नई दिल्ली/दक्षिण भारत। सरकार राष्ट्रीय राजधानी में 35 रुपए प्रति किलो की सब्सिडी वाली दर पर प्याज़ बेचेगी। यह दर मौजूदा औसत खुदरा कीमत से लगभग 36 प्रतिशत कम है। इसके लिए बुधवार को पहली 'कांदा एक्सप्रेस' से 800 टन ताज़ी सब्ज़ियां यहां पहुंचेंगी।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार स्टोर के ज़रिए प्याज़ बेचा जाएगा।
उन्होंने एक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बताया कि बड़ी मात्रा में प्याज़ को खास रेलवे रेक के ज़रिए चार अन्य केंद्रों - चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी - तक भी पहुंचाया जा रहा है। इन खपत वाले केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा प्याज़, महाराष्ट्र के नासिक में रखा गया बफ़र स्टॉक है। कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए इस स्टॉक को जारी किया जा रहा है।
मंत्रालय के डेटा से पता चलता है कि 24 अगस्त को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत एक साल पहले के 27.37 रु. प्रति किलोग्राम से 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रु. प्रति किलोग्राम हो गई। औसत थोक कीमत 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रु. प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 21.23 रु. प्रति किलोग्राम थी।
सोमवार को प्रमुख शहरों में प्याज की खुदरा कीमत चेन्नई में 60 रु. प्रति किलो (एक साल पहले 33 रु.), दिल्ली में 55 रु. प्रति किलो (35 रु.) और कोलकाता में 53 रु. प्रति किलो थी।
बड़े पैमाने पर प्याज़ की ढुलाई के लिए लॉजिस्टिक्स की क्षमता बढ़ाने के मकसद से 'कांदा एक्सप्रेस' पहल वर्ष 2024-25 में शुरू की गई थी और तब से इसे काफ़ी बढ़ाया गया है।
वर्ष 2024-25 में, लगभग 12,000 टन प्याज का बफर स्टॉक लेकर 14 रेलवे रैक पांच शहरों में भेजे गए थे। वर्ष 2025-26 में, यह संख्या बढ़कर 86 रैक हो गई है, जिनसे देशभर के 16 बड़े शहरों में लगभग 88,000 टन प्याज पहुंचाया गया।
प्याज का बफ़र स्टॉक केंद्र सरकार का एक रणनीतिक रिज़र्व है, जिसे मुख्य रूप से आपूर्ति कम होने पर कीमतों में अचानक उछाल से बाज़ार को बचाने के लिए बनाया गया है। सरकार 'प्राइस स्टेबलाइज़ेशन फंड' योजना के तहत अलग-अलग उत्पादक राज्यों में प्याज का स्टॉक रखती है।