भारत में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का फैलता मकड़जाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। जब से सोशल मीडिया का प्रसार हुआ है, हनीट्रैप संबंधी मामले काफी बढ़ गए हैं। अब भारतीय वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी पर पाकिस्तानी महिला एजेंट के हनीट्रैप में फंसने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिस पर चर्चा होनी चाहिए। इस अधिकारी के पास देश की सुरक्षा से जुड़ी महत्त्वपूर्ण जानकारी थी, लेकिन यह दुश्मन देश के जाल में ऐसा फंसा कि अपने फर्ज से समझौता कर बैठा। जब इतना वरिष्ठ अधिकारी आसानी से विचलित हो सकता है तो आम आदमी कितना सावधान है? सरकारी अधिकारी हो या आम आदमी, सबको आईएसआई के एक डिजिटल पैंतरे के बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए। उसने पाकिस्तान में एक यूनिट बना रखी है, जिसमें कई महिलाओं को नियुक्त किया गया है। उनका मुख्य काम भारतीय नागरिकों को हनीट्रैप में फंसाकर सुरक्षा संबंधी जानकारी हासिल करना है। इन महिला एजेंटों को भारतीय जीवनशैली का प्रशिक्षण देकर मैदान में उतारा जाता है। ये बिंदी, सिंदूर जैसे सौभाग्य-प्रतीक धारण करती हैं। कुछ मामलों में इनके कमरों की दीवारों पर देवी-देवताओं के चित्र भी दिखाए दिए, ताकि शिकार को इनके धोखे का एहसास ही न हो। ये जानकारी लेने में इतनी शातिर होती हैं कि व्यक्ति को आसानी से पता नहीं चलता है। एक व्यक्ति, जो सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण जगह पर तैनात था, के पास किसी अनजान महिला का फोन आया। उससे पूछा गया, 'क्या आप ... जी बोल रहे हैं?' उसने कहा, 'नहीं, मैं तो ... बोल रहा हूं।' महिला अपनी बात पर अड़ी रही, 'मुझे तो बताया गया था कि यह नंबर ... का है!' वह व्यक्ति मना करता रहा कि 'नहीं, यह नंबर मेरा ही है।' इस तरह पाकिस्तानी महिला एजेंट ने बड़ी आसानी से उस व्यक्ति का नाम मालूम कर लिया। दो-तीन दिन बाद फिर उसी महिला ने फोन कर माफी मांगी कि 'उस दिन मुझसे गलती हो गई थी, मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था।'
व्यक्ति ने कहा, 'कोई बात नहीं, गलतफहमी की वजह से ऐसा हो जाता है।' धीरे-धीरे बात आगे बढ़ती गई। महिला अपने बारे में जानकारी (जो पूरी तरह गलत थी) देती गई और वह व्यक्ति भी अपने बारे में जानकारी (जो बिल्कुल सही थी) देता गया। महिला खुद को सेना के अस्पताल में कार्यरत अधिकारी बता रही थी। एक दिन उसने कोई फर्जी पर्चा भेजकर कहा, 'हमारे यहां यह काम होता है। आपके यहां क्या होता है?' व्यक्ति ने भी अपने कार्यस्थल से जुड़ीं तस्वीरें भेज दीं। मामला शादी की बात तक पहुंच गया। उस व्यक्ति को पता ही नहीं था कि प्रेम के नाम पर उसका इस्तेमाल किया जा रहा है, वह जानकारी भेजकर देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। एक दिन भारतीय एजेंसियों के अधिकारी उस तक पहुंच गए। तब उसे पता चला कि उसके साथ कितना बड़ा धोखा हुआ है! पाकिस्तान की एक महिला एजेंट के तौर-तरीके सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे हैं। वह किसी दफ्तर में फोन कर कड़क आवाज में पूछती है, 'साहब कहां हैं? मैं उनकी पत्नी बोल रही हूं। उनका फोन नहीं लग रहा है। दूसरा नंबर दीजिए।' यह भी कहा जाता है कि जब भारत सरकार अनुच्छेद 370 हटाने की तैयारी कर रही थी और सोशल मीडिया पर कयासों का बाज़ार गर्म था, तब उसने जम्मू-कश्मीर के कई स्कूलों, सरकारी दफ्तरों में फोन कर हालात का पता लगा लिया था। जब 'ऑपरेशन सिंदूर' का आगाज हुआ तो बुरी तरह भयभीत पाकिस्तान ने भारतीय सैनिकों की आवाजाही का पता लगाने के लिए ऐसे कई पैंतरे आजमाए थे। उस समय पाकिस्तान को जानकारी मुहैया कराने के आरोप में बहुत लोग पकड़े गए थे। दुश्मन एजेंसियों ने सोशल मीडिया को जासूसी का अड्डा बना रखा है। इस मंच पर बहुत सोच-समझकर लोगों को जोड़ना चाहिए। अनजान व्यक्ति को निजी जीवन, कार्यस्थल और अपने आस-पास के इलाकों की कोई जानकारी नहीं देनी चाहिए।