नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कुछ खास किस्म के खतरे सिर उठा रहे हैं। कई लोगों ने इस आपदा में सुनहरे 'अवसर' ढूंढ़ लिए हैं। वे एआई का इस्तेमाल कर अन्य लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। इन दिनों सोशल मीडिया मंचों पर ऐसे वीडियो की भरमार देखने को मिल रही है, जिनमें आधी-अधूरी जानकारी देकर लोगों में अनावश्यक डर पैदा किया जा रहा है। ऐसे वीडियो को तुरंत हटाने के लिए कार्रवाई होनी चाहिए। कुछ सोशल मीडिया चैनल तथ्यों की पुष्टि किए बिना ही जानकारी प्रसारित कर रहे हैं। अगर उनकी बातों पर विश्वास कर बचाव दल वास्तविक जरूरत वाले इलाके के बजाय गलत जगह चले गए तो कौन जिम्मेदार होगा? ऐसे मौकों पर अफवाहें बहुत फैलती हैं। नेपाल के कई नागरिकों की रिश्तेदारी भारत में है। जब यहां लोग सुनते हैं कि 'नेपाल में कोई बांध टूट गया, पुल बह गया, कोई शहर जलमग्न हो गया और निकलने का रास्ता ही नहीं बचा', तो उनकी चिंता बढ़ जाती है। कुछ सोशल मीडिया चैनल अति-उत्साह के कारण यह दावा करने से बाज नहीं आ रहे कि भारत पर भी ऐसा खतरा मंडरा रहा है। इससे सीमावर्ती इलाकों में कैसा संदेश जाएगा? झूठ को हथियार बनाने का धंधा बहुत पुराना है। पहले भी कई मौकों पर यह पैंतरा आजमाया गया है। अब नेपाल के मामले में यही हो रहा है। ऐसे लोग किसी अन्य देश की बाढ़ का पुराना वीडियो यह कहकर प्रसारित कर रहे हैं कि पड़ोसी देश में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों की निजता का सम्मान करना चाहिए। कुछ लोगों को इस बात की परवाह नहीं है कि वे जिस वीडियो को अपने चैनल पर पोस्ट कर रहे हैं, उससे बाढ़ पीड़ितों का दर्द और बढ़ जाएगा। विचलित करने वाले दृश्यों के वीडियो प्रसारित नहीं करने चाहिएं। किसी के दु:ख में सनसनीखेज सामग्री नहीं ढूंढ़नी चाहिए।
साइबर ठग भी बाढ़ पीड़ितों के परिजनों को लूटने की फिराक में हैं। वे ऐसे मौकों पर ठगी के नए तरीके ढूंढ़ लेते हैं। कई लोगों के पास ऐसे संदेश आए हैं, जिनमें साइबर ठगों ने यह दावा किया है कि अगर उन्हें धनराशि भेजी गई तो वे बाढ़ पीड़ितों का पता लगाने, उनकी मदद करने और सुरक्षित जगह तक पहुंचाने में मदद करेंगे। ऐसे दावे जून 2013 में केदारनाथ धाम में आई प्राकृतिक आपदा के समय भी किए गए थे। उस समय साइबर ठगों ने कई लोगों को यह कहते हुए झांसा दिया था कि 'हमने आपके परिजन को देखा है, उनकी मदद के लिए रुपए भेजिए।' कोरोना काल में साइबर ठगों ने शहरों से दूर-दराज के इलाकों की ओर जा रहे कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया था। नेपाल त्रासदी में साइबर ठग ऐसे दावे कर सकते हैं, जिनसे सबको सतर्क रहना चाहिए- 'काठमांडू समेत पूरे नेपाल में हमारी जान-पहचान है, हम आपके परिजन को ढूंढ़ सकते हैं ... कृपया आधार कार्ड और पासपोर्ट की फोटो भेजिए, ताकि लोकेशन मालूम करें ... हमें राहत शिविर में एक व्यक्ति मिला है, जिसकी शक्ल आपके परिजन/रिश्तेदार से मिलती है, अगर उसके बारे में ज्यादा जानकारी चाहिए तो रुपए भेजिए ... हमने वाहन/हेलीकॉप्टर बुला लिया है, आप तुरंत किराया भेजिए ... वाहन खराब हो गया है, उसे ठीक कराने के लिए अभी रुपए भेजिए ... सीमा पर आपके परिजन को रोका गया है, मदद के लिए तुरंत रुपए भेजिए ... आपके परिजन का फोन काम नहीं कर रहा है, उनसे बात कराने के लिए शुल्क भेजिए ... हमने व्यक्ति को सुरक्षित निकाल लिया है, अब आप दवाइयों और कपड़ों के लिए रुपए भेजिए ... लापता लोगों की सूची में नाम दर्ज कराने के लिए शुल्क दीजिए।' साइबर ठगों की चाल से सावधान रहें। सरकार द्वारा जारी की गई जानकारी पर ही विश्वास करें।