दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं ने कुछ ज्यादा ही तीखे तेवर दिखा दिए। उन्हें देखकर किसी को भ्रम हो सकता है कि धरती पर इनसे बड़ा छात्र-हितैषी कोई और नहीं है। हालांकि विरोध प्रदर्शन में जाना उनका अधिकार है। वे किसी के हक में आवाज उठाने के लिए आज़ाद हैं। ऐसे मौकों पर इस बात का जिक्र करना जरूरी है कि जो दल आज खुद को सच्चे क्रांतिकारी की भूमिका में पेश करने को आमादा हैं, जब वे सत्ता में थे तो उन्होंने छात्रों का कितना भला किया था? क्या उनके राज में पुलिस आम जनता पर रोजाना ही पुष्पवर्षा कर रही थी? क्या उन्होंने गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी को दूर कर दिया था? सीजेपी का 'प्रदर्शन' जिस दिशा में जा रहा है, उससे साफ पता चलता है कि यह कोई प्रदर्शन नहीं है। अब तक सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके इसके केंद्र में थे। जैसे-जैसे मामला तूल पकड़ता जा रहा था, विपक्षी दलों में इस बात को लेकर बेचैनी बढ़ती जा रही थी कि कहीं ये दोनों ही मैदान फतह न कर लें! उनके मन में वर्ष 2011 की यादें जरूर ताजा हुई होंगी, जब अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन कर संप्रग सरकार की जड़ें हिला दी थीं। अरविंद केजरीवाल और उनके साथी उसी आंदोलन से निकले थे, जो मंच पर बड़े-बड़े भाषण देकर भ्रष्टाचार खत्म करने की कसमें खाया करते थे। बाद में, वे खुद भ्रष्टाचार, गुटबाजी, सार्वजनिक धन की बर्बादी समेत कई गंभीर आरोपों के लपेटे में आए और दिल्ली विधानसभा चुनाव बुरी तरह हारे। इस बार कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। वे नहीं चाहते कि सोनम वांगचुक या अभिजीत दीपके की शक्ल में फिर कोई 'केजरीवाल' प्रकट हो जाए। वे इस बात का जोखिम नहीं लेना चाहते कि दोबारा कोई आम आदमी पार्टी उभरे और वह उनकी जमीन पर कब्जा कर ले।
विपक्षी दलों के लिए यह प्रदर्शन महफिल लूटने की होड़ में बदल गया है। उनके कैमरों ने पोजिशन संभाल ली है। कुछ मिनटों के हंगामे के बाद, उनका आईटी विभाग सोशल मीडिया पर तस्वीरें फैलाकर ऐसा माहौल बनाने में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है कि छात्रों के लिए अकेले हम फिक्रमंद हैं। इन तस्वीरों के जरिए आगामी चुनावों में वोटबैंक पक्का करने का जतन किया जाएगा। कांग्रेस को खटका है कि वह सपा और 'आप' से पीछे न रह जाए, इसलिए गुरुवार शाम होते-होते राहुल गांधी तीन बसों में इंडि गठबंधन के कई नेताओं को लेकर 'गांधी स्मृति' पहुंच गए। उन्होंने फुटेज लेने की पूरी कोशिश की। श्रेय लेने में कोई और बाज़ी न ले जाए, इसके लिए माहौल बनाया। पहले, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई थी, बाद में जाने दिया। 'आप' ने यह आरोप लगाकर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है कि राहुल को प्रधानमंत्री आवास के बाहर इसलिए धरने की 'मौन स्वीकृति' मिली, ताकि 'आप' और सीजेपी को कमजोर दिखा सकें। वह कांग्रेस में भाजपा की बी टीम ढूंढ़ रही है। वैसे, सीजेपी वाले भी अपने एक रणनीतिकार को ढूंढ़ रहे थे, जो देशभर के युवाओं से जंतर-मंतर आने, 'संसद चलो मार्च' में शामिल होने की अपील कर खुद मशहूर फ़ास्ट फूड आउटलेट का बर्गर खाने में व्यस्त हो गए। प्रवक्ता पद से हटाए जाने के बाद विजेता दहिया समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर सीजेपी की पोल खोल रहे हैं। सीजेपी वाले इनकी पोल खोल रहे हैं। ये जनाब 'संसद चलो मार्च' के समय कहीं और तफ़रीह कर रहे थे। इन्हें देखकर युवाओं ने सवाल किए तो उन्हीं पर बरस पड़े। अंग्रेजी में धुआंधार प्रवचन देने लगे। जो जरा-सी भूख-प्यास बर्दाश्त नहीं कर सकते, उनके नारों पर आंखें मूंदकर विश्वास करना कितना उचित है? ऐसे लोग पूरी रात क्रांति की योजना बनाते हैं और पूरा दिन चद्दर ओढ़कर सोते हैं।