तेहरान/दक्षिण भारत। इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने घोषणा की है कि उसने जॉर्डन के एक एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी सेना के अहम ठिकानों और जगहों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है। संगठन ने इस कार्रवाई को ईरान पर अमेरिकी हमलों का बदला बताया है।
जॉर्डन के लोगों के नाम जारी एक बयान में आईआरजीसी ने कहा कि यह हमला 'ऑपरेशन नसर-2' (विक्ट्री-2) के दूसरे चरण के दौरान भोर से पहले किया गया।
आईआरजीसी ने कहा कि उसकी फ़ोर्स ने जॉर्डन की ज़मीन पर मौजूद एक एयर बेस पर 'बच्चों को मारने वाली अमेरिकी सेना' के अहम ठिकानों और पोस्ट पर हमला किया। इस एयर बेस का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए किया गया था। उसने यह भी कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल हमले का मकसद अमेरिकी अपराधियों को उनके कामों के लिए सज़ा देना था।
बयान में कहा गया है कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ़ अमेरिका-इज़राइल के हमले के पहले दिन, उन्हीं ठिकानों का इस्तेमाल एक ऐसे हमले में किया गया था जिसमें दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में 168 ईरानी स्कूली बच्चे और उनके शिक्षक मारे गए थे।
जॉर्डन की जनता को संबोधित करते हुए, आईआरजीसी ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान के मन में जॉर्डन के प्रति कोई दुश्मनी नहीं है, बल्कि वह इस अरब देश के लोगों का बहुत सम्मान करता है।
इसमें कहा गया है कि जॉर्डन के लोग किसी भी दूसरे देश के मुकाबले फ़िलिस्तीनी लोगों के दुख को बेहतर समझते हैं और वे गाज़ा में इज़राइली शासन के अपराधों से वाकिफ़ हैं, जिनमें अमेरिका की सीधी भागीदारी से 70,000 फ़िलिस्तीनियों (जिनमें 20,000 बच्चे शामिल हैं) की हत्या भी शामिल है।
आईआरजीसी ने यह भी कहा कि इलाके से कब्ज़ा करने वाले अमेरिकी सैन्य अड्डों को हटाने की जॉर्डन के लोगों की मांग, फ़िलिस्तीनी लोगों को बचाने और इलाके में सुरक्षा बहाल करने में अहम योगदान देगी।
बयान के आखिर में जॉर्डन की खुशहाली और सम्मान के लिए ईरान की इच्छा जताई गई।