बांग्लादेश में 'तूफान' की आहट

यह स्थिति पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंताजनक है

भारत सरकार को अपना किरदार बहुत मजबूती से निभाना होगा

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर में स्वदेश लौटने की घोषणा कर इस पड़ोसी देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अगर वे अपने फैसले पर अडिग रहेंगी और बांग्लादेश लौटेंगी तो उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इस घटना का असर भारत-बांग्लादेश के संबंधों पर भी पड़ सकता है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पूरी कोशिश होगी कि शेख हसीना स्वदेश न लौटें। उनकी सरकार दबाव बनाने में जुट जाएगी, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री के बांग्लादेश लौटने से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को नई ऊर्जा मिलेगी। हो सकता है कि उस स्थिति में शेख हसीना को हवाईअड्डे पर ही गिरफ्तार कर लिया जाए! उनके खिलाफ अदालतों में कई मामले लंबित हैं। कुछ नए मामले दर्ज कराए जा सकते हैं। बांग्लादेश सरकार शेख हसीना को शांति के लिए खतरा बताकर हवाईअड्डे से ही जेल भेज सकती है। बांग्लादेशी समाज अपने तीव्र विरोध प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। वहां ऐसी घटनाओं में भारी हिंसा का इतिहास रहा है। जब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक यह खबर फैलेगी कि शेख हसीना आ रही हैं तो उनके समर्थक और विरोधी, दोनों में भयंकर टकराव हो सकता है। इन घटनाओं का नतीजा क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। बांग्लादेश सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात कर सकती है। अगर हालात बेकाबू हुए तो कई लोग भारतीय इलाकों में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए सीमा पर तैनात हमारे सुरक्षा बलों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। शेख हसीना के समर्थक उनके भव्य स्वागत की तैयारियां करेंगे, भले ही पूर्व प्रधानमंत्री उन तक न पहुंचें। वे उनके सम्मान में जुलूस और जनसभाओं का आयोजन करेंगे। बांग्लादेश सरकार उन्हें रोकने के लिए कई हथकंडे अपनाएगी।

जिन कथित आंदोलनकारियों ने अगस्त 2024 में उपद्रव मचाया था, वे दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। हालांकि, इस बार उनकी भूमिका कुछ अलग हो सकती है। वे उस हवाईअड्डे पर धावा बोल सकते हैं, जहां शेख हसीना का विमान उतरेगा। यही नहीं, उन्हें जेल ले जाने की स्थिति में उस इमारत को निशाना बनाया जा सकता है। शेख हसीना की पार्टी के दफ्तर, समर्थकों के घर भी चपेट में आ सकते हैं। बांग्लादेशी हिंदुओं को अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि कट्टरपंथी तत्त्व उन पर हमला करने के लिए ऐसे मौकों का इंतजार करते हैं। बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों को अपने घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और उनके आस-पास सीसीटीवी कैमरे जरूर लगाने चाहिएं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ, महत्त्वपूर्ण दूतावासों, अंतरराष्ट्रीय मीडिया को ईमेल भेजकर अपनी सुरक्षा का मुद्दा उठाना चाहिए, ताकि बांग्लादेश सरकार पर दबाव पड़े और वह उन इलाकों की सुरक्षा की ओर ध्यान दे। भारतीय मीडिया और यूट्यूबरों को यह मुद्दा जोर-शोर से उठाना चाहिए। शेख हसीना के बेटे सजीब वाजिद जॉय के ये शब्द असल हालात को बयान करते हैं- 'अगस्त 2024 से बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याओं को वैध बना दिया गया है। आज बांग्लादेश एक विफल राष्ट्र है और वहां कानून व्यवस्था नहीं है। नई दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि भारत की पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश एक और पाकिस्तान बन गया है।' शेख हसीना को हटाने के पीछे गहरी साजिश थी। इसका सबसे ज्यादा नुकसान बांग्लादेश के आम लोगों को हुआ है। जो देश शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, उसे ग्रहण लग गया है। कट्टरपंथियों की पौ-बारह हो गई है। यह स्थिति पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंताजनक है। भारत सरकार को अपना किरदार बहुत मजबूती से निभाना होगा।

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