भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्षों समेत अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति कर आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी की ओर कदम बढ़ा दिया है। इन नियुक्तियों में सामाजिक समीकरणों का भी ध्यान रखा गया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा ने यह संदेश दिया है कि वह अपने वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करती है। वसुंधरा राजे पहले भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रही हैं। वे वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार थीं, लेकिन पार्टी ने भजनलाल शर्मा को कमान सौंपी थी। इससे वसुंधरा खेमे में नाराजगी देखने को मिली थी। पार्टी ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर उनकी प्रासंगिकता को लेकर चल रहीं बहसों पर विराम लगा दिया है। साथ ही, राजपूतों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की है, जिन्होंने यूजीसी की विवादित नियमावली के मुद्दे पर कई जगह विरोध प्रदर्शन किया था। राम माधव लेखक, बुद्धिजीवी और अच्छे वक्ता हैं। उन्होंने वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ भाजपा का गठबंधन कराकर राजनीति के धुरंधरों को चौंका दिया था। राम माधव उत्तर-पूर्व में पार्टी की जड़ें मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। अब वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर भाजपा का विस्तार करेंगे। बैजयंत पांडा अनुभवी राजनेता हैं। वे विभिन्न मंचों पर भाजपा का पक्ष मजबूती से रखते हैं। वे ओडिशा से आते हैं, जहां भाजपा ने पहली बार सरकार बनाई है। बैजयंत पांडा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने से ओडिशा में पार्टी को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
डॉ. मधुचंदा कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा ने प. बंगाल में अपने कार्यकर्ताओं का जोश दुगुना कर दिया है। वहां उसकी सरकार बनने के बाद लिए गए कई फैसले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। वहीं, डॉ. मधुचंदा कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने से कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाएगा कि पार्टी अपने 'वफादार सिपाहियों' को नहीं भूलती है। डॉ. कर छात्र जीवन में एबीवीपी से जुड़ी थीं। भाजपा की बूथ एजेंट रह चुकी हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बावजूद पार्टी की जीत के लिए बहुत मेहनत की थी। पार्टी ने भी बड़ी जिम्मेदारी देकर उन पर भरोसा जताया है। भाजपा में आने के बाद, पिछले एक दशक में डी पुरंदेश्वरी का सियासी कद तेजी से बढ़ा है। वे आंध्र प्रदेश में भाजपा का विस्तार करने वाले प्रमुख चेहरों में से एक हैं। प्रदेशाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी के बाद अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देने से भाजपा को डी पुरंदेश्वरी के अनुभव का लाभ मिलेगा। कर्नाटक के प्रो. एम नागराज का आरएसएस और एबीवीपी से बहुत पुराना जुड़ाव है। वे शिक्षाविद् और संगठन के अनुभवी नेता हैं। उनकी छवि अच्छी है। पार्टी उन पर भरोसा करती है। उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाने के बाद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बना दिया है। उनके सामने कर्नाटक समेत पूरे दक्षिण भारत में भाजपा को मजबूत करने की चुनौती होगी। पार्टी ने उत्तर प्रदेश से दो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष - रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर - बनाकर ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया है। लोकसभा को सबसे ज्यादा सांसद देने वाले उप्र में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है, लिहाजा यहां से दो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना उचित फैसला है। बादल परिवार से अलग होकर अपनी सियासी जमीन तलाशने वाले मनप्रीत सिंह पंजाब के बड़े सिक्ख नेता हैं। वे अपने भाषणों में महान दार्शनिकों की बातों का जिक्र करने के लिए जाने जाते हैं। आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी, क्योंकि भाजपा, शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन करने के बजाय अपने दम पर आगे बढ़ने की बात कह चुकी है। इसी तरह, वर्षाबेन दोशी (गुजरात), डॉ. भारती पवार (महाराष्ट्र) और लाल सिंह आर्य (मध्य प्रदेश) को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर उनकी मेहनत, समर्पण और अनुभव का सम्मान किया है। भाजपा की 'नवीन' टीम कितना कमाल दिखाएगी? यह समय ही बताएगा।