एनटीए के नेतृत्व को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए: राहुल गांधी

'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा पहला कदम था, आखिरी नहीं'

Photo: rahulgandhi FB Page

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि एनटीए के नेतृत्व को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, 'मोदीजी, देखिए आपकी एनटीए ने अभी क्या किया है।'

राहुल गांधी ने लिखा, 'सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स के लिए यूजीसी-नेट परीक्षाएं 22 से 30 जून के बीच आयोजित की गई थीं। लगभग दो महीने बाद, एनटीए ने इन तीनों परीक्षाओं को रद्द कर दिया है, क्योंकि प्रश्न-पत्रों में गलतियां थीं और पुराने सवालों को दोहराया गया था।'

राहुल गांधी ने लिखा, 'हज़ारों उम्मीदवार जिन्होंने सालों तक तैयारी की, फ़ॉर्म भरे, फ़ीस जमा की और दूर-दराज़ के सेंटर्स तक का सफ़र किया, उन्हें अब सितंबर में यह सब फिर से करना होगा। गलती एनटीए की होती है, लेकिन सज़ा छात्र को भुगतनी पड़ती है।'

राहुल गांधी ने लिखा, 'मैंने कोटा, देहरादून और प्रयागराज में भी यही बात कही थी और आगे भी कहता रहूंगा - यह अब कोई शिक्षा प्रणाली नहीं रह गई है। यह तो बस एक 'एक्सट्रैक्शन मशीन' बन गई है। यह आपके पैसे, आपके कीमती साल, आपकी मानसिक सेहत और आपका आत्मविश्वास सब कुछ ले लेती है और बदले में कुछ नहीं देती। यहां तक कि नौकरी भी नहीं।'

राहुल गांधी ने लिखा, 'एनटीए अभी भी असली सवाल का जवाब नहीं दे रही है - क्या ये पेपर परीक्षा से पहले लीक हुए थे? मोदी सरकार के बाकी सभी विभागों की तरह, एनटीए भी कभी यह नहीं मानती कि गलती उसकी है। पेपर लीक के बाकी मामलों की तरह, मुझे पूरा यकीन है कि इसमें भी किसी की जवाबदेही तय नहीं होगी।'

राहुल गांधी ने लिखा, 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा पहला कदम था, आखिरी नहीं। एनटीए के नेतृत्व को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। सितंबर में यह परीक्षा दोबारा देने वाले हर छात्र से - समस्या आप नहीं हैं।'

राहुल गांधी ने लिखा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो ठीक से परीक्षा नहीं करवा सकता और फिर परीक्षा देने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराता है। आपके साल बर्बाद किए जा रहे हैं और जब तक प्रधानमंत्री मोदी इसका जवाब नहीं देते, हम रुकेंगे नहीं।'

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