नई दिल्ली/दक्षिण भारत। आतंकवाद-रोधी मामलों के निपटारे की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सरकार ने संबंधित उच्च न्यायालयों के साथ सलाह-मशविरे के बाद आंध्र प्रदेश, राजस्थान और बिहार के लिए तीन नए एनआईए विशेष न्यायालय बनाए हैं।
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एक्ट, 2008 (2008 का 34) की धारा 11 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, केंद्र सरकार ने राजस्थान, पटना और आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से सलाह-मशविरा करके जयपुर, पटना और विशाखापत्तनम में मौजूद विशेष न्यायालय को क्रमशः विशेष एनआईए न्यायालय के तौर पर नामित किया है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक गैज़ेट नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये न्यायालय खास तौर पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की ओर से जांच किए गए 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (तय अपराधों) के ट्रायल के लिए होंगी और इनके पास 'गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम' (यूएपीए) से जुड़े मामलों के लिए राज्य-स्तर का अधिकार क्षेत्र होगा।
16 दिसंबर, 2025 को केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि मुक़दमे की तेज़ी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए वह हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश में एक समर्पित एनआईए न्यायालय बनाएगी, और जिन जगहों पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत 10 से ज़्यादा मामले हैं, वहां एक से ज़्यादा न्यायालय स्थापित करेगी।
फरवरी में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उच्चतम न्यायालय के सामने एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया कि मंत्रालय ने उन राज्यों में विशेष न्यायालय बनाने का प्रस्ताव रखा है, जहां नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) द्वारा जांच किए गए 10 या उससे ज़्यादा मामलों की सुनवाई लंबित है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार हर विशेष न्यायालय के लिए एक बार होने वाले खर्च के लिए एक करोड़ रुपए की ग्रांट और हर साल होने वाले खर्च के लिए हर साल एक करोड़ रुपए देगी।
रिपोर्ट में कहा गया था कि इन फंड्स का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर के नवीनीकरण, आईटी इक्विपमेंट, गाड़ियों और स्टाफ़ की सैलरी के लिए किया जाएगा।