मासूम बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है: मायावती

मायावती ने जेन-अल्फा पर की टिप्पणी

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लखनऊ/दक्षिण भारत। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को कहा कि जेन-अल्फा अर्थात् सन् 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में भी ख़ासकर अपने थोड़े 'अच्छे दिन’ की उम्मीद लगाए स्कूली छात्र-छात्राएं और उनके माता-पिता भी सुखी भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा को लेकर हमेशा चिंतित ही नहीं, बल्कि उसके लिए लगातार काफी जद्दोजहद भी करते रहे हैं, किंतु देशभर में और विशेषकर उप्र एवं उत्तर भारत के राज्यों के स्कूलों के बदतर हालत की कड़वी ज़मीनी हक़ीक़त के कारण वे लोग अति-मुखर हो गए हैं।

मायावती ने कहा कि वे लोग जेन-जी अर्थात् कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी 'स्कूल ठीक करो’ अभियान में काफी बढ़-चढ़ कर व पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। किंतु यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने व पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा के लिए बुनियादी सुविधाओं के लिए भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

मायावती ने कहा कि वैसे डॉ. भीमराव अंबेडकर के 'शिक्षित बनो’ आह्वान के कारण शिक्षा में भी ख़ासकर स्कूली शिक्षा 'बहुजन समाज’ के लोगों के लिए हमेशा विशेष चिंता की बात रही है, और इसी के तहत हमारी पार्टी बसपा ने इन दबे-कुचले व शोषित-पीड़ित समाज के लोगों की, जिनकी केन्द्र व राज्य में रही सरकारें लगातार उपेक्षा करती रही हैं, उनके हित व कल्याण एवं शिक्षा आदि के लिए उप्र में मेरे नेतृत्व में बसपा की सभी चारों रहीं सरकारों में पूरा-पूरा ध्यान दिया गया, ताकि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी एवं कल्याणकारी भारतीय संविधान के हिसाब से उन सभी परिवार वालों को रोटी-रोजी व शिक्षा-युक्त आत्म-सम्मान का समतामूलक जीवन नसीब हो सके।

मायावती ने कहा कि यह बड़े दुख व चिंता की बात है कि सरकारी स्कूल की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तरफ समुचित ध्यान देने के बजाय सभी सरकारों ने ज़्यादातर इसकी घोर अनदेखी ही की है तथा इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को एक प्रकार से, इन वर्गों के आरक्षण की तरह ही, काफी हद तक निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया हुआ है और इस प्रक्रिया में हज़ारों सरकारी स्कूल बंद भी किए जा रहे हैं, जिसका भी विरोध बसपा ने लगातार किया है और अब स्कूलों के भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी ज़रूरतों की अत्यंत कमी को लेकर नन्हे जेन-अल्फा स्वंय अति-मुखर होने के साथ-साथ अब आंदोलित भी हैं।

मायावती ने कहा कि उप्र सहित अन्य राज्यों की भी सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था संबंधी उनकी ज़रूरतों/मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत व नीति से तत्काल ध्यान देना प्रारंभ करें और उनके विरुद्ध कोई भी सरकार बल का प्रयोग करने से पूरी तरह से बचे तो यह उचित होगा।

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