पेपर लीक मामले: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कड़ी सज़ा वाले मसौदा विधेयक को मंज़ूरी दी

मोदी सरकार उठाने जा रही सख्त कदम

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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पेपर लीक के मामलों में कड़ी सज़ा सुनिश्चित करने वाले एक मसौदा विधेयक को मंज़ूरी दे दी। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक, संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक में शामिल लोगों को मौजूदा कानूनों की तुलना में कड़ी सज़ा देने वाले विधेयक के मसौदे को मंज़ूरी दी गई।

गुरुवार देर रात एक वीडियो संदेश में मोदी ने घोषणा की कि अगले सप्ताह संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें पेपर लीक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान होगा।

यह घोषणा 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बाद की गई है। यह पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े, परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और मई में नीट-यूजी पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवज़ा देने की मांग कर रही है।

एनआईए जांच की मांग वाली पीआईएल पर सुनवाई करने से उच्च न्यायालय का इन्कार 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस पीआईएल पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया, जिसमें नीट-यूजी पेपर लीक और उससे जुड़े दूसरे मुद्दों के विरोध में 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में संसद तक निकाले गए मार्च की एनआईए या किसी स्पेशलाइज़्ड एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि तोड़-फोड़ की कथित घटनाओं की जानकारी और नोटिस अधिकारियों को दे दिया गया है, और वे कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे।

पीठ ने यह भी कहा कि किसी मामले को जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपना केंद्र का काम है, न कि न्यायालय का।

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