इस मामले में 17 नवंबर तक फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है। इसी दिन प्रधान न्यायाधीश गोगोई सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अयोध्या मामले का मध्यस्थता के माध्यम से सर्वमान्य समाधान खोजने का प्रयास विफल हो जाने के बाद संविधान पीठ से छह अगस्त से इन अपीलों पर रोजना सुनवाई कर रही है।