चेन्नई/दक्षिण भारत। भारतीय सेना के दक्षिण भारत क्षेत्र मुख्यालय के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल वी श्रीहरि ने सोमवार को अपनी सेवानिवृत्ति पर कमान सौंपी। इसके साथ ही, लगभग चार दशकों तक चला उनका शानदार सैन्य सफर पूरा हुआ।
अपनी विदाई के मौके पर, लेफ्टिनेंट जनरल श्रीहरि ने चेन्नई के विक्ट्री वॉर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की और देश की सेवा में बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को नमन किया। जून 1987 में 16 सिक्ख लाइट इन्फैंट्री में कमीशन होने के बाद, लेफ्टिनेंट जनरल श्रीहरि ने स्वेच्छा से पैराशूट रेजिमेंट की स्पेशल फोर्सेज में शामिल होने का विकल्प चुना था।
उन्होंने कई तरह की चुनौतीपूर्ण कमांड, स्टाफ़ और इंस्ट्रक्शनल पदों पर काम किया और अलग-अलग इलाकों व क्षेत्रों में ऑपरेशनल अनुभव हासिल किया। वे शौर्य चक्र, सेना मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित हैं।
वर्ष 1977 में सैनिक स्कूल, अमरावती नगर के एक छात्र से लेकर दक्षिण भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग बनने तक का उनका सफ़र अनुशासन, लगन, पेशेवर उत्कृष्टता और सेवा के प्रति अटूट समर्पण का शानदार उदाहरण है।
दक्षिण भारत क्षेत्र के जीओसी के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, लेफ्टिनेंट जनरल श्रीहरि ने सशस्त्र बलों और आम लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर खास ज़ोर दिया। उन्होंने नागरिक-सैन्य तालमेल, युवाओं की भागीदारी, सैन्य विरासत, यादों को संजोने और आम लोगों तक पहुंचने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया।
उनके कार्यकाल का एक मुख्य फोकस चेन्नई के विक्ट्री वॉर मेमोरियल में लोगों की भागीदारी को बढ़ाना था। उनके नेतृत्व में, मेमोरियल को यादों, सैन्य विरासत और जन-शिक्षा के एक जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई पहल की गईं। टी-55 टैंक और नौसेना के विक्रांत व अंजादीप जैसे जहाजों के मॉडल समेत सैन्य साजो-सामान की प्रदर्शनी और भारत की सैन्य विरासत को दिखाने वाली अन्य पहलों ने आम जनता और सशस्त्र बलों के बीच जुड़ाव को नया आयाम दिया।
विक्ट्री वॉर मेमोरियल में खास तौर पर तैयार किए गए लाइट एंड साउंड शो शुरू किए गए, जिनमें तमिल सबटाइटल भी थे, ताकि समाज का एक बड़ा वर्ग भारत के सैन्य इतिहास, परंपराओं और मूल्यों से जुड़ सके। इस पहल ने नागरिकों, खासकर युवा पीढ़ी के लिए, भारत के सैनिकों के बलिदान को समझने और सशस्त्र बलों के प्रति गहरी समझ और सम्मान विकसित करने का एक शानदार मंच दिया।
उनके नेतृत्व में चलाए गए आउटरीच कार्यक्रमों ने सशस्त्र बलों को स्कूल और कॉलेज के छात्रों, एनसीसी कैडेट्स, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों, शहीद सैनिकों के परिवारों, पर्यटकों और आम जनता के करीब ला दिया। इन कार्यक्रमों से नागरिकों को सेना के मौजूदा और पूर्व सैनिकों से बातचीत करने, सशस्त्र बलों के बलिदानों को सराहने और भारत की सैन्य विरासत व परंपराओं को समझने का मौका मिला।
लेफ्टिनेंट जनरल श्रीहरि ने नागरिक-सैन्य सहयोग और तैयारी को मजबूत करने पर भी काफी जोर दिया। मेडिकल समुदाय, सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों और दूसरे सिविल स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर चलाए गए आउटरीच कार्यक्रम ने आपातकालीन तैयारी, मानवीय सहायता और आपदा राहत, महामारी की तैयारी और बड़े पैमाने पर हताहत होने की स्थिति में प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों में बेहतर तालमेल को बढ़ावा दिया।
उनके कार्यकाल में पूर्व सैनिकों के कल्याण, पुनर्वास और रोज़गार के लिए लगातार प्रयास किए गए। स्किलिंग, रोज़गार और स्वरोज़गार से जुड़ीं पहलों का मकसद पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए ज़्यादा अवसरों का सृजन करना था, ताकि वे अपनी ज़िंदगी में आसानी से आगे बढ़ सकें।
भारतीय सेना के दक्षिण भारत क्षेत्र मुख्यालय के अधिकारियों, जेसीओ, अन्य रैंकों और सिविल कर्मचारियों ने लेफ्टिनेंट जनरल वी श्रीहरि के दूरदर्शी नेतृत्व, पेशेवर मार्गदर्शन और सशस्त्र बलों तथा समाज के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया। दक्षिण भारत क्षेत्र में आम लोगों से जुड़ाव बढ़ाने, शहीद नायकों को याद करने, सैन्य विरासत को बढ़ावा देने और सेना व नागरिकों के बीच तालमेल को मज़बूत करने के लिए उनके कार्यकाल को याद किया जाएगा।
लेफ्टिनेंट जनरल श्रीहरि द्वारा चार दशकों तक की गई सेवा के लिए दक्षिण भारत क्षेत्र परिवार ने उन्हें सलाम किया और उनके तथा उनके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और सुखद जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।