प्रधानमंत्री ने लालकिले से किया आह्वान- 'हमें बड़े सपने देखने हैं'

80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास से मना रहे देशवासी

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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजघाट पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने लालकिले पर तिरंगा फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हर दिल की धड़कन 'वंदे मातरम्' के नाद से गूंज रही है। आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है। देश उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर आज आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज उन महान सपूतों का पुण्य स्मरण करता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए त्याग और बलिदान की पराकाष्ठा की थी। अपने तप, त्याग और बलिदान से आजादी के एकमात्र लक्ष्य को लेकर अपनी पूरी जिंदगी खपा दी थी। पूज्य बापू समेत सभी स्वतंत्रता सेनानियों को, बलिदान की महान परंपरा जगाने वाले महान क्रांतिकारियों को आज मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जो इस समारोह में उपस्थित हैं, उन सबके लिए एक ऐतिहासिक पल भी है। आजादी के बाद, 15 अगस्त को लाल किले पर पहली बार 'वंदे मातरम्' गूंज रहा है। आज जब हम 'वंदे मातरम्' का 150वां वर्ष मना रहे हैं तो इससे बड़ा और उत्तम अवसर और क्या हो सकता है!

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ का प्रकोप रहा, भू-स्खलन का प्रकोप रहा, अनेक परिवार प्रभावित हुए। उनके दुःख-दर्द को हम भलीभांति अनुभव करते हैं। पीड़ित परिवारों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हम और पूरा देश उनके साथ खड़े हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब छोटे सपनों से काम नहीं चलने वाला है। हमें बड़े सपने देखने हैं, क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं, हमारी सोच के क्षितिज को विस्तृत करते हैं। कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है, जब अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है। जब अपने सपनों, अपने संकल्पों और अपनी सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिएं। जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाइयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने की सामर्थ्य अपने आप उभरकर सामने आती है। आज भारत ने भी एक बहुत बड़ा सपना देखा है, दृढ़ संकल्प के साथ देखा है, नई ऊंचाइयों को छूने के लिए देखा है।

वो सपना है कि जब सन् 1947 में आजादी के 100 साल होंगे, तो हम विकसित भारत बनाकर रहेंगे। 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से इस लक्ष्य को हमें हासिल करना है। जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है तो यह दुनिया की नजरों में भी हमारे साहस का परिचायक बन जाता है। दुनिया हमारी तरफ देखने का नजरिया बदलने के लिए मजबूर हो जाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के कोटि-कोटि नागरिकों ने एक संकल्प के साथ, समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हर प्रकार से प्रयास किया है। मैं उनके इन प्रयासों को आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं। उसी का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी को परास्त करके उससे बाहर निकले हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब एनर्जी के बिना भी नई दुनिया को चलाना मुश्किल है। इसलिए हमें चिप, एआई और डेटा सेंटर के लिए बहुत बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत पड़ेगी। एनर्जी सिक्योरिटी हमारे समय की मांग है। इसलिए हमने पहले से ही उस दिशा में एक के बाद एक मजबूत कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एनर्जी सिक्योरिटी का एक बड़ा माध्यम है परमाणु ऊर्जा। हमने संसद में 'शांति एक्ट' पास करके एक नए लक्ष्य की तरफ जाने का रास्ता तय कर लिया है। सन् 2047 तक हम 100 गीगा वॉट न्यूक्लियर पॉवर का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसी एक दशक में हम 5 नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बार संसाधनों की कमी के कारण देश रुकता नहीं है, लेकिन रुकने का कारण सोच की सीमाएं होती हैं। जब सोच बंध जाती है, सीमाओं में सड़ने लग जाती है, तब हम अपनी सामर्थ्य को भी पहचान नहीं पाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आज उस युग को भी याद करना चाहूंगा जब भारत की सामर्थ्य को सप्तसिंधु के रूप में हम जानते थे, समझते थे, सुनते थे। अब विकसित भारत बनाने के लिए हमें नई धारा चाहिए। उन्होंने सप्तधारा के तौर पर मैन्युफैक्चरिंग पावर, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन इकोनॉमी एवं ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर का उल्लेख किया।

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