नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत... यह अभियान इस समय पूरे देश में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका लक्ष्य बिलकुल साफ है- नशामुक्त युवा, ड्र्रग फ्री इंडिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल 'सूर्यपथ तिरंगा' के जरिए हमारा तिरंगा दुनिया-भर की एक अनोखी यात्रा पर निकला। फिजी के सुवा में सूरज की पहली किरण के साथ तिरंगा फहराया गया। इसके बाद एशिया, अफ्रीका, यूरोप और फिर अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को तक भारतीय मिशन और पोस्ट्स पर तिरंगा लहराता गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लाखों माताओं-बहनों को 'पीएम स्वनिधि योजना' से नई ताकत मिल रही है। 'महिला सशक्तीकरण' के इस पहलू की उतनी चर्चा नहीं होती, जितनी होनी चाहिए। 'पीएम स्वनिधि योजना' की लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। यानी देशभर में लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक गांव है- पटवाई। वहां आकाश और रोहन नाम के दो दोस्तों ने देखा कि उनके आसपास का इलाका गंदगी से भर गया है। बस, फिर क्या था, आकाश और रोहन ने कचरे के बैग उठाए और सफाई के लिए निकल पड़े। धीरे-धीरे दूसरे युवा भी उनके साथ जुड़ने लगे। एक टीम भी बन गई, जिसका नाम है-'क्लीन-अप पटवाई'। ये युवा अब तक चार गंगा घाटों को साफ कर चुके हैं। एक टन से अधिक प्लास्टिक कचरा हटा चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार अमरनाथजी की यात्रा में भी, स्वच्छता और जनभागीदारी की ऐसी ही प्रेरक तस्वीर देखने को मिली। कठिन रास्तों पर, हजारों स्वच्छताकर्मी दिन-रात सेवा में जुटे रहे। इस वर्ष यात्रा के दौरान, 400 मीट्रिक टन से ज्यादा कचरे को कलेक्ट और प्रोसेस किया। स्वच्छता के इस अभियान में श्रद्धालु भी भागीदार बने। 16 हजार से अधिक यात्रियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी-कभी हमारा एक छोटा-सा शौक, जीवन में एक बड़ी संभावना का रास्ता खोल देता है। नागालैंड के 'फेक' जिले की वेसालु पुरो की यात्रा भी कुछ ऐसी ही है। वेसालु किसान परिवार में पली-बढ़ीं। बचपन से उन्होंने अपने माता-पिता को खेती करते देखा था और उन्हें खुद फूलों से बहुत लगाव था। साल 2021 में उन्होंने इसी शौक के साथ छोटे स्तर पर फूल उगाने की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने इसमें एस संभावना दिखाई देने लगी और उन्होंने अपने इस शौक को आगे बढ़ाने का फैसला लिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा के देबरीगढ़ में एक गांव है 'धोड़रोकुसुम'। कुछ साल पहले तक इस गांव की मैथिली भुए लगभग हर दिन जंगल जाती थीं। कभी जलावन की लकड़ी लेने, कभी महुआ और केंदु पत्ता चुनने, तो कभी बांस की कोपलें और दूसरी वन उपज लाने। मैथिली के जीवन में आए इस बदलाव ने दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 60 से अधिक महिलाएं जंगल के संरक्षण में जुड़ चुकी हैं। कोई वन्य जीवों की सुरक्षा का दायित्व संभाल रही हैं, कोई घास के मैदानों के विकास से जुड़ी हैं, तो कुछ महिलाएं इको-टूरिज़्म गतिविधियों में योगदान दे रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मिशन शक्तिसैट के माध्यम से 108 देशों की 12 हजार छात्राओं को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी सीखने और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। 23 अगस्त, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर इस मिशन की एक सुंदर तस्वीर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में देखने को मिली।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश में कडपा के वरदराज का उदाहरण है। वे कई वर्षों से अपने खेत में टमाटर और केले की खेती कर रहे थे। एक दिन उन्होंने अपने दोस्तों के फार्म में एवोकाडो की फसल देखी। इसके बाद उन्होंने यूट्यूब से इस पर जानकारी जुटाई। अब तक वे करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं। आज वे सीधे स्थानीय दुकानों को इसकी सप्लाई कर रहे हैं।