ले. जनरल उल्हास किरपेकर ने सेना के दक्षिण भारत क्षेत्र के जीओसी का पदभार संभाला

देश की सेवा में बलिदान देने वालों योद्धाओं के प्रति सेना की अटूट श्रद्धा को दोहराया

विक्ट्री वॉर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यभार ग्रहण किया

चेन्नई/दक्षिण भारत। लेफ्टिनेंट जनरल उल्हास किरपेकर ने भारतीय सेना के दक्षिण भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) का पदभार संभाला है। उन्होंने विक्ट्री वॉर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने देश की सेवा में बलिदान देने वालों योद्धाओं के प्रति सेना की अटूट श्रद्धा को दोहराया।

दिसंबर 1989 में कॉर्प्स ऑफ़ सिग्नल्स में कमीशन हुए लेफ्टिनेंट जनरल उल्हास किरपेकर दूसरी पीढ़ी के सिग्नल्स ऑफ़िसर और नेशनल डिफेंस एकेडमी के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, सीनियर कमांड, हायर कमांड और नेशनल डिफेंस कॉलेज के कोर्स किए हैं।

उन्होंने आईआईटी, कानपुर से कंप्यूटर साइंस में एमटेक और अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल से इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर में एमएस की डिग्री हासिल की है। जनरल ऑफिसर को अलग-अलग तरह के ऑपरेशनल माहौल और कई इलाकों में सेवा करने का अनुभव है। वे पूर्वी सेक्टर में माउंटेन डिवीज़न सिग्नल रेजिमेंट और एक विशेष इंटेलिजेंस यूनिट की कमान संभाल चुके हैं।

जनरल ऑफिसर ने कई अहम पदों, जैसे कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशन्स, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स, लद्दाख क्षेत्र में एक कॉर्प्स हेडक्वार्टर में चीफ सिग्नल ऑफिसर, ईस्टर्न कमांड में चीफ सिग्नल ऑफिसर पर काम किया है। उन्होंने मिलिट्री कॉलेज ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, महू और डिफेंस सर्विसेज़ स्टाफ़ कॉलेज, वेलिंगटन में इंस्ट्रक्टर के तौर पर भी काम किया है।

लेफ्टिनेंट जनरल उल्हास किरपेकर विशिष्ट सेना मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित अधिकारी हैं। उन्हें एक दिसंबर, 2024 को कॉर्प्स ऑफ़ सिग्नल्स का 72वां कर्नल कमांडेंट नियुक्त किया गया था।

दक्षिण भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के तौर पर, लेफ्टिनेंट जनरल उल्हास किरपेकर इस फॉर्मेशन की ऑपरेशनल, लॉजिस्टिकल, प्रशासनिक और कल्याण से जुड़ीं जिम्मेदारियां संभालेंगे। साथ ही, वे इस क्षेत्र में नागरिक प्रशासन, पूर्व सैनिकों, युवाओं और आम लोगों के साथ सेना के जुड़ाव को और मजबूत करेंगे।

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