कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक और किसानों के हितों से समझौते का सवाल ही नहीं उठता है: डीके शिवकुमार

संगठनों से राज्यव्यापी बंद के प्रस्ताव को वापस लेने की अपील की

Photo: @DKShivakumar X account

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कहा कि कावेरी मुद्दे पर राज्य के किसानों और लोगों के हितों की रक्षा के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है। साथ ही, उन्होंने संगठनों से राज्यव्यापी बंद के प्रस्ताव को वापस लेने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर कावेरी जल विवाद को देखते हुए बेंगलूरु की अपनी यात्रा टालने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इस कदम को दोनों राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने में मददगार बताया।

दोनों नेताओं की कावेरी मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार को मुलाकात होनी थी, लेकिन शिवकुमार ने विजय से अपनी यात्रा टालने का अनुरोध किया, ताकि बातचीत बेहतर माहौल में हो सके, क्योंकि इस हफ़्ते की शुरुआत में अंतर-राज्यीय विवाद को लेकर पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं कावेरी बेसिन में जन्मा एक किसान का बेटा हूं। कावेरी मुद्दे पर राज्य और किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता करने का सवाल ही नहीं उठता है। बंगारप्पा के कार्यकाल से ही इस विषय पर किसी के साथ अन्याय न हो, इस भावना के साथ प्रशासन काम करता आया है और वर्तमान सरकार भी राज्य के लोगों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विपक्षी दल भाजपा और जद (एस) ने भी अपने-अपने शासनकाल में इस दिशा में प्रयास किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब तक केवल 30-35 प्रतिशत वर्षा हुई है, जिससे सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। तमिलनाडु ने 9 टीएमसी पानी की मांग की थी, लेकिन कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था। उस समय समय पर वर्षा नहीं हुई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में हुई बारिश के कारण स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और फिलहाल जलाशयों में कुल 68,314 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। इसमें काबिनी में 24,000 क्यूसेक, केआरएस में 22,000 क्यूसेक, हेमावती में 11,884 क्यूसेक और हरंगी में 10,430 क्यूसेक पानी आ रहा है।

उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार इस समय तक तमिलनाडु को 40 टीएमसी पानी छोड़ा जाना चाहिए था। हालांकि, काबिनी जलाशय की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छोड़े गए पानी सहित जून में 2.9 टीएमसी और जुलाई में 0.7 टीएमसी, यानी अब तक कुल 3.6 टीएमसी पानी ही छोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे कैसी भी कठिन परिस्थिति आए, पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलाशयों में 40 टीएमसी पानी सुरक्षित रखा जाएगा। फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर पेयजल आवश्यकताओं और तालाबों को भरने के लिए नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। सरकार की अगली सलाह तक किसानों से नई फसल की बुवाई नहीं करने का अनुरोध किया गया है।

उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विपक्षी दलों (भाजपा-जद एस) के नेताओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार ने खुले मन से स्वीकार किया है। संकट की स्थिति में जल बंटवारे के फॉर्मूले (डिस्ट्रेस फॉर्मूला) और सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने के संबंध में विधि विशेषज्ञों से चर्चा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, प्रधानमंत्री से मुलाकात कर राज्य की वर्तमान स्थिति से उन्हें अवगत कराने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का भी निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि मेकेदाटु परियोजना कावेरी विवाद का स्थायी समाधान है और इसमें कोई तकनीकी खामी नहीं है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए सभी दलों के नेताओं ने समर्थन दिया है तथा आवश्यक तकनीकी स्पष्टीकरण जल्द ही केंद्र सरकार को उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय राजनीति में नए हैं, लेकिन एक परिपक्व नेता हैं। कावेरी क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए हमारे अनुरोध पर उन्होंने अपनी कर्नाटक यात्रा स्थगित कर दी है। स्थिति सामान्य होने के बाद उनके साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा कर इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा।

डीके शिवकुमार ने कहा कि अगस्त के अंत तक राज्य के सभी तालुकों से वर्षा और फसल क्षति की रिपोर्ट मंगाई जाएगी। राजस्व मंत्री केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार इसकी समीक्षा करेंगे और मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा के बाद आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त तालुकों की घोषणा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं किसानों और राज्य के हित में खड़ी होकर कानूनी लड़ाई लड़ रही है, तब विरोध प्रदर्शन या बंद की आवश्यकता नहीं है। इसलिए 13 अगस्त को प्रस्तावित कर्नाटक बंद को वापस लेने का सभी कन्नड़ समर्थक संगठनों, किसान संगठनों और विपक्षी नेताओं से आग्रह करता हूं।

About The Author: News Desk