जयपुर/दक्षिण भारत। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष एवं राजस्थान के पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर अपनी 'नाकामी' को ढकने और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली छिपाने का आरोप लगाया है। हालांकि, जब लोगों ने उनसे अपने कार्यकाल में किए गए कामों का हिसाब मांगा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, 'भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के बजाय अपनी नाकामी को ढकने और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली छिपाने का रास्ता खोजा है।'
उन्होंने लिखा, 'शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता के बजाय स्कूल परिसर में प्रवेश, फोटो व वीडियो पर रोक, और सवाल पूछने वालों पर पहरा लगा दिया है। सवाल यह है कि अगर स्कूलों में सबकुछ ठीक है तो डर कैसा?'
उन्होंने लिखा, 'टूटे भवन, जर्जर कमरों, शिक्षकों की कमी, बच्चों की समस्याओं और सरकारी व्यवस्था की नाकामियों की तस्वीरें सामने आने से आखिर सरकार को इतनी बेचैनी क्यों है?'
उन्होंने लिखा, 'विद्यालय जनता के हैं, भाजपा की निजी संपत्ति नहीं हैं जो मनमाने आदेश थोपे जा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन एवं विकास से जुड़े तंत्र में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और समाज की निगरानी को कमजोर करने वाला कोई भी निर्णय शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के खिलाफ है। नाकामियों पर पर्दा डालने से तस्वीर नहीं बदलेगी!'
गोविंद सिंह डोटासरा की इस सोशल मीडिया पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। एक व्यक्ति ने लिखा, 'जब ये श्रीमान् राजस्थान के शिक्षा मंत्री थे, तब यहां के सरकारी स्कूल कैंब्रिज और ऑक्सफोर्ड को टक्कर देते थे! सरकारी स्कूलों को इस हालत में पहुंचाने के लिए सभी सरकारें ज़िम्मेदार हैं। नेताओं को खामियां तब दिखाई देती हैं, जब वे विपक्ष में होते हैं।'
एक और व्यक्ति ने कहा, 'शिक्षा के मंदिरों की पवित्रता, विद्यार्थियों के भविष्य और पेपर लीक जैसे गंभीर विषयों पर उपदेश देने से पहले अपने राजनीतिक अतीत का हिसाब देना चाहिए। जिनके कार्यकाल में परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए, उनके लिए आज शिक्षा पर भाषण देना आसान है, लेकिन राजस्थान का युवा सवाल पूछ रहा है- पहले जवाब, फिर ज्ञान। शिक्षा व्यवस्था भाषणों से नहीं, ईमानदार व्यवस्था और जवाबदेही से मजबूत होती है।'