मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक सीए से 21 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी का मामला इस बात की पुष्टि करता है कि साइबर ठगों द्वारा उच्च शिक्षित लोगों को भी बड़ी आसानी से धोखा दिया जा सकता है। लगभग 70 साल के इन सीए ने अपने जीवन में कई वित्तीय मामले सुलझाए होंगे, लेकिन वृद्धावस्था में आकर ये खुद ऐसे फेर में पड़ गए कि जीवनभर की बचत गंवा बैठे। सीए, जज, वकील, डॉक्टर, शिक्षक, वैज्ञानिक - ये कुछ ऐसे पेशे हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि इन्हें अन्य लोगों से ज्यादा ज्ञान होता है। आश्चर्य की बात है कि इन लोगों के साथ साइबर ठगी की कई घटनाएं हो चुकी हैं। ग्वालियर में सीए को ठगने के लिए अपराधियों ने जो तरीका अपनाया, वह काफी पुराना है। उसके बाद तो कई और तरीके आ चुके हैं। वे भी पुराने हो गए हैं। संभवत: सीए ने उनके बारे में न कभी सुना होगा, न कभी पढ़ा होगा। अगर उन्हें इसकी जानकारी होती तो इतनी बड़ी रकम गंवाने की नौबत ही न आती। हर व्यक्ति को इस तरीके के बारे में मालूम होना चाहिए, खासकर उन्हें, जिनके पास अच्छी-खासी बचत है। साइबर अपराधियों का एक पैंतरा उनसे सबकुछ छीन सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के पास एक ऑनलाइन प्रस्ताव आता है- 'हमारी योजना में निवेश करें और कई गुना मुनाफा कमाएं।' ऐसे प्रस्ताव वॉट्सऐप, टेलीग्राम और एसएमएस पर ही ज्यादा मिलते हैं, क्योंकि साइबर ठग किसी मोबाइल नंबर के आखिरी तीन अंकों में एक-एक अंक और जोड़ते हुए शिकार ढूंढ़ते हैं। अगर वे सौ लोगों को संदेश भेजते हैं तो दर्जनभर लोग जरूर फंस जाते हैं। उन संदेशों में दावा किया जाता है कि हमारी योजना में निवेश करेंगे तो रातोंरात मालामाल हो जाएंगे।
प्राय: ऐसे प्रस्तावों के साथ किसी महिला की सुंदर तस्वीर लगी होती है, जो एआई निर्मित हो सकती है। संदेश में महिला का नंबर भी दिया होता है। उससे बात करने पर वह विश्वास दिलाती है कि 'योजना बिल्कुल सही है ... अगर अभी निवेश करेंगे तो मुनाफा ज्यादा होगा ... देर करेंगे तो घाटे में रहेंगे।' कई पुरुष यहीं धोखा खा जाते हैं। वे लालच के साथ रूपजाल के शिकार हो जाते हैं। वे उस महिला के कहने पर अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य के अनुसार रकम भेजते जाते हैं। साइबर ठग एक और चाल चलते हैं। वे अपने शिकार को ऑनलाइन ग्रुप में शामिल कर लेते हैं, जहां उसके मुनाफे का फर्जी विवरण पेश किया जाता है। जो साइबर ठग तकनीकी रूप से ज्यादा सक्षम होते हैं, वे वेबसाइट बनाकर अपने शिकार को यह विश्वास दिलाते हैं कि आपका निवेश सुरक्षित है और मुनाफे में बढ़ोतरी हो रही है। इसके बाद नया खेल शुरू होता है। जब व्यक्ति देखता है कि वह मालामाल हो गया है तो रकम निकालने की कोशिश करता है। तब उसे बताया जाता है कि 'यह रकम ऐसे नहीं निकलेगी ... अभी थोड़ा और निवेश करें।' वह महिला उसे विश्वास दिलाती रहती है कि थोड़ा-सा निवेश और करते ही पूरी रकम आपके बैंक खाते में भेज दी जाएगी। कुछ लोगों को रकम का बहुत छोटा हिस्सा लौटाया भी जाता है, ताकि वे शक न करें। साइबर ठग अलग-अलग बहाने से रकम मांगते रहते हैं। आखिर में, जब उस व्यक्ति के पास कुछ नहीं बचता, तब वह पुलिस से मदद मांगता है। ये उच्च शिक्षित लोग ऐसी योजनाओं के चक्कर में फंसने के बजाय यह क्यों नहीं सोचते कि जो व्यक्ति मुझे मालामाल बनाने का दावा कर रहा है, उसे मुझसे ही रुपए मांगने की जरूरत क्यों पड़ रही है? यह खुद मालामाल नहीं हुआ, लेकिन मुझे बना देगा! ऐसा कैसे संभव है? स्पष्ट है कि दाल में काला नहीं, बल्कि दाल ही काली है। ऐसी निवेश योजनाओं से बचकर रहें, अन्यथा पछतावे के सिवा कुछ नहीं बचेगा।