मंड्या/दक्षिण भारत। कन्नड़ कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को मंड्या में अपना विरोध प्रदर्शन और तेज़ कर दिया। यह विरोध सीडब्ल्यूआरसी के उस निर्देश के ख़िलाफ़ था जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोज़ाना 3,500 क्यूसेक कावेरी का पानी छोड़ने को कहा गया था।
उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की फ़िल्म 'जना नायकन' के पोस्टर फाड़े। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह दबाव में न झुके और तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी न छोड़े।
एक सिनेमा हॉल में, जहां ‘जना नायकन’ दिखाई जा रही थी, कार्यकर्ताओं ने थिएटर को घेर लिया, मैनेजमेंट से बातचीत की और फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने की मांग की। इसके बाद मैनेजमेंट इसे रद्द करने के लिए सहमत हो गया।
प्रदर्शनकारियों ने थिएटर के बाहर फ़िल्म के पोस्टर फाड़ दिए और सीडब्ल्यूआरसी के निर्देश के ख़िलाफ़ नारे लगाए।
उन्होंने डिप्टी कमिश्नर (ज़िला कलेक्टर) के ज़रिए राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कावेरी का पानी तमिलनाडु को न छोड़ने की अपील की गई और मंड्या में किसानों के आंदोलन का समर्थन किया गया।
प्रदर्शनकारियों में से एक ने कहा, 'मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कृपया उन्हें (संबंधित अधिकारियों को) बताएं कि हमारे पास पीने का पानी भी नहीं है और न ही हमारे मवेशियों के लिए पानी है। लोग बहुत मुश्किल हालात में हैं। उनसे गुज़ारिश करें कि वे हमें थोड़ा और समय दें।'
उसने कहा कि मंड्या ज़िले के लोग कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए हमेशा सबसे आगे रहे हैं।
प्रदर्शनकारी ने कहा, 'कृपया हमारी तरफ़ से उन्हें मनाइए। हम आप पर भरोसा कर रहे हैं। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि व्यक्तिगत रूप से दखल दें और सुनिश्चित करें कि यह मामला सुलझ जाए।'
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि राज्य में पेयजल संकट को देखते हुए कर्नाटक कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि अगर सरकार तमिलनाडु को पानी छोड़ने के फैसले पर आगे बढ़ती है तो आंदोलन और तेज़ हो जाएगा।
उन्होंने तर्क दिया कि कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देश को लागू करने से पहले कर्नाटक में पानी की मौजूदा स्थिति, खासकर पीने के पानी के संकट को ध्यान में रखा जाना चाहिए।