अरुणाचल प्रदेश की एक बच्ची का वायरल वीडियो, जिसमें वह निवेदन करती है कि 'कृपया हमें चीनी न कहें, हम भारतीय हैं', उस नस्लीय भेदभाव से उपजे दर्द को बयान करता है, जिस पर अब खुलकर बात होनी चाहिए। अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के सभी लोग सम्मानित भारतीय नागरिक हैं, हमारे भाई-बहन हैं। उनके साथ कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा अपमानजनक व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है। जो व्यक्ति खुद भारतीय है, जिसके माता-पिता भारतीय हैं, जिसके पूर्वज भारतीय थे, जिसका पूरा परिवार भारतीय है, जो लोग इस देश की एकता एवं अखंडता में विश्वास रखते हैं, जो हर युद्ध एवं आपदा के समय इस देश के साथ खड़े रहे हैं, जो चीन की ज्यादती और विस्तारवादी नीति का विरोध करते हैं, जब उन्हें चीनी कहकर संबोधित किया जाएगा तो कैसा लगेगा? ऐसा कहने वाले शख्स की ज़बान खंजर की तरह चुभेगी। अपने देशवासियों को चीनी कहकर संबोधित करना बहुत शर्मनाक, घोर अपमानजनक एवं अत्यंत निंदनीय है। जब हमारे देश के लोग ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी जैसे देशों में जाते हैं और वहां कोई व्यक्ति उन्हें भूलवश अन्य देश का नागरिक समझ लेता है तो बहुत बुरा लगता है। विदेशी व्यक्ति को हमें पहचानने में गलतफ़हमी हो सकती है, लेकिन हम अपने ही देशवासी भाइयों-बहनों को जानबूझकर किसी ऐसे देश के साथ जोड़कर संबोधित करें, जो हमसे दुश्मनी रखता है, तो यह अक्षम्य है। पूर्वोत्तर के निवासी जब देश के अन्य इलाकों में जाते हैं तो कुछ शरारती तत्त्व उन्हें अभद्र शब्दों से संबोधित करते हैं। कोरोना काल में ऐसी घटनाएं सोशल मीडिया पर बहुत चर्चा में रही थीं, जब कुछ लोगों ने पूर्वोत्तर के निवासियों के बारे में ओछी बातें कही थीं। हमें इन भाइयों-बहनों की तकलीफ समझनी होगी। साथ ही, गलत हरकत करने वालों को चेतावनी देनी होगी।
पूर्वोत्तर के निवासियों से अक्सर ऐसे सवाल पूछे जाते हैं, जो उन्हें असहज कर देते हैं। लद्दाख के निवासियों को भी इन सवालों के जरिए परेशान किया जाता है। कुछ लोगों को लगता है कि चीन में इनकी रिश्तेदारी है। इनसे पूछा जाता है- क्या आप कभी चीन गए हैं? इनके बच्चों से कई ऑटोरिक्शा वाले ज्यादा किराया वसूलते हैं। इन्हें आसानी से मकान किराए पर नहीं मिलता है। जब मनचले, निर्लज्ज और उद्दंड किस्म के लोग अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर इनके नजदीक से गुजरते हैं तो अश्लील किस्म का ठहाका लगाते हुए अभद्र शब्द बोलते हैं। जब पूर्वोत्तर के निवासी अपने गृहराज्यों में जाते हैं तो क्या करते हैं? वे 'भारत माता की जय' बोलते हैं। वे 'जय हिंद' का नारा लगाते हैं। वे तिरंगे को सलाम करते हैं। वर्ष 1962 में, जब चीन ने भारत पर हमला किया था, तब लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक के निवासी हमारे सैनिकों के साथ एक मजबूत दीवार बनकर खड़े हो गए थे। उन्होंने कई मोर्चों पर सेना तक जंगी साजो-सामान और खुफिया सूचनाएं पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ये लोग भारत के सच्चे प्रहरी हैं। जो व्यक्ति इन्हें, खासकर अरुणाचल के निवासियों को चीन के साथ जोड़कर संबोधित करता है, उसे मालूम होना चाहिए कि चीन भी अरुणाचल को 'दक्षिण तिब्बत' कहकर इस पर अपना अवैध दावा जताता है। क्या यह हरकत चीन के सुर में सुर मिलाने जैसी नहीं है? चीनी एजेंसियां भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए मौके ढूंढ़ती हैं। क्या हमारे ही कुछ लोग अपनी नादानी और असावधानी के कारण दुश्मन को मौका नहीं दे रहे हैं? सरकार को इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। ईश्वर ऐसे लोगों को सद्बुद्धि दे।